हुसैनाबाद ट्रस्ट की ज़मीनों पर अवैध कब्ज़े बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे: मौलाना कल्बे जवाद नक़वी

लखनऊ: हुसैनाबाद ट्रस्ट की ज़मीनों पर अवैध कब्जों और लगातार हो रहे गैरकानूनी निर्माण कार्यों का सिलसिला जारी है। रूमी गेट के पास बनाई जा रही पार्किंग और “लज़ीज़ गली” को लेकर शिया समुदाय में भारी नाराज़गी पाई जा रही है। विशेष रूप से उलमा, रॉयल फैमिली और अंजुमन हाय मातमी ने ट्रस्ट की संपत्तियों पर हो रहे अवैध कब्जों और गैरकानूनी निर्माण के खिलाफ आवाज़ बुलंद की है। इससे पहले छोटे इमामबाड़े में उलमा और ज़िम्मेदार लोगों की एक बैठक आयोजित हुई थी। इसके बाद आज जुमे की नमाज़ के बाद उलमा और अंजुमन हाय मातमी के सदस्य आसिफ़ी मस्जिद से रूमी गेट होते हुए “लज़ीज़ गली” और पार्किंग के नाम पर हो रहे कथित अवैध कब्जों का निरीक्षण करने पहुंचे। उनके साथ बड़ी संख्या में नमाज़ी भी मौजूद थे, जो हुसैनाबाद ट्रस्ट की ज़मीनों पर हो रहे कब्जों के खिलाफ नारेबाज़ी कर रहे थे। इस मौके पर मौलाना कल्बे जवाद नक़वी और अन्य उलमा ने संयुक्त रूप से कहा कि ट्रस्ट की ज़मीनों पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक हुसैनाबाद ट्रस्ट की पांच सदस्यीय समिति गठित नहीं की जाती, तब तक प्रशासन से कोई बातचीत नहीं होगी।

जुमे की नमाज़ के बाद उलमा और अंजुमन हाय मातमी के सदस्य ट्रस्ट में हो रही कथित बदइंतज़ामी, ट्रस्ट की ज़मीनों पर कब्जों और गैरकानूनी निर्माण के विरोध में रूमी गेट पहुंचे। वहां बन रही पार्किंग का निरीक्षण किया गया और जिला प्रशासन की निगरानी में हो रहे इस कार्य की आलोचना की गई। मौलाना कल्बे जवाद नक़वी ने कहा कि ट्रस्ट की ज़मीन पर न तो पार्किंग बनेगी और न ही निर्माण के नाम पर एक ईंट रखी जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन की निगरानी में लगातार ट्रस्ट की ज़मीनों पर अवैध कब्जे और निर्माण हुए हैं तथा ट्रस्ट की आमदनी का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं है।

उन्होंने कहा कि जब तक ट्रस्ट की पांच सदस्यीय समिति नहीं बनती, तब तक जिला प्रशासन से कोई बातचीत नहीं होगी। मौलाना ने आरोप लगाया कि ज़िलाधिकारी ने आर.टी.आई के जवाब में कहा कि यह ट्रस्ट आर.टी.आई के दायरे में नहीं आता क्योंकि यह निजी ट्रस्ट है, ज़िलाधिकारी का यह दावा सरासर झूठा है, क्योंकि यह ट्रस्ट अवध के नवाबों का है और ज़िलाधिकारी उन नवाबों के वंश से नहीं हैं। मौलाना ने कहा कि ट्रस्ट की ज़मीनों के संबंध में अकेले डीएम फैसला लेने के लिए अधिकृत नहीं हैं। उन्होंने किस अधिकार के तहत ट्रस्ट की ज़मीन पर पार्किंग और लज़ीज़ गली बनाने की अनुमति दी है?।मौलाना ने आगे कहा कि ट्रस्ट की ज़मीनों पर जो निर्माण या सड़कें बनी हुई हैं, उन्हें अवध के बादशाहों और नवाबों के नाम से जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी हम यहां विरोध प्रदर्शन के लिए नहीं बल्कि निरीक्षण के लिए आए हैं। यदि ट्रस्ट की ज़मीनों पर निर्माण कार्य नहीं रुका और हमारी मांगें नहीं मानी गईं, तो हम ऐतिहासिक आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन के साथ जो भी बातचीत होगी, वह उलमा, रॉयल फैमिली और अंजुमन हाय मातमी के सदस्यों की मौजूदगी में होगी। उसके बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हुसैनाबाद ट्रस्ट में जिलाधिकारी की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी। इस संबंध में जल्द ही उलमा, रॉयल फैमिली और अंजुमन हाय मातमी के सदस्यों के साथ एक बैठक आयोजित होगी, जिसमें महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे।

इस मौके पर मौलाना सैफ अब्बास नक़वी ने कहा कि सोशल मीडिया पर हुसैनाबाद ट्रस्ट के संबंध में जो पत्र वायरल हो रहा है, वह लोगों को गुमराह करने के लिए है, क्योंकि उस पर न तो कोई हस्ताक्षर हैं और न ही वह किसी आधिकारिक लेटरहेड पर है। मौलाना ने कहा कि हम ट्रस्ट की ज़मीनों पर अवैध कब्जे और गैरकानूनी निर्माण को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन के साथ जो भी बातचीत होगी, वह उलमा और जिम्मेदार लोगों की मौजूदगी में ही होगी उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की संपत्तियों को बहुत नुकसान पहुंचाया गया है, अब उन्हें वापस लेने का समय आ गया है, जिसके लिए उलेमा और कौम को आगे आना होगा। मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि ट्रस्ट की ज़मीन पर पार्किंग और “लज़ीज़ गली” हमें स्वीकार नहीं है। ट्रस्ट की ज़मीनों पर जो भी काम होगा, वह उलमा, रॉयल फैमिली और जिम्मेदार लोगों की सलाह से होना चाहिए। डी۔एम अकेले फैसले लेने के लिए अधिकृत नहीं हैं, इसलिए हमारी मांग है कि पांच सदस्यीय समिति का गठन किया जाए।

मौलाना कल्बे जवाद नक़वी के साथ मौके पर निरीक्षण के लिए पहुंचने वाले उलमा में मौलाना मोहम्मद मियां आबिदी, मौलाना रज़ा हुसैन रिज़वी, मौलाना अख्तर अब्बास जौन, मौलाना रज़ा हैदर ज़ैदी, डॉ. कल्बे सब्तैन नूरी, मौलाना फरीदुल हसन, मौलाना अली नक़ी, मौलाना हैदर अब्बास रिज़वी, मौलाना सिराज हुसैन, मौलाना शबाहत हुसैन, मौलाना क़ुरबान अली, मौलाना क़मरुल हसन, मौलाना शफीक आबिदी, मौलाना नासिर हुसैन, मौलाना नज़र अब्बास ज़ैदी और अन्य उलमा के साथ अंजुमन हाय मातमी के सदस्य मौजूद थे।

मौलाना कल्बे जवाद नक़वी ने घोषणा की कि आगे की कार्ययोजना उलमा और अंजुमन हाय मातमी से सलाह-मशविरा करने के बाद तय की जाएगी।

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