हर मकान-दुकान का बनेगा फायर सेफ्टी रिपोर्ट कार्ड, 10 में से मिलेगी सुरक्षा रेटिंग, एलडीए करने जा रहा ये काम

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पिछले कुछ समय में हुए भीषण अग्निकांडों और हादसों से कड़ा सबक लेते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) एक बेहद अनोखी और क्रांतिकारी जन-सुरक्षा पहल की शुरुआत करने जा रहा है। पूरे प्रदेश में होटलों, अस्पतालों और कोचिंग सेंटरों के खिलाफ चल रहे फायर चेकिंग अभियान के बीच, एलडीए ने अब अपनी सभी आवासीय कॉलोनियों और व्यावसायिक क्षेत्रों में स्थित प्रत्येक मकान, दुकान, शोरूम और कॉम्प्लेक्स का अनिवार्य फायर सेफ्टी सर्वे कराने का फैसला किया है। इस वृहद अभियान के तहत हर एक इमारत की बारीकी से जांच की जाएगी और उसे 10 अंकों के पैमाने पर एक 'सुरक्षा रेटिंग' (Safety Rating) दी जाएगी, जिससे यह साफ हो सकेगा कि वह भवन आग के खतरों से निपटने के लिए कितना तैयार है।

एलडीए इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पहले चरण में अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी आवासीय और व्यावसायिक टाउनशिप में इस सर्वे को लागू करेगा। इस काम को पूरी सटीकता से अंजाम देने के लिए एक उच्च स्तरीय 'फायर विशेषज्ञ एजेंसी' का चयन किया जा रहा है, जिसकी टीमें घर-घर जाकर मुफ्त में फायर ऑडिट करेंगी। इस पूरे सर्वे का सारा खर्च लखनऊ विकास प्राधिकरण खुद उठाएगा, जिसके लिए लगभग दो करोड़ रुपये का विशेष बजट आवंटित किए जाने का अनुमान है।

घर के बाहर चस्पा होगा सुरक्षा स्कोर: 5 से कम अंक वाले भवन माने जाएंगे 'खतरनाक'

इस व्यापक सर्वे के पूरा होने के बाद विशेषज्ञ एजेंसी प्रत्येक इमारत के लिए एक विस्तृत डिजिटल और फिजिकल फायर सेफ्टी चार्ट तैयार करेगी। यह रिपोर्ट सीधे भवन मालिक को सौंपी जाएगी, और इसके साथ ही इमारत के मुख्य प्रवेश द्वार या बाहरी दीवार पर एक विशेष क्यूआर-कोडेड 'सुरक्षा रेटिंग स्टिकर' लगाया जाएगा।

इस रेटिंग प्रणाली के तहत, जो इमारतें 9 या उससे अधिक अंक हासिल करेंगी, उन्हें 'अत्यंत सुरक्षित' (Highly Safe) श्रेणी में वर्गीकृत किया जाएगा। इसके विपरीत, जिन मकानों या दुकानों को 5 से कम अंक मिलेंगे, उन्हें अग्नि सुरक्षा के लिहाज से 'अत्यंत संवेदनशील और जोखिमपूर्ण' घोषित कर दिया जाएगा। इस स्टिकर के लगने से न केवल संपत्ति के मालिक को अपनी कमियों का पता चलेगा, बल्कि वहां आने वाले ग्राहकों और आस-पड़ोस के लोगों को भी उस इमारत की वास्तविक सुरक्षा स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।

सिर्फ कमियां नहीं, सुधार का नक्शा भी देगी विशेषज्ञ टीम: एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार का बयान

लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष (VC) प्रथमेश कुमार ने इस परियोजना की रूपरेखा साझा करते हुए स्पष्ट किया कि यह सर्वे केवल अंक देने या इमारतों को चिह्नित करने तक सीमित नहीं रहेगा। विशेषज्ञ एजेंसी अपनी अंतिम रिपोर्ट में यह भी विस्तार से बताएगी कि किसी भवन को कम अंक क्यों मिले हैं और किन तकनीकी कमियों के कारण वहां शॉर्ट सर्किट या आग फैलने का खतरा सबसे ज्यादा है।

रिपोर्ट के साथ ही एक कस्टमाइज्ड 'सुधार गाइड' भी दी जाएगी, ताकि लोग कम खर्च में जरूरी बदलाव करके अपनी इमारतों को सुरक्षित बना सकें। विशेषज्ञ दल मुख्य रूप से भवनों की आंतरिक बिजली व्यवस्था, कंसील्ड वायरिंग, ज्वलनशील पदार्थों के रखरखाव और आपातकालीन निकास मार्गों की समीक्षा करेंगे। यदि किसी रिहायशी या व्यावसायिक परिसर में जान-माल का कोई गंभीर या तत्काल खतरा नजर आता है, तो उसे तुरंत दूर करने के लिए मौके पर ही व्यावहारिक सलाह दी जाएगी।

इन 15 कड़े बिंदुओं पर परखी जाएगी आपके घर और दुकान की मजबूती

एलडीए द्वारा नियुक्त की जाने वाली ऑडिट टीम मुख्य रूप से निम्नलिखित तकनीकी और संरचनात्मक बिंदुओं के आधार पर भवनों का मूल्यांकन कर अंक तय करेगी:

  • आंतरिक बिजली वायरिंग की गुणवत्ता और उसकी लोड क्षमता।

  • मुख्य केबल और बिजली के मीटर कनेक्शन की वास्तविक स्थिति।

  • मीटर बॉक्स, एमसीबी (MCB) और मुख्य विद्युत पैनलों की सुरक्षा व्यवस्था।

  • भवन के भीतर शॉर्ट सर्किट होने की तात्कालिक संभावनाएं।

  • परिसर या गोदाम में जमा करके रखी गई ज्वलनशील सामग्रियों की मात्रा।

  • रसोई घर की सुरक्षा और एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर का सही रख-रखाव।

  • फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशमन यंत्र) की उपलब्धता और उनकी एक्सपायरी डेट।

  • आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के लिए सुरक्षित निकास द्वारों की चौड़ाई।

  • मुख्य सीढ़ियों और गलियारों में अवैध कब्जे या रुकावट की स्थिति।

  • आग लगने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का रेस्क्यू प्लान।

  • धुआं निकलने के लिए वेंटिलेशन और भवन में सफोकेशन की संभावनाएं।

  • आग को तेजी से फैलने से रोकने वाले रिफ्रेक्ट्री मटेरियल का उपयोग।

  • व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सरकारी नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC) के मानकों का पालन।

  • हाई-लोड इलेक्ट्रॉनिक और एयर कंडीशनिंग (AC) उपकरणों की अर्थिंग और सुरक्षा।

  • हादसे के वक्त गली या परिसर के अंदर तक दमकल (अग्निशमन वाहन) पहुंचने की सुगमता।

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