गांधी समाधि के पास अब्दुल्ला आजम की बेशकीमती जमीनों पर ईडी की नजर, जौहर यूनिवर्सिटी के बाद समाजवादी पार्टी के नेता की बढ़ी मुश्किलें

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती हुई नजर आ रही हैं, क्योंकि रामपुर में गांधी समाधि के पास स्थित उनकी करीब 10 हजार गज बेशकीमती जमीन प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के दायरे में आ गई है। जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न मामलों की जांच के बीच केंद्रीय जांच एजेंसी की यह नई सुगबुगाहट समाजवादी पार्टी के खेमे में सियासी हलचल तेज कर रही है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी बेबाक बयानों और मुकदमों के लंबे सिलसिले के लिए चर्चित समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान के परिवार की कानूनी मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों की जांच और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की लगातार चल रही कार्रवाई के बीच अब उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान की मुश्किलें और अधिक गहरी होती दिख रही हैं। प्रशासनिक और आधिकारिक गलियारों में इस बात की चर्चा बहुत जोरशोर से चल रही है कि रामपुर में स्थित गांधी समाधि के पास की करीब 10 हजार वर्ग गज बेशकीमती जमीन अब आधिकारिक रूप से केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी के रडार पर आ चुकी है। इस भूखंड की खरीद-फरोख्त, इसके मालिकाना हक और इसमें कथित तौर पर वित्तीय अनियमितताओं के इस्तेमाल को लेकर शुरू हुई जांच ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी के इस सियासी परिवार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। रामपुर से लेकर लखनऊ तक के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि यदि केंद्रीय एजेंसी इस मामले में शिकंजा कसती है, तो अब्दुल्ला आजम की मुश्किलें आने वाले दिनों में काफी बढ़ सकती हैं।
साल 2022 में जेल में बंद आजम खान के समय खरीदी गई थी जमीन, कोसी नदी के डूब क्षेत्र में है भूखंड
पूरे मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो यह जमीन सौदा साल 2022 का बताया जा रहा है, जब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान विभिन्न मामलों के चलते जेल में बंद थे। उस दौरान अब्दुल्ला आजम ने गांधी समाधि के पास स्थित इस बेशकीमती जमीन को अपने दो बेहद करीबी लोगों—अनवार और सालिम—से खरीदा था। हालांकि, जब यह सौदा हुआ था, तभी से स्थानीय स्तर पर इसकी वैधता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठने शुरू हो गए थे। प्रशासनिक और राजस्व विभाग की शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था कि जिस भूखंड की रजिस्ट्री कराई गई है, वह असल में कोसी नदी का डूब क्षेत्र (फ्लडप्लेन) है। नियमों के मुताबिक नदी के डूब क्षेत्र की जमीन पर इस तरह की खरीद-फरोख्त और निर्माण कार्य प्रतिबंधित होते हैं, लेकिन इसके बावजूद कथित तौर पर डूब क्षेत्र की इस जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने जब अपनी आंतरिक और राजस्व जांच बैठाई, तो कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं, जिसके बाद पुलिस थाने में औपचारिक मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की गई थी।
लेखपाल की शिकायत पर शहर कोतवाली में दर्ज की गई थी धोखाधड़ी और जालसाजी की एफआईआर
इस पूरी जमीन खरीद-फरोख्त के मामले में कानूनी शिकंजा तब और कस गया जब राजस्व विभाग के लेखपाल संजय गंगवार की तरफ से आधिकारिक रूप से कदम उठाया गया। लेखपाल संजय गंगवार द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर 19 जनवरी 2024 को रामपुर के शहर कोतवाली थाने में अब्दुल्ला आजम खान, उनके सहयोगियों अनवार, सालिम और एक अन्य व्यक्ति अब्दुल्ला परवेज के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी। पुलिस और प्रशासनिक दस्तावेजों के अनुसार, अब्दुल्ला आजम के नाम पर इस जमीन की रजिस्ट्री किसी एक बार में नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग चरणों या किस्तों में पूरी की गई थी। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, पहली रजिस्ट्री 21 फरवरी 2022 को 0.9110 हेक्टेयर जमीन की कराई गई थी, जबकि इसके बाद 4 अप्रैल और 8 अप्रैल 2022 को 0.304-0.304 हेक्टेयर जमीन की और रजिस्ट्रियां कराई गईं। जब इन रजिस्ट्रियों के दस्तावेज सार्वजनिक हुए, तो स्थानीय स्तर पर कुछ जागरूक नागरिकों और राजनीतिक विरोधियों ने प्रशासन से लिखित शिकायत करते हुए यह गंभीर आरोप लगाया था कि सुनियोजित तरीके से सरकारी और प्रतिबंधित श्रेणी की जमीन की अवैध रजिस्ट्री कराई गई है।
