पीएम मोदी की टेबल पर पहुंचा यूपी का विजन डॉक्यूमेंट, $6 ट्रिलियन इकोनॉमी और ₹25 लाख प्रति व्यक्ति आय का महाप्लान तैयार

उत्तर प्रदेश को देश की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने अपने महत्वाकांक्षी दस्तावेज 'विकसित उत्तर प्रदेश@2047' (Viksit UP@2047) का पूरा खाका तैयार कर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को अंतिम संस्तुति, मार्गदर्शन और उच्च स्तरीय अनुमोदन के लिए प्रेषित कर दिया है। लखनऊ से दिल्ली पहुंची इस विस्तृत फाइल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुमूल्य सुझावों और अंतिम सहमति की मुहर लगते ही पूरे प्रदेश में विकास का एक अभूतपूर्व महाअभियान शुरू कर दिया जाएगा।

केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किए जा रहे 'विकसित भारत@2047' के मास्टर प्लान के साथ उत्तर प्रदेश के इन लक्ष्यों का बारीकी से मिलान और सामंजस्य स्थापित किया जा रहा है। नीति आयोग और केंद्र के आर्थिक सलाहकारों के समन्वय से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि देश के सबसे बड़े राज्य के विकास लक्ष्य राष्ट्रीय विकास दर को सीधी गति प्रदान करें। उत्तर प्रदेश सहित देश के कुल 17 राज्य अपने-अपने 2047 विजन पर युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं, जिनमें से गुजरात, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान ने अपने दस्तावेज औपचारिक रूप से सार्वजनिक कर दिए हैं। अब जैसे ही नई दिल्ली से उत्तर प्रदेश के प्रारूप को हरी झंडी मिलेगी, राज्य की पूरी प्रशासनिक मशीनरी तय लक्ष्यों को जमीन पर उतारने के लिए मिशन मोड में जुट जाएगी।

छह ट्रिलियन डॉलर की विशाल अर्थव्यवस्था: तीन चरणों का सुनियोजित खाका

विजन डॉक्यूमेंट में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को ऐतिहासिक ऊंचाई पर ले जाने के लिए चरणबद्ध और व्यावहारिक रोडमैप तैयार किया गया है। सरकार की रणनीति के तहत सबसे पहला बड़ा पड़ाव वर्ष 2029-30 तक राज्य की अर्थव्यवस्था को $1 ट्रिलियन (एक लाख करोड़ डॉलर) के स्तर तक पहुंचाना है। इस मजबूत आर्थिक आधारशिला के निर्माण के बाद अगले चरण में वर्ष 2035-36 तक जीएसडीपी (GSDP) को दोगुना करते हुए $2 ट्रिलियन तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है।

इस योजना का सबसे भव्य और निर्णायक चरण देश की स्वतंत्रता के 100वें गौरवशाली वर्ष यानी 2046-47 में सामने आएगा, जब उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को $6 ट्रिलियन (छह लाख करोड़ डॉलर) के विशालकाय आकार में बदलने का संकल्प लिया गया है। यह आंकड़ा न केवल उत्तर प्रदेश को भारत का आर्थिक इंजन बना देगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी राज्य को कई बड़े विकसित राष्ट्रों की जीडीपी के बराबर लाकर खड़ा कर देगा। इसके लिए औद्योगिक गलियारों, अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे नेटवर्क, डिफेंस कॉरिडोर, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और आईटी हब का ऐसा एकीकृत संजाल तैयार किया जा रहा है जो निवेश को निरंतर आकर्षित करता रहे।

प्रति व्यक्ति आय में 20 गुना उछाल: ₹1.24 लाख से ₹25 लाख का सफर

इस महायोजना का सबसे लोक-कल्याणकारी और क्रांतिकारी पहलू नागरिकों के व्यक्तिगत जीवन स्तर में सुधार से जुड़ा है। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) लगभग 1.24 लाख रुपये दर्ज की गई है। विजन डॉक्यूमेंट के अनुसार, वर्ष 2047 तक राज्य के प्रत्येक नागरिक की औसत वार्षिक आय को बढ़ाकर 25 लाख रुपये तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

