सेमीकॉन इंडिया 2026 में अश्विनी वैष्णव का बड़ा ऐलान: Semicon 2.0 में मिले ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव, पैदा होंगी 1 लाख नौकरियां

भारत को दुनिया का प्रमुख सेमीकंडक्टर पावरहाउस बनाने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0' (Semicon 2.0 / ISM 2.0) को वैश्विक उद्योग जगत से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। नई दिल्ली के 'यशोभूमि' कन्वेंशन सेंटर में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'सेमीकॉन इंडिया 2026' के दौरान केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि सरकार को सेमीकॉन 2.0 के तहत 11 से 12 अरब डॉलर (लगभग ₹1 लाख करोड़ से अधिक) के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण अब केवल फैब (Fab) और असेंबली-टेस्टिंग (OSAT) इकाइयों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी सप्लाई चेन के स्वदेशीकरण की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इस नए निवेश चक्र से देश में 1 लाख से अधिक उच्च-कुशल और तकनीकी रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
केवल चिप निर्माण नहीं, पूरी सप्लाई चेन में निवेश: किन क्षेत्रों पर है कंपनियों का फोकस?
केंद्रीय आईटी मंत्री ने स्पष्ट किया कि सेमीकॉन 2.0 के तहत मिले ₹1 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव चिप निर्माण से जुड़े संपूर्ण सहायक तंत्र (Component Ecosystem) को मजबूत करने के लिए आए हैं:
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सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट (मशीनें व टूल्स): चिप्स बनाने के लिए आवश्यक जटिल और सटीक विनिर्माण उपकरण तैयार करने वाली वैश्विक कंपनियां भारत में अपनी विनिर्माण और इंजीनियरिंग इकाइयां लगाने के प्रस्ताव दे चुकी हैं।
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विशेष गैसें एवं रसायन (Gases & Ultra-Pure Chemicals): सिलिकॉन वेफर प्रोसेसिंग में प्रयुक्त होने वाली अत्यधिक शुद्ध गैसों और केमिकल सॉल्वेंट्स का उत्पादन अब भारत में ही होगा।
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सब्सट्रेट्स और उन्नत सामग्री (Substrates & Consumables): पैकेजिंग और वेफर माउंटिंग में लगने वाले हाई-ग्रेड सबस्ट्रेट्स के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भारी पूंजीगत प्रतिबद्धता जताई है।
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एडवांस्ड पैकेजिंग और चिप डिजाइन: 3D चिप स्टैकिंग और ऑटोमोटिव व 5G/6G टेलीकॉम से जुड़े चिप्स के लिए घरेलू स्तर पर बड़े पैकेजिंग प्लांट्स प्रस्तावित हैं।
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कई वैश्विक कंपनियों ने गैर-प्रकटीकरण समझौतों (NDA) और वाणिज्यिक प्रतिस्पर्धा के चलते अभी अपने नाम सार्वजनिक न करने का आग्रह किया है, लेकिन परियोजनाओं की रूपरेखा और मूल्यांकन का कार्य तकनीकी समिति द्वारा अंतिम चरण में है।
1 लाख नौकरियां और मजबूत स्किलिंग ढांचा: देश के युवाओं को मिलेगा अवसर
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि 12 अरब डॉलर के इन नए निवेश प्रस्तावों का सबसे बड़ा सामाजिक और आर्थिक प्रभाव रोजगार सृजन के रूप में सामने आएगा। सेमीकंडक्टर फैब और कंपोनेंट यूनिट्स के स्थापित होने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 1 लाख से अधिक उच्च वेतन वाली नौकरियां पैदा होंगी।
इन नौकरियों के लिए भारतीय युवाओं को तैयार करने के उद्देश्य से सरकार पहले ही देश के 100 से अधिक शीर्ष विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और आईआईटी संस्थानों में विश्वस्तरीय ईडीए टूल्स (EDA Tools) और सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन पाठ्यक्रम शुरू करा चुकी है। इसके साथ ही सरकार के 1 करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित करने के मिशन से इस उद्योग को तैयार वर्कफोर्स उपलब्ध कराई जाएगी।
सेमीकॉन 1.0 से 2.0 तक का सफर: साणंद से धोलेरा तक निर्माण की तेज रफ्तार
वैष्णव ने रेखांकित किया कि सेमीकॉन 1.0 (प्रथम चरण) के तहत स्वीकृत परियोजनाएं कागजों से निकलकर अब जमीनी हकीकत बन चुकी हैं:
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टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का धोलेरा फैब: गुजरात के धोलेरा में भारत का पहला कमर्शियल फैब निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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माइक्रोन और टाटा असम यूनिट: गुजरात के साणंद में माइक्रोन की ओएसएटी यूनिट और असम के मोरीगांव में टाटा का उन्नत पैकेजिंग प्लांट पूर्णता की ओर अग्रसर हैं।
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एचसीएल-फॉक्सकॉन और सीजी पावर: जेवर (उत्तर प्रदेश) और साणंद में स्वीकृत डिस्प्ले ड्राइवर्स और पावर सेमीकंडक्टर प्लांट्स पर जमीनी कार्य जारी है।
उन्होंने कहा कि सेमीकॉन 1.0 ने वैश्विक कंपनियों के मन से यह हिचक खत्म कर दी कि भारत में जटिल चिप निर्माण संभव है या नहीं। अब सेमीकॉन 2.0 के तहत मिले ₹1 लाख करोड़ के ताजा प्रस्ताव यह साबित करते हैं कि भारत दुनिया के लिए सबसे भरोसेमंद और टिकाऊ सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग डेस्टिनेशन बन चुका है।



