प्रदेश की जनता का उत्थान करना मेरा पहला कर्तव्य- केशव प्रसाद मौर्य

लखनऊ: उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी ने खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अन्तर्गत संचालित ‘प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना’ (PMFME) के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल ₹192,15,00,000 (1 अरब 92 करोड़ 15 लाख रुपये) की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह धनराशि प्रदेश के सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को नई ऊर्जा देने और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी।

बजट का आवंटन और मुख्य बिंदु
उप मुख्यमंत्री जी द्वारा अलग-अलग अनुदान संख्याओं के तहत बजट का विभाजन बेहद पारदर्शी और वर्ग-वार तरीके से किया गया है। यह राशि ‘मदर सेक्शन’ के तहत निम्नलिखित श्रेणियों में जारी की जाएगी: स्वीकृत धनराशि में अनुदान संख्या-10 के अंतर्गत ₹167.55 करोड़, अनुदान संख्या-81 के अंतर्गत ₹2.52 करोड़ तथा अनुदान संख्या-83 के अंतर्गत ₹22.08 करोड़ सम्मिलित हैं। इस प्रकार कुल ₹192.15 करोड़ (एक अरब बानवे करोड़ पंद्रह लाख रुपये) की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

लक्षित लाभार्थियों को मिलेगा सीधा लाभ
उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी ने कहा कि राज्य सरकार का मुख्य ध्येय समाज के हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। यह बजट विशेष रूप से सामान्य वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अनुसूचित जाति (SC) के उन लाभार्थियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा, जो खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) के क्षेत्र में अपना उद्यम स्थापित करना चाहते हैं या अपने मौजूदा व्यवसाय का विस्तार करना चाहते हैं।

उप मुख्यमंत्री जी का संदेश:
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना के तहत जारी यह धनराशि हमारे स्थानीय उत्पादकों, स्वयं सहायता समूहों और छोटे उद्यमियों को ‘लोकल फॉर वोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करने में मदद करेगी। अधिकारी यह सुनिश्चित करे कि अनुदान की यह राशि बिना किसी बाधा के सीधे पात्र लाभार्थियों तक पहुँचे।

योजना का उद्देश्य और प्रभाव
इस धनराशि का उपयोग सूक्ष्म खाद्य इकाइयों के उन्नयन, तकनीकी सहायता, कौशल प्रशिक्षण, बेहतर पैकेजिंग और विपणन (Marketing) सहायता प्रदान करने के लिए किया जाएगा। इससे न केवल कृषि उत्पादों की बर्बादी (Wastage) को रोका जा सकेगा, बल्कि किसानों की आय दोगुनी करने और स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन में भी मदद मिलेगी।

उप मुख्यमंत्री जी ने विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत धनराशि का उपयोग पूरी पारदर्शिता, गुणवत्ता और निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जाए, ताकि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लक्ष्यों को समय रहते हासिल किया जा सके।

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