हैदराबाद में राहुल गांधी पर बरसे अमित शाह: बोले- ‘वोटर लिस्ट में 3 करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठिए नहीं रहेंगे’

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' महा-मार्च में शामिल होकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। सड़कों पर उमड़े हजारों कार्यकर्ताओं और नागरिकों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि विपक्षी दल चुनावी फायदे के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने नई दिल्ली में कांग्रेस द्वारा हाल ही में आयोजित की गई 'वोट बचाओ' रैली पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वह वास्तव में लोकतंत्र या वोट बचाने का प्रयास नहीं था, बल्कि फर्जी वोटों के सहारे राजनीति चमकाने और अवैध घुसपैठियों को सुरक्षा कवच देने की कोशिश थी। शाह ने साफ किया कि कांग्रेस पार्टी चाहे जितना विरोध कर ले, केंद्र सरकार देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और घुसपैठियों से मुक्त बनाने के अपने संकल्प से पीछे नहीं हटेगी।

अमित शाह ने जनसभा में उपस्थित जनसमूह के सामने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया में रोड़े अटका कर मतदाता सूची में दर्ज बांग्लादेशी घुसपैठियों के अवैध नामों को बचाने की पुरजोर वकालत कर रही है। गृह मंत्री ने खुली चुनौती देते हुए कहा कि विपक्ष को जितना जोर लगाना है लगा ले, लेकिन भाजपा सरकार मतदाता सूची का शुद्धिकरण करके रहेगी। देश की सीमाओं के भीतर अवैध रूप से रह रहे और फर्जी दस्तावेजों के जरिए वोटर लिस्ट में सेंध लगाने वाले एक-एक घुसपैठिए की पहचान की जाएगी और उनका नाम मतदाता सूची से हटाकर उन्हें देश से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। उन्होंने कहा कि वास्तविक भारतीय नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर किसी भी विदेशी घुसपैठिए को डाका डालने की इजाजत कभी नहीं दी जा सकती।

13 करोड़ वोटर हटाए जाने के दावों की खोली पोल, 3 करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठियों पर कही यह बात

विपक्ष द्वारा लगातार लगाए जा रहे उन आरोपों पर गृह मंत्री ने विस्तार से डेटा के साथ जवाब दिया, जिसमें दावा किया जा रहा था कि मतदाता सूची संशोधन के दौरान 13 करोड़ वैध मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। अमित शाह ने इस गणित की जमीनी हकीकत सामने रखते हुए कहा कि 13 करोड़ के भ्रामक आंकड़े की सच्चाई बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने बताया कि इस आंकड़े में से लगभग सवा छह करोड़ (6.25 करोड़) मतदाता ऐसे थे जो अपना पुराना निवास स्थान बदलकर नए पते पर स्थानांतरित हो चुके थे और उनका पंजीकरण नए पते पर किया गया है। इसके अलावा लगभग 3 करोड़ नाम ऐसे थे जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जबकि लगभग 1 करोड़ प्रविष्टियां डुप्लीकेट यानी एक ही व्यक्ति के दोहरे नाम के रूप में दर्ज थीं, जिन्हें कानून के तहत हटाया गया।

बाकी बचे 3 करोड़ नामों पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए अमित शाह ने कहा कि ये तीन करोड़ कोई वैध नागरिक नहीं हैं, बल्कि यह बांग्लादेशी घुसपैठियों का वह अवैध नेटवर्क है जिसे वर्षों तक वोट बैंक की खातिर पाला-पोसा गया। गृह मंत्री ने जनता से सीधा सवाल पूछते हुए कहा कि जिन 3 करोड़ लोगों की मृत्यु हो चुकी है, क्या मतदाता सूची से उनका नाम नहीं हटाया जाना चाहिए? जो लोग इस दुनिया में हैं ही नहीं, उनका वोट आकर कौन डालेगा? शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी इन मृत व्यक्तियों और अवैध घुसपैठियों के फर्जी नामों के सहारे बोगस वोटिंग कराकर चुनाव जीतना चाहती है, लेकिन अब डिजिटल वेरिफिकेशन और एसआईआर प्रक्रिया के लागू होने से फर्जीवाड़े का यह खेल हमेशा के लिए बंद होने जा रहा है।

