लखनऊ के कुकरैल में बनेगा देश का पहला नाइट सफारी पार्क, सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी! अंधेरे में देख सकेंगे शेरों का रोमांच

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निवासियों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक ऐतिहासिक और बेहद रोमांचक खबर सामने आई है। लंबे समय से प्रतीक्षित कुकरैल नाइट सफारी (Kukrail Night Safari) प्रोजेक्ट को अब सुप्रीम कोर्ट से अंतिम मंजूरी मिल गई है। इस प्रोजेक्ट के साथ ही लखनऊ अब भारत के चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा जहां नाइट सफारी की अनूठी सुविधा उपलब्ध होगी। इस सफारी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पर्यटक अब घने अंधेरे में भी शेरों, बाघों और अन्य जंगली जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का रोमांच अनुभव कर सकेंगे।

क्या है कुकरैल नाइट सफारी का विजन?

यह प्रोजेक्ट न केवल वन्यजीव संरक्षण के लिए एक बड़ा कदम है, बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी लखनऊ के लिए एक माइलस्टोन साबित होगा। कुकरैल के घने जंगलों को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि यह पूरी तरह से एक इको-फ्रेंडली नाइट सफारी का रूप ले ले। यहां पर्यटकों को विशेष रूप से डिजाइन की गई गाड़ियों में ले जाया जाएगा, जो अंधेरे में भी जानवरों को बिना परेशान किए देखने में सक्षम होंगी। रात के सन्नाटे में जंगल का अनुभव लेना और शेरों की दहाड़ को करीब से सुनना सैलानियों के लिए एक लाइफ-टाइम एक्सपीरियंस होने वाला है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और आधुनिक तकनीक का उपयोग

वन्यजीव विशेषज्ञों और प्रशासन का कहना है कि पर्यटकों की सुरक्षा और जानवरों की निजता को ध्यान में रखते हुए इस पूरे क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। सफारी में जानवरों की निगरानी के लिए नाइट-विज़न कैमरे, मोशन सेंसर और सुरक्षा के लिए आधुनिक फेंसिंग लगाई जाएगी। इसके अलावा, सफारी के दौरान गाड़ियों के साथ ट्रेंड गाइड और सुरक्षा गार्ड भी मौजूद रहेंगे ताकि किसी भी तरह की अनहोनी की संभावना न रहे। यह प्रोजेक्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर की सफारी तर्ज पर विकसित किया जा रहा है।

लखनऊ बनेगा टूरिज्म का ग्लोबल हब

सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद अब निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है। नाइट सफारी के अलावा, इस क्षेत्र में एक विशाल बायोडायवर्सिटी पार्क और वन्यजीव शोध केंद्र भी बनाया जाएगा, जो छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र होगा। लखनऊ में नाइट सफारी शुरू होने से न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि यह उत्तर प्रदेश में इको-टूरिज्म को एक नई पहचान भी दिलाएगा। अब वह दिन दूर नहीं जब लखनऊ की पहचान केवल अपनी संस्कृति और खान-पान के लिए नहीं, बल्कि देश की पहली नाइट सफारी के लिए भी दुनिया भर में होगी।

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