रोजगार की गारंटी से ग्रामीण समृद्धि-उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर
ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने और गरीब परिवारों को सम्मानजनक आजीविका सुनिश्चित करने का उद्देश्य लेकर शुरू की गई महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) देश की सबसे बड़ी जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक है। इस योजना का मूल उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिन का अकुशल शारीरिक रोजगार उपलब्ध कराना, गरीबी और बेरोजगारी को कम करना तथा गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण कर समग्र विकास को गति देना है। यह न केवल एक रोजगार योजना है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, भूमि विकास, वनरोपण, ग्रामीण कनेक्टिविटी और सामाजिक समावेशन जैसी बहुआयामी विकास प्रक्रियाओं का माध्यम भी बन गई है।
उत्तर प्रदेश, जो भारत का सबसे बड़ा राज्य है और जहां पर अधिकतर आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, इस दृष्टि से मनरेगा का विशेष महत्व है। राज्य की विशाल ग्रामीण आबादी, कृषि पर निर्भरता और मौसमी बेरोजगारी को देखते हुए यह योजना लाखों परिवारों के लिए जीवन रेखा साबित हुई है। वर्ष 2017 से मा0 मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में और मा0 उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य के मार्गदर्शन में योजना के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। प्रशासनिक इच्छाशक्ति, पारदर्शिता, डिजिटल निगरानी और फर्जीवाड़े पर सख्ती ने योजना को नई दिशा दी है।
मनरेगा का ऐतिहासिक संदर्भ और उत्तर प्रदेश में स्थिति
मनरेगा की अवधारणा गरीबी उन्मूलन और ग्रामीण विकास को मजबूत करने की रही है। शुरूआती वर्षों में योजना में कई चुनौतियां थीं, जैसे भुगतान में देरी, फर्जी जॉब कार्ड, कम गुणवत्ता वाले कार्य और प्रशासनिक शिथिलता। 2008-09 से 2016-17 तक के नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में 100 दिन का गारंटीड रोजगार प्राप्त करने वाले परिवारों की संख्या मात्र 18 लाख के आसपास थी। यह आंकड़ा योजना की क्षमता और वास्तविक जरूरत के बीच अंतर को दर्शाता था।
प्रदेश के वर्तमान सरकार के कार्यकाल 2017-18 से 2025-26 तक के पिछले नौ वर्षों में स्थिति में काफी बदलाव आया। इन वर्षों में 34 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को 100 दिन का गारंटीड रोजगार उपलब्ध कराया गया, जो पिछले नौ वर्षों की तुलना में लगभग दोगुनी वृद्धि है। यह वृद्धि बेहतर प्रशासनिक प्रबंधन, समयबद्ध भुगतान और प्रभावी निगरानी का परिणाम है। राज्य सरकार ने योजना को प्राथमिकता दी और इसे ग्रामीण विकास की मुख्य धारा से जोड़ा। विभिन्न रिपोर्टों और सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश कई बार 100 दिन रोजगार उपलब्ध कराने में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल रहा है। मानव दिवस सृजन तथा धनराशि व्यय में उत्तर प्रदेश, देश में प्रथम स्थान पर है। उदाहरण के लिए, 2024-25 में राज्य ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया जो मनरेगा के इतिहास में सर्वाधिक (कोरोना काल को छोड़कर) रहा, जहां 6 लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिला है। 2025-26 में 100 दिन पूर्ण करने वाले परिवारों की संख्या में भागीदारी और परिसंपत्ति निर्माण में निरंतरता बनी रही। कुल मिलाकर, योजना ने बेरोजगारी कम करने और स्थानीय रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
तकनीकी सुधार और पारदर्शिता में प्रदेश सरकार की पहल
प्रदेश सरकार ने मनरेगा के क्रियान्वयन में डिजिटल क्रांति लाई। मजदूरी भुगतान को पूरी तरह डिजिटल और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डी.बी.टी.) से जोड़ा गया, जिससे श्रमिकों को सीधे उनके बैंक खातों में पैसा पहुंचता है। इससे भुगतान में देरी कम हुई और फर्जीवाड़ा लगभग समाप्त हो गया। पहले के वर्षों में भुगतान संबंधी शिकायतें आम थीं, लेकिन अब एनएमएमएस ऐप, जियो-टैगिंग जैसी तकनीकों से कार्यों की गुणवत्ता और उपस्थिति की जांच आसान हो गई है।
फर्जी जॉब कार्ड और बोगस अटेंडेंस पर सख्त कार्रवाई की गई। सिटिजन इंफॉर्मेशन बोर्ड हर कार्य स्थल पर लगाए जाते हैं, ताकि स्थानीय लोग योजना की जानकारी रख सकें। सोशल ऑडिट को मजबूत किया गया और शिकायत निवारण तंत्र को समयबद्ध बनाया गया। इन सुधारों का परिणाम यह हुआ कि योजना का लाभ वास्तविक पात्रों-खासकर गरीब, दलित, आदिवासी और महिलाओं तक पहुंचा। राज्य सरकार की सक्रिय निगरानी ने सुनिश्चित किया गया है कि रोजगार की मांग पर 15 दिनों के अंदर कार्य उपलब्ध हो और संबंधित मजदूर को मजदूरी समय पर मिले।