कांग्रेस की मॉक पार्लियामेंट पर कसा तीखा तंज, सोनिया गांधी के अरमानों का किया जिक्र

अपने भाषण के दौरान अमित शाह ने कांग्रेस द्वारा संसद के विरोध में हाल ही में आयोजित की गई 'मॉक पार्लियामेंट' (प्रतीकात्मक संसद) को लेकर राहुल गांधी पर चुटीला तंज कसा। शाह ने कहा कि राहुल गांधी ने दो दिन पहले एक नकली संसद लगाकर तमाशा खड़ा किया था। अगर राहुल गांधी ने उस आयोजन से पहले मुझसे कोई सलाह ली होती, तो मैं उन्हें एक ही नेक मशविरा देता कि उस नकली संसद में बिना विपक्ष का नेता बने कम से कम एक दिन के लिए स्वयं ही प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठ जाते।

गृह मंत्री ने आगे कहा कि असली संसद में तो जनता के समर्थन के अभाव में राहुल गांधी कभी देश के प्रधानमंत्री बन नहीं पाएंगे, ऐसे में कम से कम उस मॉक पार्लियामेंट में ही खुद को प्रधानमंत्री घोषित कर लेते ताकि उनकी माता सोनिया गांधी के मन को कुछ शांति और तसल्ली मिल जाती। शाह ने कहा कि जो नेता संसद की वास्तविक मर्यादा और जनता के जनादेश का सम्मान नहीं कर सकते, वे अब जनता का ध्यान भटकाने के लिए केवल प्रतीकात्मक नाटकों और खोखली बयानबाजी का सहारा ले रहे हैं, जिससे उनकी राजनीतिक अपरिपक्वता ही उजागर होती है।

विदेश दौरों पर खड़े किए सवाल: देश में रहकर पसीना बहाने से ही मिलता है जनता का भरोसा

अमित शाह ने 2024 के आम चुनावों के बाद भाजपा की लगातार चुनावी सफलताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता ने कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति को हर राज्य में नकारा है। उन्होंने गिनाया कि 2024 के बाद भाजपा ने महाराष्ट्र, हरियाणा, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम जैसे महत्वपूर्ण राज्यों के चुनावों में ऐतिहासिक विजय दर्ज की है और अब तेलंगाना की जनता भी राज्य में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का मन बना चुकी है। उन्होंने कहा कि भाजपा की यह जीत कार्यकर्ताओं की दिन-रात की मेहनत और प्रधानमंत्री के विकास कार्यों के प्रति जनता के अटूट विश्वास का प्रमाण है।

विपक्ष के नेता को सीधी नसीहत देते हुए शाह ने कहा कि चुनाव जीतने के लिए जमीन पर उतरकर तपस्या करनी पड़ती है। राहुल गांधी साल के तीन-चार महीने देश में गुजारते हैं और बाकी समय छुट्टियां मनाने विदेश चले जाते हैं। इस तरह मौसमी राजनीति और पार्ट-टाइम लीडरशिप से जनता का दिल नहीं जीता जा सकता। शाह ने कहा कि अगर राजनीति करनी है तो राहुल जी को देश के भीतर रहकर चिलचिलाती धूप में पसीना बहाना होगा, आम जनता के सुख-दुख में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना होगा और उनकी जमीनी समस्याओं को सुलझाने के लिए निरंतर संघर्ष करना होगा। केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस करने और सोशल मीडिया पर भ्रामक आंकड़े फैलाने से देश की जनता का विश्वास कभी हासिल नहीं किया जा सकता।

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