नसीरुद्दीन शाह के नए वीडियो बयान से देश की राजनीति और कला जगत में बड़ा बवाल

बॉलीवुड के वरिष्ठ और दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अक्सर अपने बेबाक बयानों और राजनीतिक दृष्टिकोण को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। इस बार उनका एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसने देश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है। वीडियो में नसीरुद्दीन शाह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए बेहद तीखे और कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने मौजूदा सरकार को ‘नाजायज हुकूमत’ करार दिया है। इतना ही नहीं, नसीरुद्दीन शाह ने सरकार विरोधी लहजे को और आगे बढ़ाते हुए खुद को तंजिया अंदाज में ‘दिमागी नक्सल’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का हिस्सा घोषित कर दिया है। उनके इस आक्रामक और चौंकाने वाले बयान के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से लेकर टीवी डिबेट्स तक एक नई बहस छिड़ गई है, जहां पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
वायरल हो रहे इस वीडियो में नसीरुद्दीन शाह देश के मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक माहौल पर चिंता जताते हुए बेहद गंभीर अंदाज में अपनी बात रखते दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में आज असहमति की आवाज उठाने वालों, बुद्धिजीवियों और विचारकों को बिना किसी आधार के ‘अर्बन नक्सल’, ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ और ‘देशद्रोही’ जैसे तमगों से नवाज दिया जाता है। इसी बात का विरोध दर्ज कराते हुए उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अगर देश के संविधान, धर्मनिरपेक्षता और नागरिकों के अधिकारों की बात करना अपराध है, तो हां, वे भी एक ‘दिमागी नक्सल’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ के सदस्य हैं। उन्होंने मौजूदा सत्ता पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और जनता के बीच विभाजन पैदा करने का आरोप लगाते हुए इसे एक ‘नाजायज हुकूमत’ बताया। नसीरुद्दीन शाह के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनका यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर अपनी तरह-तरह की राय व्यक्त कर रहे हैं।
नसीरुद्दीन शाह के इस विवादित बयान के सामने आते ही सत्ताधारी दल और उनके समर्थकों की ओर से उन पर करारा हमला बोला गया है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कई दक्षिणपंथी संगठनों का कहना है कि एक जिम्मेदार और जाने-माने अभिनेता द्वारा देश की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को ‘नाजायज’ कहना बेहद आपत्तिजनक, गैर-जिम्मेदाराना और देश के जनादेश का अपमान है। आलोचकों का तर्क है कि नसीरुद्दीन शाह बार-बार इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान देकर केवल सस्ती लोकप्रियता हासिल करने और देश के माहौल को खराब करने की कोशिश करते हैं। दूसरी ओर, उनके समर्थकों, कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं ने उनका बचाव करते हुए कहा है कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों की आलोचना करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और किसी को भी उसकी राय के लिए लांछित नहीं किया जाना चाहिए।
यह पहली बार नहीं है जब नसीरुद्दीन शाह अपने बयानों के कारण इस तरह के विवादों के केंद्र में आए हैं। इससे पहले भी वे देश में असहिष्णुता, धार्मिक ध्रुवीकरण और भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखकर राजनीतिक विवादों का सामना कर चुके हैं। कला और सिनेमा जगत भी इस मामले में दो धड़ों में बंटा हुआ नजर आ रहा है। कुछ कलाकारों का मानना है कि सिनेमा जगत की बड़ी हस्तियों को समाज में सौहार्द बनाए रखने के लिए संयमित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए, वहीं कुछ का मानना है कि एक कलाकार का फर्ज बनता है कि वह सत्ता से कठिन सवाल पूछे। फिलहाल, नसीरुद्दीन शाह का यह वीडियो बयान राजनीतिक तापमान को बढ़ा चुका है और आने वाले दिनों में इस पर और अधिक तीखे वार-पलटवार होने की पूरी संभावना है।




