उप मुख्यमंत्री बनाएंगे तो बनेंगे, कौन छोड़ता है’, यूपी चुनाव से पहले ओपी राजभर ने खुलकर जताई अपनी बड़ी इच्छा

उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से ही शह और मात का खेल शुरू हो चुका है। लखनऊ, पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी से लेकर दिल्ली के सियासी गलियारों तक हर जगह गठबंधन और रणनीतियों को लेकर मंथन जारी है। इसी बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे बेबाक और कद्दावर नेताओं में शुमार, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर (OP Rajbhar) ने एक ऐसा बयान दे दिया है जिसने भारतीय जनता पार्टी (BJP) समेत पूरे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर हलचल तेज कर दी है। राजभर ने मीडिया के सामने खुलकर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा जाहिर करते हुए कहा है कि अगर उन्हें उत्तर प्रदेश का उप मुख्यमंत्री (Deputy CM) बनाया जाएगा तो वे इस पद को जरूर स्वीकार करेंगे।

'कौन छोड़ता है उप मुख्यमंत्री का पद?' – राजभर का दोटूक बयान

ओपी राजभर से जब पत्रकारों ने आगामी चुनाव के बाद उनकी भूमिका और डिप्टी सीएम बनने की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने अपनी चिर-परिचित बेबाक शैली में जवाब दिया। राजभर ने मुस्कुराते हुए कहा, 'अगर उप मुख्यमंत्री बनाएंगे तो बनेंगे, कौन छोड़ता है भाई?' उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। राजभर के इस सीधे और साफ संदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह आगामी विधानसभा चुनावों में एनडीए के भीतर अपनी पार्टी और स्वयं के लिए एक बहुत बड़ी और मजबूत भूमिका की उम्मीद कर रहे हैं।

पूर्वांचल की राजनीति में बेहद रसूखदार हैं ओम प्रकाश राजभर

ओपी राजभर का यह बयान केवल एक सामान्य इच्छा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी राजनीतिक बिसात छिपी हुई है। राजभर समाज और अति पिछड़े वर्ग (OBC) के मतदाताओं पर पूर्वांचल के गाजीपुर, मऊ, बलिया, जौनपुर, वाराणसी और आजमगढ़ जैसे जिलों में सुभासपा की बेहद मजबूत पकड़ मानी जाती है। यूपी की सत्ता के गलियारे तक पहुंचने में पूर्वांचल की भूमिका हमेशा से निर्णायक रही है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले अपनी इस मांग को सार्वजनिक कर राजभर ने बीजेपी हाईकमान को अपनी ताकत और अपनी अहमियत का अहसास कराने की कोशिश की है।

क्या राजभर की इस मांग से असहज होगी बीजेपी?

राजभर के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश भाजपा के भीतर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। यूपी में पहले से ही जातीय समीकरणों को साधने के लिए कई बड़े चेहरे मौजूद हैं। ऐसे में राजभर द्वारा सीधे तौर पर डिप्टी सीएम पद की दावेदारी ठोकने से एनडीए के अन्य सहयोगी दलों के भीतर भी सुगबुगाहत बढ़ सकती है। हालांकि, बीजेपी के स्थानीय और केंद्रीय नेतृत्व ने इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अंदरखाने यह माना जा रहा है कि टिकट बंटवारे और चुनाव बाद के मंत्रिमंडल गठन को लेकर सहयोगियों के बीच मोलतोल का दौर अब बेहद दिलचस्प होने वाला है।

चुनाव से पहले जातीय समीकरणों को साधने की बड़ी कवायद

उत्तर प्रदेश की सत्ता पर दोबारा काबिज होने के लिए हर राजनीतिक दल इस समय अति पिछड़े और दलित वोट बैंक को अपने पाले में करने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। राजभर इस वोट बैंक के एक बड़े नेता के तौर पर खुद को स्थापित कर चुके हैं। उनके इस बयान को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है ताकि उनके समर्थक और मतदाता यह समझ सकें कि सुभासपा केवल गठबंधन का हिस्सा नहीं है, बल्कि वह सरकार में शीर्ष स्तर पर भागीदारी की हकदार है। अब देखना होगा कि बीजेपी के शीर्ष रणनीतिकार राजभर की इस खुली इच्छा को किस तरह से संभालते हैं।

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