आय के स्तर में लगभग 20 गुना का यह भारी उछाल केवल कागजी अनुमान नहीं है, बल्कि इसके पीछे कृषि का विविधीकरण, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) का आधुनिकीकरण, हाई-टेक विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में लाखों उच्च आय वाले रोजगार सृजित करने की वैज्ञानिक रणनीति शामिल है। जब आम नागरिक की क्रय शक्ति में इतना व्यापक इजाफा होगा, तो राज्य के भीतर आंतरिक मांग में भारी तेजी आएगी, जो स्थानीय व्यापार, रियल एस्टेट, स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा के क्षेत्रों को स्वतः ही अभूतपूर्व गति प्रदान करेगी।

देश की जीडीपी में 20 फीसदी हिस्सेदारी और शीर्ष राज्य बनने का संकल्प

भारत की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश का योगदान वर्तमान में 9.2 प्रतिशत के आसपास है, जो राज्य के विशाल भूभाग और आबादी के हिसाब से तेजी से बढ़ रहा है। विजन डॉक्यूमेंट में यह स्पष्ट संकल्प लिया गया है कि वर्ष 2047 तक राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में उत्तर प्रदेश का कुल योगदान बढ़ाकर सीधा 20 प्रतिशत किया जाएगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि भारत जब विश्व की शीर्ष आर्थिक महाशक्तियों में गिना जाएगा, तब देश के कुल आर्थिक उत्पादन का पांचवां हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश की धरती से उत्पन्न होगा।

इस ऐतिहासिक लक्ष्य को हासिल करते ही उत्तर प्रदेश बिना किसी प्रतिस्पर्धा के देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाला निर्विवाद रूप से शीर्ष राज्य बन जाएगा। यह बदलाव उत्तर प्रदेश की पुरानी पहचान को पूरी तरह बदलकर उसे आधुनिक उद्योग, नवाचार, वित्तीय सेवाओं और वैश्विक लॉजिस्टिक्स के सबसे बड़े केंद्र के रूप में स्थापित कर देगा।

100% साक्षरता, 0.5% बेरोजगारी और 60% शहरीकरण का सामाजिक ब्लूप्रिंट

आर्थिक आंकड़ों के समानांतर इस विजन डॉक्यूमेंट में सामाजिक और जनसांख्यिकीय सुधारों का भी एक संपूर्ण ब्लूप्रिंट शामिल किया गया है। राज्य सरकार ने प्रदेश भर में शत-प्रतिशत (100%) साक्षरता दर हासिल करने का अचूक लक्ष्य रखा है, जिसमें डिजिटल साक्षरता और वोकेशनल कौशल विकास को स्कूली स्तर से ही अनिवार्य बनाया जाएगा। सामाजिक समरसता और मानव विकास सूचकांक में यह कदम राज्य की तस्वीर बदल देगा। रोजगार के मोर्चे पर एक अत्यंत साहसिक लक्ष्य तय करते हुए वर्तमान 2.7 प्रतिशत की बेरोजगारी दर को घटाकर न्यूनतम 0.5 प्रतिशत पर लाने की कार्ययोजना बनाई गई है, जिससे राज्य में व्यावहारिक रूप से पूर्ण रोजगार की स्थिति पैदा होगी। इसके अलावा, राज्य की वर्तमान 24.54 प्रतिशत शहरी आबादी को वर्ष 2047 तक बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है। इसके लिए प्रदेश के टियर-2 और टियर-3 शहरों को नियोजित स्मार्ट सिटी, सेटेलाइट टाउनशिप और औद्योगिक उपनगरों के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि ग्रामीण आबादी को अपने ही जिले के नजदीक विश्व स्तरीय नागरिक सुविधाएं, उच्च वेतन वाली नौकरियां और आधुनिक जीवनशैली सहजता से उपलब्ध हो सके।

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