Economic Survey: 7% रहेगी GDP-कम वित्तीय घाटा, आर्थिक सर्वे में ऐसी दिखी अर्थव्यवस्था की तस्वीर

मोदी सरकार 2.0 का पहला बजट शुक्रवार को पेश होना है. बजट से पहले गुरुवार को सरकार ने संसद में आर्थिक सर्वे पेश किया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने चुनौतियां हैं कि वह आम आदमी की उम्मीदों पर खरा उतर सकें. राज्यसभा और लोकसभा में आर्थिक सर्वे पेश कर दिया गया है. सर्वे के अनुसार, 2019-20 में देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 7 फीसदी तक रह सकती है. इससे आगामी वित्त वर्ष के लिए नीतिगत फैसलों के संकेत भी मिले हैं.

आर्थ‍िक सर्वे में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2018-19 में वित्तीय घाटे में कमी आई है और यह जीडीपी के सिर्फ 3.4 फीसदी रहा, जबक लक्ष्य 3.3 फीसदी तक लाने का था. आर्थिक सर्वे के अनुसार अगर भारत को 2025 तक 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाना है तो लगातार जीडीपी में 8 फीसदी की ग्रोथ रफ्तार हासिल करनी होगी.

चुनाव की वजह से आई ग्रोथ में कमी

आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीति उपायों से लोन के ब्याज दरों में कटौती करने में मदद मिलेगी. इसी तरह निवेश दर में जो कमी आ रही थी, वह भी अब लगता है कि रुक जाएगी. जनवरी से मार्च तिमाही में जीडीपी ग्रोथ में गिरावट पर आर्थ‍िक सर्वे में कहा गया है कि यह चुनाव संबंधी अनिश्चितता की वजह से था.

इसके अलावा पिछले वित्त वर्ष में कम ग्रोथ होने की एक वजह एनबीएफसी संकट भी है. गौरतलब है कि मार्च तिमाही में जीडीपी में बढ़त महज 5.8 फीसदी थी.

सर्वे में जताई गई खेती पर चिंता

खेती के मामले में एक चिंताजनक बिंदु उठाते हुए इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि खाद् वस्तुओं के दाम कम होने की वजह से शायद किसानों ने वित्त वर्ष 2018-19 में पैदावार कम किया है. हालांकि, यह भी कहा गया है कि साल 2018 की दूसरी छमाही से ही ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में बढ़त आनी शुरू हो गई है.

पांच साल में तेज विकास

सर्वे के अनुसार पिछले पांच साल में जीडीपी ग्रोथ औसतन 7.5 फीसदी रहा है. आर्थ‍िक सर्वे में कहा गया है कि बैंकों के गैर निष्पादित परिसंपत्त‍ि (NPA) में कमी आने की वजह से पूंजीगत व्यय चक्र को बढ़ाने में मदद मिलेगी. लगातार एनपीए में कमी आ रही है, जिसका फायदा अर्थव्यवस्था को मिलेगा. सर्वे में कहा गया कि स्थ‍िर वृहद आर्थिक दशाओं की वजह से इस साल अर्थव्यवस्था में स्थिरता रहेगी. हालांकि यह भी कहा गया है कि अगर ग्रोथ में कमी आई तो राजस्व संग्रह पर चोट पड़ सकती है.

हालांकि, सर्वे कुछ चुनौतियां भी सामने रखता है. जैसे कि वित्तीय घाटे के मोर्चे पर 2019-20 में कुछ चुनौतियां हो सकती हैं. जिस तरह का प्रचंड बहुमत सरकार को देश की जनता ने दिया है, उसकी वजह से अर्थव्यवस्था को बढ़ाने की कई चुनौतियां हैं.

तेल की कीमतों में आएगी कमी

आर्थ‍िक सर्वे में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में कमी आ रही है, जिसकी वजह से इस वित्त वर्ष में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी आ सकती है. न्यूज़ सोर्स Zee News

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