19 अगस्त को ईडी की छापेमारी और शौकत रोड स्थित एएंडएस इंटरप्राइजेज पर कसा शिकंजा
मामले में नया और सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस पूरे प्रकरण में सीधी दखल देनी शुरू कर दी। याद दिला दें कि पिछले महीने यानी 19 अगस्त को केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों की जांच के सिलसिले में रामपुर में एक साथ कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। इसी कड़ी में ईडी की टीमों ने शौकत रोड स्थित 'एएंडएस इंटरप्राइजेज' नामक फर्म के ठिकानों पर भी दबिश दी थी। दस्तावेजों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह फर्म अनवार और सालिम के नाम से ही संचालित की जाती है, जिन्हें अब्दुल्ला आजम का बेहद करीबी माना जाता है। जांच एजेंसियों के सूत्रों का दावा है कि उस छापेमारी के दौरान ईडी की टीम ने कई अत्यंत महत्वपूर्ण और गोपनीय दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। इन जब्त किए गए कागजातों में गांधी समाधि के पास स्थित उसी विवादित 10 हजार गज जमीन की खरीद-फरोख्त, पैसों के लेन-देन, एग्रीमेंट और रजिस्ट्री से जुड़े मूल दस्तावेज भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिसके बाद से इस मामले की परतें तेजी से खुल रही हैं।
स्टांप चोरी के गंभीर आरोप और एक करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाए जाने का खुलासा
यह जमीन अपनी लोकेशन और क्षेत्रफल के लिहाज से अत्यंत बेशकीमती मानी जा रही है, क्योंकि स्थानीय रियल एस्टेट बाजार के भाव के अनुसार इस इलाके में जमीन की कीमत करीब एक लाख रुपये प्रति गज तक आंकी जाती है। इतने बड़े पैमाने पर हुए इस सौदे के दौरान वित्तीय नियमों की अनदेखी करने और भारी पैमाने पर स्टांप चोरी किए जाने के गंभीर आरोप भी प्रशासनिक जांच में सामने आए थे। स्टांप एवं पंजीकरण विभाग की जांच के बाद प्रशासन की ओर से इस मामले में स्टांप चोरी का संज्ञान लेते हुए एक करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम जुर्माना लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई थी, जिससे आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ गईं। प्रशासनिक अमले द्वारा लगाए गए इस जुर्माने और राजस्व की क्षति के मामलों ने यह साबित कर दिया कि इस जमीन सौदे में केवल कागजी हेराफेरी ही नहीं हुई, बल्कि सरकारी खजाने को भी चूना लगाने का पूरा प्रयास किया गया था, जिसकी परतें अब केंद्रीय जांच एजेंसियों के हाथ लग रही हैं।
काले धन के इस्तेमाल की आशंका और अब्दुल्ला आजम समेत सभी आरोपियों की कानूनी स्थिति
फिलहाल इस पूरे फौजदारी मुकदमे में अब्दुल्ला आजम खान समेत अन्य सभी आरोपी कानून के प्रावधानों के तहत जमानत पर चल रहे हैं और अपनी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। हालांकि, गांधी समाधि के पास स्थित इस जमीन की खरीद-फरोख्त में कथित तौर पर भारी मात्रा में काले धन (ब्लैक मनी) के इस्तेमाल और मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सुगबुगाहट ने एक बार फिर इस प्रकरण को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। हालांकि यह भी उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से इस विशिष्ट जमीन को लेकर अभी तक कोई अलग से आधिकारिक आपराधिक मामला या नई गिरफ्तारी की पुष्टि औपचारिक रूप से सामने नहीं आई है, लेकिन केंद्रीय एजेंसी के रडार पर इस सौदे के आने से राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप जरूर मच गया है। समाजवादी पार्टी के संस्थापक आजम खान के परिवार के लिए यह नया कानूनी संकट आने वाले दिनों में किस प्रकार की सियासी और न्यायिक चुनौतियां लेकर आता है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि अब्दुल्ला आजम की मुश्किलें फिलहाल कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।




