लोककला आधारित ग्रीष्मकालीन कार्यशाला एवं चित्र प्रदर्शनी का सफल समापन
आर्य जनता इंटर कॉलेज, में आयोजित 20 दिवसीय लोककला आधारित ग्रीष्मकालीन कार्यशाला “कला से कौशल तक” के अंतर्गत आयोजित 3 दिवसीय चित्र एवं हस्तशिल्प प्रदर्शनी का सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह आयोजन राज्य ललित कला अकादमी, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश एवं कमला दयाल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ।
प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा, अध्यक्ष, राज्य ललित कला अकादमी एवं अकादमी सदस्य दुर्जन सिंह राणा की गरिमामयी उपस्थिति बच्चों एवं आयोजकों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रही।
प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा ने बच्चों की प्रतिभा की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद ग्रामीण अंचल के बच्चों ने चित्रकला एवं हस्तशिल्प कार्यों में जिस रचनात्मकता और सूक्ष्म कलात्मक दृष्टि का परिचय दिया है, वह अत्यंत प्रशंसनीय है। बच्चों द्वारा निर्मित मधुबनी कला एवं वर्ली लोककला आधारित चित्रों को देखकर उन्होंने विशेष प्रसन्नता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि राज्य ललित कला अकादमी निरंतर बच्चों एवं युवाओं में कला के प्रति रुचि, सांस्कृतिक जागरूकता एवं सृजनात्मक सोच विकसित करने हेतु कार्य कर रही है। इसी क्रम में उन्होंने बच्चों द्वारा निर्मित लोकचित्रों की प्रदर्शनी लखनऊ में आयोजित करने हेतु आमंत्रित किया।
प्रदर्शनी के समापन क्रम में प्रतिभागी बच्चों को माननीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार, जयवीर सिंह जी से उनके आवास पर भेंट करने का अवसर प्राप्त हुआ। माननीय मंत्री जी ने बच्चों द्वारा निर्मित लोककला चित्रों एवं हस्तशिल्प कार्यों का अवलोकन करते हुए उनकी मुक्त कंठ से सराहना की तथा कमला दयाल फाउंडेशन द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में किए जा रहे इस रचनात्मक एवं सांस्कृतिक प्रयास की प्रशंसा की।
उन्होंने बच्चों को भविष्य में बड़े कला मंचों से जोड़ने तथा उनकी प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का आशीर्वाद एवं प्रोत्साहन प्रदान किया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों, सहयोगी शिक्षकों एवं प्रतिभागी बच्चों का आभार व्यक्त किया गया। यह कार्यशाला ग्रामीण बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा, सांस्कृतिक चेतना एवं कला के प्रति बढ़ते उत्साह का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी।




