सभी महाप्रबंधक मार्केटिंग पर विशेष ध्यान दें- धर्मपाल सिंह

उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री श्री धर्मपाल सिंह ने किसानों और पशुपालकों के बकाये दुग्ध मूल्य भुगतान के संबंध में अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए लखनऊ, मेरठ और मुरादाबाद के जीएम को यथाशीघ्र भुगतान कराये जाने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक माह नियमित रूप से भुगतान किया जाए और बकाए भुगतान हेतु जो धनराशि शासन द्वारा दी जा रही है उसका व्यय कहीं और न करके सिर्फ किसानों के दुग्ध मूल्य भुगतान में ही किया जाए। श्री सिंह ने कहा कि किसी भी योजना में लक्ष्य प्राप्ति या विलम्ब होने पर संबंधित का तत्काल वेतन रोक दिया जायेगा। भुगतान जीरो पेमेंट न आने पर अधिकारी पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 25000 ग्राम पंचायतों में एक-एक समिति का गठन किया जाए।
श्री सिंह ने यह निर्देश आज पी0सी0डी0एफ0 सभागार में प्रदेश के सभी दुग्ध संघों के अध्यक्षों और महाप्रबंधकों के साथ बैठक में दिए। उन्होंने दुग्ध समिति के गठन/पुनर्गठन के सापेक्ष संचालित दुग्ध समितियां, दुग्ध उपार्जन तरल दुग्ध बिक्री बकाया एवं दुग्ध मूल्य भुगतान की स्थिति के संबंध में विस्तृत समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा- निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी महाप्रबंधक आवश्यक रूपरेखा तैयार करके मार्केटिंग के कार्यों पर विशेष ध्यान दें एवं दुग्ध संग्रहण का व्यवस्थित रूट बनाए। बिना उचित मार्केटिंग के लाभ नही होगा जिससे पराग के उत्पादों की बिक्री प्रभावित होगी। किसानों का विश्वास आज भी पराग के साथ हैै इसलिए हमें दुग्ध समितियों के गठन, नियमित समय पर भुगतान, किसानों के प्रशिक्षिण कार्यक्रमों को पूरी गंभीरता से पूरा करना होगा।
दुग्ध विकास मंत्री ने कहा कि दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करने के लिए समितियों की संख्या निरंतर बढ़ाकर उन्हें मजबूत किया जाए। निष्क्रिय समितियों को क्रियाशील कर उन्हें संचालित किया जाए। वर्तमान में संचालित समितियां किसी भी कारण से बंद न होने पाए। पराग के दुग्ध उपार्जन एवं तरल दुग्ध विक्रय में वृद्धि की जाए। पशुपालकों एवं किसानों को प्रशिक्षित किया जाए और उन्हें दुग्ध उत्पादन की नई तकनीको व नई जानकारियों से सांझा कराने का कार्य किया जाए ताकि प्रति पशु दुग्ध उत्पादकता में वृद्धि हो सके।
बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान दुग्ध सहकारी समितियों के गठन एवं दुग्ध उत्पादन में निरंतर प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश में अब तक 7,667 कार्यरत समितियां हैं। जिला योजना गठन के निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष 220 समितियों का गठन पूर्ण किया गया है, जबकि नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत 1,750 के लक्ष्य के सापेक्ष 1,819 समितियों का गठन हो चुका है। इस प्रकार दोनों योजनाओं के अंतर्गत कुल 3,748 समितियों के लक्ष्य के सापेक्ष 2,039 समितियों का गठन पूर्ण किया गया है। वहीं, 450 समितियों के पुनर्गठन के लक्ष्य के सापेक्ष 407 समितियों का पुनर्गठन किया जा चुका है। दुग्ध उपार्जन में भी 13 प्रतिशत की वृद्धि के साथ औसत दुग्ध उपार्जन 4.08 लाख किलोग्राम प्रतिदिन तथा औसत तरल दुग्ध विक्रय में 5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2.12 लाख लीटर प्रतिदिन दर्ज किया गया है।
श्री सिंह ने पशुधन विभाग द्वारा लम्पी रोग के बचाव एवं रोकथाम के संबंध में जनपदों में गये नोडल अधिकारियों से वस्तुस्थिति की जानकारी लेते हुए निरंतर समीक्षा किये जाने और सभी आवश्यक व्यवस्थायें सुनिश्चित किये जाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि पशुधन के लिए वैक्सीन एवं दवाओं में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए। किसी भी दशा में नकली या प्रभावहीन दवायें प्रयोग में न लाई जाने पायें।
बैठक में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग, राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा पासवान ने कहा कि किसानों और पशुपालकों का हित राज्य सरकार की प्राथमिकता है। दुग्ध समितियों की संख्या में वृद्धि से दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा, जिससे किसानों एवं पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। उन्होंने पराग के बूथों की संख्या बढ़ाये जाने और महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर भी बल दिया।
बैठक में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मुकेश कुमार मेश्राम ने मंत्री जी को आश्वस्त करते हुए कहा कि किसानांे एवं पशुपालकों को दुग्ध मूल्य का भुगतान में कोई विलम्ब नहीं किया जायेगा। उन्होंने अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर दुग्ध मूल्य भुगतान करने एवं दुग्ध समितियों की संख्या बढ़ाये जाने के संबंध में पूर्ण गंभीरता एवं तत्परता से कार्य किये जाने के निर्देश दिये।
बैठक में दुग्ध विकास विभाग के विशेष सचिव श्री राम सहाय यादव, पीसीडीएफ के प्रबंध निदेशक श्री प्रकाश बिंदु, समस्त दुग्ध संघों के अध्यक्ष, दुग्ध संघांे के इकाई प्रभारी, पशुपालन निदेशालय के निदेशक (रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र) डॉ, संगीता तिवारी, निदेशक प्रशासन एवं विकास, डॉ राजेंद्र प्रसाद सहित पीसीडीएफ एवं शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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