वाराणसी MLC चुनाव में फिर विवादों में घिरे तेज-तर्रार IAS प्रांजल यादव: कौन हैं, 2014 में मोदी की रैली से क्या था नाता और क्यों लग रहे हैं पक्षपात के आरोप

भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के गलियारों में कुछ अधिकारी अपने काम करने के बेबाक अंदाज, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक गहमागहमी के बीच किसी न किसी वजह से हमेशा सुर्खियों में बने रहते हैं। उत्तर प्रदेश कैडर के जाने-माने और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रांजल यादव (IAS Pranjal Yadav) इन दिनों उत्तर प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक हलकों में एक बार फिर से चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। हाल ही में संपन्न हुए विधान परिषद (MLC) चुनावों के दौरान वाराणसी में पर्यवेक्षक की भूमिका निभा रहे प्रांजल यादव पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा गंभीर पक्षपात के आरोप लगाए गए हैं, जिसके बाद से उनका नाम सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की खबरों तक छा गया है। प्रांजल यादव का नाम सामने आते ही लोगों को साल 2014 का वह दौर भी याद आ गया है जब वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी रैली के दौरान सुर्खियों में आए थे। आइए विस्तार से जानते हैं कि आईएएस प्रांजल यादव कौन हैं, 2014 के विवाद से उनका क्या संबंध रहा है और ताजा एमएलसी चुनाव में उन पर किस तरह के आरोप लगे हैं।
कौन हैं IAS प्रांजल यादव? उत्तर प्रदेश कैडर के 2006 बैच के दबंग अधिकारी
आईएएस प्रांजल यादव उत्तर प्रदेश कैडर के 2006 बैच के बेहद कुशल और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हैं। अपने अब तक के लंबे और उतार-चढ़ाव से भरे प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में महत्वपूर्ण और संवेदनशील पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं।
प्रांजल यादव मुख्य रूप से तब देश भर की नजरों में आए थे जब उन्होंने वर्ष 2013 से लेकर 2014 के दौरान धार्मिक और राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले शहर वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट (DM) के रूप में कार्यभार संभाला था। एक जिलाधिकारी के तौर पर उनकी गिनती प्रशासनिक अमले में कड़े फैसले लेने वाले और नियमों का सख्ती से पालन करवाने वाले अधिकारियों में होती है। अपने इसी कार्यशैली के कारण वे कई बार राजनीतिक दलों के निशाने पर भी आ चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक दक्षता के मामले में उन्हें एक मजबूत अधिकारी माना जाता है।
2014 के लोकसभा चुनाव और पीएम मोदी की रैली से जुड़ा है पुराना विवाद
आईएएस प्रांजल यादव का नाम इसके पहले राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान साल 2014 के आम चुनावों में गूंजा था। यह वह दौर था जब भारतीय जनता पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) पहली बार वाराणसी लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरे थे और देश भर की निगाहें इसी सीट पर टिकी हुई थीं।
उस हाई-प्रोफाइल चुनाव के दौरान प्रांजल यादव वाराणसी के जिलाधिकारी (DM) के रूप में तैनात थे। चुनाव प्रचार के दौरान वाराणसी के ऐतिहासिक बेनियाबाग मैदान में प्रधानमंत्री मोदी की एक बड़ी चुनावी रैली आयोजित होनी थी, जिसके लिए प्रशासन से अनुमति मांगी गई थी। सुरक्षा कारणों और स्थानीय व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए जिला प्रशासन द्वारा उस रैली की अनुमति को लेकर कुछ तकनीकी आपत्तियां और अड़चनें सामने आई थीं, जिसके बाद भाजपा और स्थानीय प्रशासन आमने-सामने आ गए थे। यह मुद्दा देश भर में एक बहुत बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया था और विपक्षी दलों के साथ-साथ भाजपा ने भी जिला प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगाया था। उस समय जिलाधिकारी के रूप में प्रांजल यादव के फैसलों की देश भर में चर्चा हुई थी, और एक बार फिर से MLC चुनाव के दौरान उनका वही पुराना प्रसंग लोगों की जुबान पर आ गया है।
वाराणसी स्नातक एमएलसी चुनाव की मतगणना और प्रांजल यादव पर लगे पक्षपात के आरोप
ताजा विवाद उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और बिहार में हाल ही में हुए विधान परिषद (MLC) चुनावों से जुड़ा है। उत्तर प्रदेश समेत इन चार राज्यों की कुल 28 सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान संपन्न हुआ था। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के चर्चित वाराणसी स्नातक एमएलसी चुनाव में आईएएस प्रांजल यादव को चुनाव पर्यवेक्षक (Election Observer) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
वाराणसी में इस चुनाव की मतगणना 27 अक्टूबर को शुरू हुई और 28 अक्टूबर तक लगातार जारी रही। जैसे-जैसे मतों की गिनती आगे बढ़ रही थी, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा था। मतगणना के इसी संवेदनशील दौर में अचानक माहौल तब गरमा गया जब स्थानीय भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनाव पर्यवेक्षक प्रांजल यादव की कार्यप्रणाली और उनकी भूमिका पर खुलेआम सवाल खड़े कर दिए।
भाजपा कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन और सपा के पक्ष में काम करने के आरोप
मतगणना के दौरान स्थिति तब नियंत्रण से बाहर होती दिखी जब वाराणसी के भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह और उनके सैंकड़ों समर्थकों ने मतगणना स्थल के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। आक्रोशित भाजपा कार्यकर्ताओं ने चुनाव पर्यवेक्षक प्रांजल यादव और समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
भारतीय जनता पार्टी का यह सीधा और गंभीर आरोप था कि चुनाव पर्यवेक्षक प्रांजल यादव अपनी निष्पक्ष भूमिका निभाने के बजाय सत्तारूढ़ या विपक्षी समीकरणों के तहत समाजवादी पार्टी (SP) के पक्ष में गुप्त रूप से काम कर रहे हैं। भाजपा नेताओं का दावा था कि मतगणना प्रक्रिया में पारदिर्शता का अभाव था और पर्यवेक्षक के स्तर पर कुछ ऐसे निर्णय लिए गए जो एकतरफा प्रतीत होते हैं। इस विरोध प्रदर्शन और हंगामे के कारण प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश की राज्य राजनीति का सबसे बड़ा हॉट टॉपिक बन गया। एक तरफ जहां प्रशासनिक अधिकारी नियमों के तहत निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस हाई-वोल्टेज ड्रामे ने एक बार फिर प्रांजल यादव को सुर्खियों के केंद्र में ला खड़ा किया है।