परिसंपत्ति निर्माण: ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विकास
मनरेगा केवल रोजगार नहीं, बल्कि स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी करती है। उत्तर प्रदेश में इन नौ वर्षों में आंतरिक सड़क निर्माण, तालाबों का पुनर्जीवन, जल संरक्षण संरचनाएं, वृक्षारोपण, आंगनवाड़ी केंद्र, स्वच्छता संबंधी कार्य और भूमि विकास जैसे हजारों उपयोगी प्रोजेक्ट पूरे किए गए। अमृत सरोवर योजना से जल संरक्षण कार्यों में विशेष जोर दिया गया, जिससे सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ी और कृषि उत्पादकता में सुधार हुआ।
मनरेगा के तहत इन 09 वर्षों में गाँवों के चकरोडों, आम आवागमन के रास्तों को खड़ंजा आदि निर्माण कराया गया इससे ग्रामीण कनेक्टिविटी के नए रास्ते बने और गांवों की बाजारों से जुड़ाव मजबूत हुआ। तालाबों की खुदाई और पुराने जल स्रोतों का जीर्णाेद्धार करने से जलसंचयन, वाटर रिचार्ज सिंचाई सुविधा बढ़ी और मछली पालन जैसे सहायक व्यवसायों को बढ़ावा मिला। वृक्षारोपण से पर्यावरण संरक्षण हुआ और गांवों में हरियाली बढ़ी। इन परिसंपत्तियों ने न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया, बल्कि दीर्घकालिक विकास की नींव भी रखी। मनरेगा के तहत बनी परिसंपत्तियां भूमि मूल्य बढ़ाने, फसल पैटर्न बदलने और जल स्तर सुधारने में सहायक साबित हुई हैं, जिससे ग्रामीण स्तर पर खुशहाली आई है।
महिलाओं का सशक्तिकरण: आत्मनिर्भरता की नई कहानी
मनरेगा के अंतर्गत ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं। राज्य में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है। कई वर्षों से यह 40 प्रतिशत से अधिक रही। 2024-25 में महिलाओं की भागीदारी 42 प्रतिशत तक पहुंच गई। महिलाएं न केवल मजदूरी से रुपया कमाती हैं, बल्कि परिवार की आय बढ़ाने और निर्णय लेने में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
पलायन नियंत्रण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
मनरेगा ने मौसमी बेरोजगारी को कम कर ग्रामीण युवाओं और मजदूरों के शहरों की ओर पलायन को रोका है। पहले कृषि ऑफ-सीजन में मजदूर शहरों में काम की तलाश में चले जाते थे, लेकिन अब गांव में ही 100 दिन का काम मिलने से शहरों की ओर का पलायन रूका है। इससे गांवों में स्थानीय अर्थव्यवस्था सक्रिय हुई दुकानें, परिवहन और छोटे व्यवसाय बढ़े हैं।
प्रदेश में इस, योजना से जुड़े परिवारों की आय में वृद्धि हुई, बचत बढ़ी और बच्चों की शिक्षा-स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ा। जल संरक्षण और भूमि विकास से कृषि आय भी प्रभावित हुई। कुल मिलाकर, मनरेगा ने ग्रामीण गरीबी घटाने और समावेशी विकास में योगदान दिया।
भविष्य की दिशा: विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम
मनरेगा की सफलता को आगे ले जाते हुए केंद्र सरकार ने 2025 में विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी टठ.ळ त्।ड ळ अधिनियम लाया, जिसे ‘‘विकसित भारत-जी राम जी’’ के रूप में भी जाना जाता है। इस नए अधिनियम में रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। साथ ही, बेरोजगारी भत्ता के प्रावधान मजबूत किए गए हैं, मजदूरी भुगतान साप्ताहिक या अधिकतम 15 दिनों में सुनिश्चित करने और देरी पर मुआवजा का प्रावधान जोड़ा गया है।
नए अधिनियम में प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, कृषि से जुड़े कार्य, आपदा प्रबंधन और फ्लड कंट्रोल जैसे क्षेत्रों पर फोकस किया गया है। प्रदेश सरकार इस अधिनियम को पूरे जोर से लागू करने की तैयारी में है, ताकि ग्रामीण श्रमिकों का जीवन स्तर और बेहतर हो सके। यह कदम विकसित भारत/2047 की परिकल्पना से जुड़ा है, जहां ग्रामीण क्षेत्र आत्मनिर्भर और समृद्ध बनेंगे।
मनरेगा आज केवल रोजगार योजना नहीं रही, बल्कि ग्रामीण उत्तर प्रदेश के सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुकी है। “हर हाथ को काम, हर परिवार को सम्मान” के संकल्प को साकार करते हुए यह योजना बेरोजगारी कम कर रही है, महिलाओं को सशक्त बना रही है, सामाजिक न्याय सुनिश्चित कर रही है और स्थायी विकास की नींव रख रही है। योगी सरकार के प्रयासों से योजना में पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ी है, जो लाखों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है।
टठ.ळ त्।ड ळ अधिनियम के साथ यह यात्रा नई ऊंचाइयों को छूने वाली है। जब ग्रामीण भारत समृद्ध होगा, तभी विकसित भारत का सपना साकार होगा। उत्तर प्रदेश इस बदलाव का अग्रदूत बनकर “आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रहा है। लाखों ग्रामीण परिवारों की कहानियां-जिनमें एक महिला मजदूर की आत्मनिर्भरता, एक किसान का बेहतर फसल या एक गांव का जुड़ाव-इस योजना की सच्ची सफलता हैं।




