इस एक्सप्रेसवे के लिए जमीनों का होगा अधिग्रहण, 19 गांवों के किसानों को मिलेगा मुआवजा
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में प्रस्तावित गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। यह एक्सप्रेसवे गोरखपुर की सदर तहसील के 19 गांवों से होकर गुजरेगा, जिसके लिए कुल 197 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण (land acquistion) किया जाना है। इसी प्रक्रिया के तहत प्रशासन ने 1642 गाटा संख्या वाली जमीनों की खरीद-बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
मुआवजे की प्रक्रिया हुई शुरू-
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से अधिग्रहित की जाने वाली जमीनों की सूची जारी कर दी गई है। पहले सिर्फ गाटा नंबर सार्वजनिक किए गए थे, लेकिन अब अराजी नंबरों की विस्तृत सूची भी जारी कर दी गई है। इसके साथ ही प्रभावित भूमि मालिकों से 21 दिनों के भीतर आपत्तियां मांगी गई हैं। तय अवधि में मिली आपत्तियों पर सुनवाई के बाद मुआवजा (compensation) प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
जमीन की खरीद-बिक्री की अनुमति-
भू-राजस्व अधिकारी (land revenue officer) की ओर से यह सूची निबंधन कार्यालय को भेज दी गई है। अब कोई भी व्यक्ति जमीन की खरीद-बिक्री से पहले इस सूची का अवलोकन कर सकता है। प्रशासन ने साफ किया है कि केवल उन्हीं गाटा नंबरों पर रजिस्ट्री की रोक रहेगी, जो अधिग्रहण के दायरे में आते हैं। बाकी जमीनों की खरीद-बिक्री की अनुमति (Permission to buy and sell land) होगी, जिससे स्थानीय लोगों को राहत मिली है।
46 गांवों में पहले से लागू रजिस्ट्री प्रतिबंध हटाया गया-
इसके अलावा सदर तहसील और कैंपियरगंज क्षेत्र (Campierganj area) के कुल 46 गांवों में पहले से लागू रजिस्ट्री प्रतिबंध को हटा दिया गया है। अब केवल एक्सप्रेसवे से प्रभावित गाटा नंबरों पर ही रोक लागू रहेगी। इस फैसले से ग्रामीणों में संतोष का माहौल है, क्योंकि अब उनकी अन्य जमीनों की खरीद-बिक्री सामान्य रूप से की जा सकेगी।
जानिए कौन-कौन से गांव होंगे प्रभावित-
बताया जा रहा है कि प्रभावित गांवों में बढ़नी, सियारामपुर, महराजगंज, मंगलपुर, ठाकुरपुर-1, जंगल डुमरी नंबर-1, खुटहन खास, फुलवरिया तप्पा खुटहन, जंगल नकीन, मेहदिया, रामपुर बुजुर्ग, इस्लामपुर, जमुनिया, बिस्वा, खिरिया, कोटवा, समस्तपुर उर्फ मुरिला, सोनराइच और पोखरभिंडा शामिल हैं।
समय पर मिलेगा किसानों को मुआवजा-
प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि पूरी प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न की जाएगी, ताकि प्रभावित किसानों को समय पर उचित मुआवजा मिल सके और परियोजना के क्रियान्वयन में किसी तरह की बाधा न आए।




