शिक्षकों को योगी सरकार का बड़ा तोहफा 1.37 लाख प्रोफेसरों को मिलेगा 5 लाख तक का कैशलेस इलाज, शासनादेश जारी
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के शैक्षणिक ढांचे को मजबूती देने वाले उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए खुशियों का पिटारा खोल दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना एक और वादा पूरा करते हुए राज्य के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों के लगभग 1.37 लाख शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को ‘कैशलेस चिकित्सा सुविधा’ की सौगात दी है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को इस संबंध में आधिकारिक शासनादेश (Government Order) जारी कर दिया गया है, जिससे अब शिक्षकों को इलाज के लिए अपनी जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी।सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में मिलेगा मुफ्त इलाजइस नई योजना के तहत, लाभार्थी शिक्षक और उनके आश्रित परिवार के सदस्य न केवल सरकारी अस्पतालों में, बल्कि पैनल में शामिल निजी अस्पतालों (Empanelled Private Hospitals) में भी मुफ्त इलाज करा सकेंगे। यह सुविधा आयुष्मान भारत योजना की तर्ज पर शुरू की गई है, जिसमें प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध होगा। इस योजना का लाभ नियमित शिक्षकों के साथ-साथ अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) और स्ववित्तपोषित (सेल्फ-फाइनांस) कॉलेजों के शिक्षकों को भी मिलेगा।साचीज (SACHIS) के जरिए होगा योजना का संचालनकैशलेस इलाज की इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी ‘स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज’ (साचीज) द्वारा की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपचार की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार होंगी। योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए हर साल 30 जून तक पात्र शिक्षकों और उनके परिवारों का डेटा साचीज को उपलब्ध कराया जाएगा। इससे शिक्षकों को अस्पताल में भर्ती होने के समय किसी भी तरह की वित्तीय बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।खजाने पर पड़ेगा 50 करोड़ से ज्यादा का भारयोगी सरकार ने इस कल्याणकारी योजना के लिए भारी भरकम बजट का प्रावधान किया है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के अनुसार, प्रति शिक्षक और कर्मचारी पर सरकार लगभग 2,479.70 रुपये का वार्षिक प्रीमियम वहन करेगी। कुल मिलाकर इस योजना पर राज्य सरकार को सालाना लगभग 50 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आएगा। यह कदम न केवल शिक्षकों के मनोबल को बढ़ाएगा, बल्कि उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा क्षेत्र में बेहतर कार्यसंस्कृति विकसित करने में भी सहायक सिद्ध होगा।




