UP Politics : देखता हूं मेरा जहाज उतरने देते हैं या नहीं, जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन के बीच अखिलेश यादव का सरकार को खुला चैलेंज
उत्तर प्रदेश की सियासत में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन को लेकर घमासान छिड़ गया है। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मार्च को इस भव्य प्रोजेक्ट का लोकार्पण करने जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। अखिलेश यादव ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वह 29 मार्च को जेवर एयरपोर्ट पर अपना विमान उतारने की अनुमति मांगेंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “देखता हूं परसों मेरा जहाज वहां उतरने देते हैं कि नहीं, क्योंकि बीजेपी सरकार ने पहले भी कई बार मेरा प्लेन रोका है।”अखिलेश ने याद दिलाया पुराना इतिहास, लगाया भेदभाव का आरोपअखिलेश यादव ने चर्चा के दौरान उन घटनाओं का जिक्र किया जब उन्हें अलग-अलग मौकों पर हवाई सफर करने से रोका गया या उनके विमान को लैंडिंग की अनुमति नहीं दी गई। सपा प्रमुख ने कहा कि उनके साथ अक्सर राजनीतिक द्वेष के चलते ऐसा व्यवहार किया जाता रहा है। उन्होंने प्रयागराज और कुशीनगर की पुरानी घटनाओं को याद दिलाते हुए कहा कि प्रशासन अक्सर ‘सुरक्षा’ या ‘ट्रैफिक’ का बहाना बनाकर विपक्ष के नेताओं की उड़ानों में रोड़ा अटकाता है। अब जेवर एयरपोर्ट को लेकर उन्होंने सरकार के सामने एक तरह से ‘लिटमस टेस्ट’ रख दिया है।’मायावती का प्रोजेक्ट था जेवर एयरपोर्ट’क्रेडिट वार में कूदते हुए अखिलेश यादव ने यह भी साफ किया कि जेवर एयरपोर्ट का विचार नया नहीं है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मायावती इस प्रोजेक्ट को बनाना चाहती थीं, लेकिन उस समय की बाधाओं के कारण यह रुक गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी केवल दूसरों के किए गए कामों का फीता काटने में माहिर है। अखिलेश के मुताबिक, 29 मार्च को वह खुद वहां उतरकर हकीकत देखेंगे कि आखिर एयरपोर्ट कितना तैयार है और क्या वहां आम नागरिकों या विपक्षी नेताओं के लिए जगह है।मिशन 2027 का शंखनाद करेंगे अखिलेश?बता दें कि 29 मार्च को नोएडा के दादरी में अखिलेश यादव की एक बड़ी रैली प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि जेवर एयरपोर्ट पर लैंडिंग की मांग के जरिए वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपना शक्ति प्रदर्शन करना चाहते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उद्घाटन के ठीक अगले दिन अखिलेश की यह चुनौती बीजेपी के ‘विकास मॉडल’ पर सवाल उठाने की एक सोची-समझी रणनीति है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन उन्हें जेवर के नए रनवे पर उतरने की हरी झंडी देता है या एक बार फिर सियासी ड्रामा देखने को मिलेगा।




