कौन हैं गुरुदेवश्री राकेशजी? जिनके आगे रणबीर कपूर ने झुकाए शीष

बॉलीवुड के जाने-माने सुपरस्टार रणबीर कपूर हाल ही में मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित एक भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां उन्होंने आध्यात्मिक गुरु पूज्य गुरुदेवश्री राकेशजी के 60वें जन्मोत्सव (अहो गुरुदेव समारोह) में शिरकत की। इस दौरान अभिनेता ने न केवल उनके समक्ष अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए, बल्कि उन्हें खुले मंच से ‘यूथ मैग्नेट’ (Youth Magnet) की उपाधि से भी नवाजा। इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम के बाद से ही देश भर में लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हो गए हैं कि आखिर आध्यात्मिक जगत की यह प्रसिद्ध हस्ती कौन हैं और उनकी शिक्षाओं का दायरा कितना व्यापक है। आइए विस्तार से जानते हैं गुरुदेवश्री राकेशजी के जीवन, उनके कार्यों और उनके प्रभाव के बारे में।

कौन हैं पूज्य गुरुदेवश्री राकेशजी और उनका शुरुआती जीवन

पूज्य गुरुदेवश्री राकेशजी का जन्म 26 सितंबर 1966 को मुंबई में एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। उन्हें बचपन से ही अध्यात्म और संतों की जीवनशैली के प्रति गहरी रुचि थी। महज़ आठ वर्ष की उम्र में उनके जीवन में एक ऐसा आध्यात्मिक मोड़ आया जब 19वीं सदी के महान संत और दार्शनिक श्रीमद् राजचंद्रजी की एक तस्वीर को देखकर वे तीन दिनों तक लगातार गहरे ध्यान और समाधि की स्थिति में चले गए थे। उनकी विलक्षण प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने दर्शनशास्त्र (Philosophy) में एम.ए. की डिग्री स्वर्ण पदक (Gold Medal) के साथ हासिल की और बाद में श्रीमद् राजचंद्रजी की प्रसिद्ध रचना ‘श्री आत्मीय सिद्धि शास्त्र’ पर व्यापक शोध करते हुए पीएचडी (Ph.D.) की उपाधि प्राप्त की।

श्रीमद् राजचंद्र मिशन धरमपुर की स्थापना और वैश्विक प्रसार

आध्यात्मिक ज्ञान के प्रचार-प्रसार और समाज सेवा के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने वर्ष 1994 में ‘श्रीमद् राजचंद्र मिशन धरमपुर’ (Shrimad Rajchandra Mission Dharampur) की स्थापना की। दक्षिण गुजरात के धरमपुर में स्थित इसका मुख्य आश्रम आज देश-विदेश के साधकों के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बन चुका है। वर्तमान समय में इस मिशन के केंद्र दुनिया भर के छह महाद्वीपों और 130 से अधिक देशों में फैले हुए हैं। गुरुदेवश्री भगवान महावीर के सिद्धांतों और श्रीमद् राजचंद्रजी के मार्ग का अनुसरण करते हुए लोगों को आत्म-साक्षात्कार और आंतरिक शांति का मार्ग दिखा रहे हैं। उनके अनुयायी उन्हें बेहद आदर से ‘बापा’ और ‘गुरुदेव’ कहकर संबोधित करते हैं।

युवाओं के बीच क्यों इतने लोकप्रिय हैं गुरुदेवश्री राकेशजी

रणबीर कपूर द्वारा उन्हें ‘यूथ मैग्नेट’ कहे जाने के पीछे एक बहुत बड़ा कारण है। गुरुदेवश्री ने आधुनिक पीढ़ी की भाषा और उनकी जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए अध्यात्म को बेहद सरल और व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया है। युवाओं को सही दिशा देने के लिए मिशन द्वारा ‘5 एस’ (सत्संग, साधना, सेवा, संस्कृति और खेल) का एक अनूठा ढांचा तैयार किया गया है। दुनिया भर में युवाओं के लिए विशेष केंद्र चलाए जाते हैं, जहां वे अपनी आंतरिक ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों में लगाना सीखते हैं। यही वजह है कि देश-विदेश के तमाम युवा, पेशेवर और फिल्मी हस्तियां उनकी सादगी और विचारों से आकर्षित होकर उनके आश्रम से जुड़ती हैं।

समाज सेवा, स्वास्थ्य और मानवीय कार्यों में अभूतपूर्व योगदान

गुरुदेवश्री राकेशजी केवल प्रवचन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका संगठन बड़े पैमाने पर परोपकारी और मानवीय कार्य करता है। उनके मार्गदर्शन में दक्षिण गुजरात और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। उनके द्वारा संचालित विशाल मल्टी-स्पेशलिटी अस्पतालों और मेडिकल कैंपों के माध्यम से लाखों वंचित लोगों का मुफ्त इलाज और ऑपरेशन किया जाता है। इसके अलावा महिला सशक्तिकरण के तहत आदिवासी महिलाओं को आजीविका का प्रशिक्षण देना, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा का प्रसार और आपदा राहत कार्यों में यह मिशन हमेशा सबसे आगे रहता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जैसी देश की कई दिग्गज हस्तियों ने भी उनके द्वारा किए जा रहे इन निस्वार्थ सेवा कार्यों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की है।

रणबीर कपूर का आध्यात्मिक जुड़ाव और ‘बियॉन्ड’ पुस्तक का विमोचन

मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन Center में आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान अभिनेता रणबीर कपूर ने अपने जीवन के निजी अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि पिता बनने के बाद उनका झुकाव अध्यात्म की ओर और अधिक बढ़ गया है। इस विशेष अवसर पर रणबीर कपूर ने गुरुदेवश्री राकेशजी के जीवन और दर्शन पर आधारित एक प्रेरणादायक पुस्तक ‘बियॉन्ड’ (Beyond) का विमोचन भी किया। इस कार्यक्रम में सिनेमा जगत और देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया। गुरुदेवश्री राकेशजी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि कैसे आधुनिक युग में प्राचीन भारतीय संस्कृति और मूल्यों को सहेजते हुए मानवता की सेवा की जा सकती है।

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