नार्को-टेरर पर J&K पुलिस का सबसे बड़ा प्रहार: 138 करोड़ की 288 संपत्तियां जब्त, 4 हजार गिरफ्तार; सितंबर में 5 विदेशी आतंकी ढेर

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकवाद और नार्को-टेरर सिंडिकेट के खिलाफ सुरक्षा बलों ने निर्णायक प्रहार किया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा जारी ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मादक पदार्थों की तस्करी और उससे होने वाली आतंकी फंडिंग के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए चलाए गए विशेष अभियान के तहत अब तक ₹138 करोड़ से अधिक मूल्य की 288 अवैध संपत्तियां कुर्क (Attach) की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने तस्करों और आतंकियों के मददगारों से 80 लाख रुपये से अधिक की नकद राशि भी जब्त की है। संपत्ति जब्ती और वित्तीय चोट पहुंचाने के मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस पूरे भारत में शीर्ष स्थान पर पहुंच गई है।
सितंबर महीने में 4 बड़े एनकाउंटर, 5 विदेशी आतंकी ढेर और हथियारों का जखीरा बरामद
घाटी से लेकर पीर पंजाल और जम्मू संभाग के घने जंगलों तक चले आतंकवाद विरोधी अभियानों में सितंबर का महीना सुरक्षा बलों के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत सफल रहा। डीजीपी के अनुसार, सितंबर के दौरान आतंकवाद विरोधी चार बड़े संयुक्त ऑपरेशनों में 5 खूंखार आतंकवादी मार गिराए गए।
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बरामद विदेशी हथियार: मुठभेड़ स्थलों से सुरक्षा बलों ने अमेरिकी मूल की घातक M4 कार्बाइन, एके-47 असॉल्ट राइफलें, ऑटोमैटिक साइडआर्म्स, भारी मात्रा में जिंदा गोला-बारूद, हैंड ग्रेनेड और आधुनिक विदेशी कम्युनिकेशन सेट्स बरामद किए।
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उद्देश्य: इन सफल मुठभेड़ों का सीधा उद्देश्य नियंत्रण रेखा (LoC) पार से घुसपैठ करने वाले विदेशी आतंकवादियों का पूरी तरह सफाया करना और उन्हें स्थानीय स्तर पर मिलने वाली लॉजिस्टिक व पनाह की व्यवस्था को नेस्तनाबूद करना था।
नशा तस्करी के 3,257 मामले दर्ज, 4 हजार तस्कर सलाखों के पीछे
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने राज्य की युवा पीढ़ी को नशे के दलदल से बचाने और ड्रग्स के पैसों से चलने वाले आतंकी तंत्र को रोकने के लिए बहुआयामी कार्रवाई की है।
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रिकॉर्ड गिरफ्तारियां: राज्य भर में अब तक एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत 3,257 से अधिक मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 2,500 से अधिक मामलों का त्वरित निस्तारण किया जा चुका है।
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दोषसिद्धि में तेजी: इस सघन अभियान के दौरान करीब 4,000 नशा तस्करों और तस्कर गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है, जबकि मजबूत चार्जशीट और प्रभावी पैरवी के चलते 170 अपराधियों को अदालतों से सजा (Conviction) भी दिलाई जा चुकी है।
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PIT-NDPS का कठोर उपयोग: नार्को-सिंडिकेट के शीर्ष सरगनाओं को बिना जमानत जेल में रखने के लिए निवारक हिरासत कानून (PIT-NDPS Act) के तहत 144 कुख्यात तस्करों को निरुद्ध किया गया है, जो देश भर में सर्वाधिक है।
टेरर हैंडलर्स और OGWs की संपत्तियों पर UAPA के तहत शिकंजा
आतंकवादियों के मददगारों (ओवर-ग्राउंड वर्कर्स यानी OGWs) और पाकिस्तान में बैठकर घाटी में दहशत फैलाने वाले टेरर हैंडलर्स के खिलाफ गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत संपत्तियों की कुर्की की गई है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाना देने, गाड़ियां उपलब्ध कराने या उनके लिए भोजन और हथियार पहुंचाने वाले मकानों व जमीनों को जब्त कर राज्य के नियंत्रण में लिया जा रहा है। श्रीनगर और जम्मू के पुलिस कप्तानों के अनुसार, पूरी सप्लाई चेन की कड़ियों—ड्रग्स के मूल स्रोत, भंडारण केंद्र, वितरण गिरोह और उससे मिलने वाले मुनाफे के अंतिम लाभार्थियों—की पहचान कर उन्हें अदालत के कठघरे में खड़ा किया जा रहा है।
युवाओं को जोड़ने के लिए खेल और सामुदायिक पुलिसिंग पर जोर
डीजीपी ने रेखांकित किया कि आतंकवाद और नशे के नेटवर्क पर सख्त कानून प्रवर्तन के साथ-साथ पुलिस युवाओं को रचनात्मक और मुख्यधारा की गतिविधियों से जोड़ने में जुटी है। डल झील में आयोजित 'रन फॉर यूनिटी' मैराथन और खेल आयोजनों में हजारों बच्चों और युवाओं की भागीदारी यह दर्शाती है कि घाटी की जनता अब हिंसा और विनाश के बजाय शांति, खेल और विकास को गले लगा रही है। पुलिस का यह दोहरा मॉडल—एक तरफ आतंक व नशे पर जीरो टॉलरेंस और दूसरी तरफ स्थानीय आबादी के साथ गहरा जनसंवाद—जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति की मजबूत नींव रख रहा है।



