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“मोबिलिटी-वीक” के साथ नीति आयोग ने मूव: भारत के प्रथम विश्व मोबिलिटी शिखर सम्मेलन-2018 का सूत्रपात किया

नई दिल्ली: नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने 31 अगस्त से 06 सितंबर, 2018 तक चलने वाले “मोबिलिटी-वीक” के मद्देनज़र आयोजनों की एक श्रृंखला का आज सूत्रपात किया। यह मूव : भारत के प्रथम विश्व मोबिलिटी शिखर सम्मेलन-2018 के संबंध में है, जिसका आयोजन विज्ञान भवन में 07 और 08 सितंबर, 2018 को होगा। शिखर सम्मेलन का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी करेंगे।

सप्ताह भर में होने वाले आयोजनों के तहत विभिन्न समूह शिरकत करेंगे, जिनमें स्टार्ट-अप, अकादमिक हस्तियां, निगम, नीति विश्लेषक, गैर-सरकारी संगठन, सिविल सोसायटी इत्यादि शामिल हैं। इस दौरान मोबिलिटी परिदृश्य, भावी संभावनाओं तथा अवसरों एवं चुनौतियों से निपटने के लिए देश की तैयारी का जायजा लिया जाएगा। इन कार्यक्रमों में अकादमिक सम्मेलन, गोलमेज चर्चाओं, विषय वस्तु पर आधारित कार्यशालाओं का आयोजन होगा, ताकि विश्व मोबिलिटी शिखर सम्मेलन – 2018 के संबंध में अर्थपूर्ण संवाद के लिए नजरिया तैयार किया जा सके।

डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि देशभर और विश्व के मोबिलिटी क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों के साथ साझेदारी से मोबिलिटी के संबंध में भारत की रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी। शिखर सम्मेलन से भारत को अन्य देशों में होने वाले विकास से सीखने का भी अवसर मिलेगा।

गतिविधियों का सूत्रपात करते हुए श्री अमिताभ कांत ने कहा कि ‘ग्लोबल मोबिलिटी हेकथॉन’ और ‘पिच टू मूव’ जैसे आयोजनों से भारत की युवा पीढ़ी की आपार क्षमता उजागर होगी और यह बात स्पष्ट होगी की भारत अपने उज्ज्वल भविष्य की तरफ बढ़ने के लिए कितना तैयार है।

मोबिलिटी-वीक के बारे में

मोबिलिटी-वीक के तहत 31 अगस्त से 06 सितंबर, 2018 तक 17 आयोजन होंगे। इन आयोजनों में मोबिलिटी क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों के साथ चर्चा का अवसर मिलेगा।

प्रतिभागियों में विश्व और भारत के मोबिलिटी क्षेत्र के दिग्गज शामिल हैं। इनमें ओईएम, बैटरी निर्माता, चार्जिंग अवसंरचना प्रदाता, प्रौद्योगिकी सॉल्यूशन प्रदाता, भारत सरकार और विदेशों के प्रतिनिधि, विभिन्न अंतर-सरकारी संगठन, अकादमिक जगत और पॉलिसी थिंक-टैंक शामिल हैं।

मंत्रालय आदान-प्रदान

इसके तहत सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा एक कार्याशाला का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन में सार्वजनिक यातायात, साझा मोबिलिटी और संपर्कता के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके अलावा नीति आयोग के साथ मिलकर भारतीय रेल एक संगोष्ठी का आयोजन करेगी, जिसका विषय ‘भारतीय रेल में ई-मोबिलिटी’ है। इसका उद्देश्य परियोजना विकास कर्ताओं और अन्य हितधारकों को एक साझा मंच पर लाना है, ताकि भारतीय रेल को प्रभावशाली, हरित और सर्व सुलभ यातायात बनाया जा सके।

छात्र एवं उद्यमी

देश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समुदाय को शामिल करने के लिए आईआईटी दिल्ली 01 सितंबर को विद्युत वाहनों पर एक कार्यशाला की मेजबानी कर रहा है। तकनीकी सम्मेलन के बाद रेनॉल्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के श्री सुमित सहाय एवं अथर एनर्जी के श्री तरुण मेहता के साथ छात्रों की चर्चा का आयोजन किया जाएगा।

‘मूव हेक’ और ‘पिच टू मूव’ जैसे प्रतिस्पर्धी आयोजनों के लिए छात्र समुदाय भारी मात्रा में पंजीकरण करा रहा है। इन आयोजनों के विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा तथा 07 और 08 सितंबर, 2018 को होने वाले मूव शिखर सम्मेलन में विजेताओं का सम्मान किया जाएगा।

सार्वजनिक यातायात

अंतिम दूरी तक संपर्कता और साइकिल जैसे गैर-मोटर यातायात की भूमिका भावी समग्र मूविलिटी उपायों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। शिखर सम्मेलन की शुरूआत के पहले साइकिलिंग को प्रोत्साहन देने के लिए नीति आयोग 02 सितंबर को एक साइकिल रैली का आयोजन करेगा, जिसे माननीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह रवाना करेंगे। नीति आयोग के उपाध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी इसमें हिस्सा लेंगे।

मूव : विश्व मोबिलिटी शिखर सम्मेलन के बारे में

प्रौद्योगिकी लागत और व्यापार आधारित इनोवेशन के मद्देनज़र दुनिया में नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत वाहनों की तरफ झुकाव बढ़ता जा रहा है। इस पृष्ठभूमि में विभिन्न मंत्रालयों और उद्योग साझेदारों के सहयोग से नीति आयोग नई दिल्ली में 07 और 08 सितंबर, 2018 को ‘मूव : विश्व मोबिलिटी शिखर सम्मेलन’ का आयोजन कर रहा है। इस शिखर सम्मेलन में तीन बिन्दु होंगे – सम्मेलन, डिजिटल प्रदर्शनी और विशेष आयोजन। इससे वाहनों के विद्युतीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा और रोजगार विकास के लिए सरकार के उद्देश्य को पूरा करने में मदद मिलेगी तथा स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था की दिशा में भारत के कदम तेजी से बढ़ेंगे।

अपने तरह का यह पहला शिखर सम्मेलन है, जिसमें पूरे विश्व से 1200 प्रतिभागियों के शामिल होने की आशा है। इनमें सरकार, उद्योग, शोध-संगठनों, अकादमिक जगत, थिंक-टैंक और सिविल सोसायटी की हस्तियां शामिल हैं। यह सभी प्रमुख हितधारकों के साथ चर्चा करेंगे। सामान्तर सत्रों में पांच विषय आधारित पर्चों पर चर्चा होगी।

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