आईसीएआर ने खरीफ 2026 से पहले उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल पर राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता अभियान का नेतृत्व किया

संपोषित कृषि को प्रोत्साहन देने और मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा करने के सरकार के दृष्टिकोण के अनुसार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर) ने उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल पर अपने राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान को तेज किया। अपने कृषि विज्ञान केंद्रों और अनुसंधान संस्थानों के नेटवर्क के माध्यम से आईसीएआर, किसानों, छात्रों और हितधारकों को मिट्टी के परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन, एकीकृत पोषक तत्व पद्धतियों और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों के बारे में प्रेरक तरीके से शिक्षित करने के लिए गहन अभियान चला रहा है। लगभग एक महीने से चल रही इस पहल के अंतर्गत, बीते दो दिन (18-19 मई, 2026) के दौरान देश भर में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।

पंजाबअबोहर स्थित केवीके फाजिल्का ने स्कूली छात्रों के लिए उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल और मिट्टी परीक्षण के महत्व पर “संतुलित उर्वरक अपनाएँ, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बचाएं” के संदेश के साथ एक जागरूकता शिविर आयोजित किया।

 

पश्चिम बंगालउर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल पर चल रहे जागरूकता अभियान के अंतर्गत, केवीके बर्दवान ने 18 मई, 2026 को बुड बुड, गलसी-I में और 19 मई, 2026 को भासापुर, गलसी-II में जागरूकता शिविरों का आयोजन किया, जिसमें उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल और संपोषित पोषक तत्व प्रबंधन प्रथाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।

इसके साथ ही, दक्षिण 24 परगना जिले के निम्पिथ स्थित आरएकेवीके ने 19 मई, 2026 को “विभिन्न फसलों में मिट्टी के परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन” पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इसी तरह, कलिम्पोंग ब्लॉक-II के अंतर्गत सांगसे गांव में कलिम्पोंग केवीके ने उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें पंचायत प्रतिनिधियों और किसानों ने हिस्सा लिया।

इसके साथ ही, दक्षिण दिनाजपुर स्थित डीडीकेवीके ने कुमारगंज के बटून में खरीफ धान के बीज और बीज क्यारी उपचार पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें 31 किसानों और महिला किसानों ने हिस्सा लिया। फसल की उत्पादकता और स्थिरता में सुधार के लिए वैज्ञानिक बीज उपचार पद्धतियों और स्वस्थ नर्सरी प्रबंधन पर जोर दिया गया। 

 

ओडिशा: केवीके बौध ने 19 मई, 2026 को बौध जिले के हरभंगा ब्लॉक में उर्वरक के संतुलित उपयोग पर एक जागरूकता अभियान का आयोजन किया, जिसमें 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

मध्य प्रदेश: जबलपुर के आईसीएआर-खरपतवार अनुसंधान निदेशालय ने 19 मई, 2026 को जबलपुर जिले के पाटन ब्लॉक के रायथरा गांव में उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल पर किसान-वैज्ञानिक संवाद-सह-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें 22 पुरुष और 12 महिला प्रतिभागियों सहित कुल 34 किसानों ने हिस्सा लिया।

इसी दौरान, आईसीएआर-आईआईएसएस, भोपाल ने 18 मई, 2026 को सीहोर के आमला गांव में उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल पर एक अभियान चलाया, जिसमें हरी खाद, जैव उर्वरक, सटीक कृषि और खरीफ 2026 के लिए संपोषित पद्धतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया। ‘मेरा गांव मेरा गौरव’ कार्यक्रम के अंतर्गत, एक टीम ने 19 मई, 2026 को धार जिले के नलछा ब्लॉक के मुंडाना गांव में “सोयाबीन में उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल” विषय पर एक जागरूकता बैठक का आयोजन किया।

राजस्थानआईसीएआर-भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान (आईआईआरएमआर), भरतपुर ने “मेरा गांव-मेरा गौरव” कार्यक्रम के अंतर्गत 19 मई, 2026 को रणधीरपुरा गांव में एक दिवसीय किसान संगोष्ठी का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य किसानों को उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल, मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर करना, हरी खाद और प्राकृतिक एवं जैविक कृषि पद्धतियों के बारे में जागरूक करना था।

तेलंगानाआईसीएआर-कुक्कुट अनुसंधान निदेशालय, हैदराबाद ने 19 मई, 2026 को महबूबनगर जिले के बालानगर मंडल के मम्मुदुगुट्टा गांव में उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल पर गहन अभियान के अंतर्गत एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें 19 किसानों ने हिस्सा लिया।

उत्तर प्रदेशसंतुलित उर्वरक के इस्तेमाल पर आधारित ‘मेरा गांव मेरा गौरव’ कार्यक्रम 19 मई, 2026 को लखनऊ के मोहनलाल गंज ब्लॉक के देवती गांव में आयोजित किया गया।

उत्तराखंडनैनीताल के भीमताल स्थित आईसीएआर-केंद्रीय शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान ने 19 मई, 2026 को नैनीताल के भीमताल ब्लॉक के पांदेछोरे गांव में जैविक उर्वरक के इस्तेमाल पर एक फील्ड डे का आयोजन किया।  

कुल मिलाकर, यह अभियान एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम), जैव उर्वरकों के इस्तेमाल, वर्मीकंपोस्टिंग, गोबर की खाद के वैज्ञानिक अनुप्रयोग (एफवाईएम), पशुधन आधारित पोषक तत्व पुनर्चक्रण और हरित खाद प्रथाओं के माध्यम से संपोषित कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहन देता है, जिससे खरीफ 2026 के दौरान रासायनिक उर्वरकों की खपत को कम किया जा सके। आईसीएआर के इन समन्वित प्रयासों का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, पोषक तत्वों के इस्तेमाल की दक्षता में सुधार करना, इनपुट लागत को कम करना और दीर्घकालिक मृदा स्वास्थ्य की रक्षा करना है।

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