अपनों और ‘बाहरियों’ की जंग में फंसा पेंच, 11 सीटों पर लंबी मैराथन बैठक के बाद भी नहीं सुलझा समीकरण

उत्तर प्रदेश की राजनीति के गलियारों में इस समय विधान परिषद (MLC) के टिकटों को लेकर सुगबुगाहट अपने चरम पर है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर आगामी एमएलसी चुनावों की 11 सीटों को लेकर उम्मीदवारों के नामों पर मंथन का दौर जारी है, लेकिन अंदरखाने चल रही खींचतान ने पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। चर्चा है कि पार्टी के भीतर लगातार इस बात पर बहस छिड़ी हुई है कि टिकट वितरण में वफादार पुराने कार्यकर्ताओं यानी 'अपनों' को तरजीह दी जाए या फिर अन्य दलों से आए दिग्गजों यानी 'बाहरियों' को मैदान में उतारा जाए। इस नफा-नुकसान के गणित के बीच कई दौर की उच्च स्तरीय बैठकों के बाद भी अभी तक सीटों पर फाइनल मुहर नहीं लग पाई है।

पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं की नाराजगी और दिग्गजों की दावेदारी

बीजेपी कार्यालय में हुई मैराथन बैठकों में प्रदेश के तमाम बड़े नेता और रणनीतिकार शामिल हुए, लेकिन समीकरण हर बार आकर वहीं अटक जाते हैं कि सालों-साल से पसीना बहाने वाले निष्ठावान कैडर को दरकिनार न किया जाए। दूसरी ओर, राजनीतिक समीकरण साधने और चुनाव जीतने की गणित के तहत बाहरी नेताओं की मजबूत दावेदारी भी नेतृत्व पर दबाव बना रही है। जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की नाराजगी मोल न लेने की चुनौती और चुनावी वैतरणी पार करने की मजबूरी के बीच पार्टी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है, जिसके चलते नामों की घोषणा में लगातार देरी हो रही है।

जातीय समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन साधने की बड़ी चुनौती

उत्तर प्रदेश जैसी बड़ी राजनीतिक प्रयोगशाला में किसी भी चुनाव के लिए जातीय संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व सबसे अहम कड़ी होते हैं। एमएलसी चुनाव के इन 11 पदों के लिए हर संभाग और हर बड़े वर्ग से दावेदार अपनी ताकत झोंक रहे हैं। पार्टी के रणनीतिकार इस बात पर माथापच्ची कर रहे हैं कि किस सीट पर किस चेहरे को उतारने से आगामी राजनीतिक संदेश सही जाए और विरोधियों को चारों खाने चित किया जा सके। यही वजह है कि सूचियों पर कई बार कैंची चलने के बाद भी अंतिम सहमति नहीं बन पा रही है।

जल्द आ सकती है नामों की सूची, सबकी निगाहें हाईकमान पर

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी आलाकमान इस बार किसी भी तरह की जल्दबाजी के मूड में नहीं है, क्योंकि हर एक सीट का नफा-नुकसान पार्टी की साख से जुड़ा हुआ है। आने वाले कुछ दिनों में तमाम वार्ताओं और केंद्रीय नेतृत्व के दखल के बाद इन सीटों पर प्रत्याशियों के नामों का ऐलान किया जा सकता है। फिलहाल, लखनऊ से लेकर दिल्ली तक चल रही इस सियासी उठापटक पर हर किसी की नजरें टिकी हुई हैं कि आखिर ऊंट किस करवट बैठता है।

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