केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का राहुल गांधी पर तीखा हमला, संसद में ‘इडियट’ शब्द और पेपर लीक के मुद्दों पर दिया करारा जवाब


संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर जमकर निशाना साधा। केंद्रीय मंत्री ने संसद में इस्तेमाल किए गए 'इडियट' जैसे शब्दों पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि कोई व्यक्ति अपने आप को भी इडियट समझे, तो भी ऐसे शब्दों का प्रयोग संसद के भीतर नहीं किया जा सकता है। यह तीखा पलटवार राहुल गांधी द्वारा सदन में दिए गए बयानों और गृह मंत्री अमित शाह पर लगाए गए गंभीर आरोपों के जवाब में सामने आया है।
संसदीय नियमों की जानकारी और गोलीबारी के दावों पर सफाई
चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें बुनियादी संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं की भी जानकारी नहीं है। गृह मंत्री अमित शाह पर लगाए गए गोली चलाने के आरोपों का खंडन करते हुए जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों पर किसी प्रकार की गोली चलाई ही नहीं गई थी, बल्कि स्थिति नियंत्रित करने के लिए केवल आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने दो टूक शब्दों में समझाया कि देश के कानून के मुताबिक गोली चलाने या बल प्रयोग का आदेश देने का अधिकार किसी मंत्री के पास नहीं बल्कि केवल मजिस्ट्रेट के पास होता है, इसलिए इस तरह के मनगढ़ंत आरोप पूरी तरह से निराधार हैं।
पीएम आवास के बाहर धरने और विपक्ष की राजनीति पर कटाक्ष
केंद्रीय मंत्री ने 21 जुलाई को राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री आवास के बाहर दिए गए धरने पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि उनका विभाग शोध से जुड़ा है और जब उन्होंने इस घटना का अध्ययन किया तो पाया कि विपक्ष के नेता लंबे समय से यह उम्मीद कर रहे थे कि देश की जनता उन्हें चुनकर पीएम आवास में बैठाएगी। जब यह हसरत पूरी नहीं हुई तो निराशा और हताशा के चलते वे पीएम आवास के दरवाजे पर जा बैठे। उन्होंने जेन जी की भाषा का हवाला देते हुए कहा कि शुरुआत में कांग्रेस इस विरोध प्रदर्शन से दूर रहना चाहती थी, लेकिन बाद में फोमो (FOMO) के चक्कर में वे इसमें कूद पड़े।
पेपर लीक और कड़े संशोधनों पर सरकार का पक्ष
पेपर लीक के मामलों पर बोलते हुए जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में सरकार ने बिना किसी देरी के त्वरित कार्रवाई की और 12 जुलाई को ही मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। उन्होंने सदन को जानकारी दी कि इस मामले में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है और सुनवाई भी शुरू हो गई है। नए संशोधन विधेयक के लागू होने के बाद फास्ट ट्रैक अदालतों के जरिए ऐसे मामलों में महज पांच महीने के भीतर फैसला सुनाया जाएगा। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2024 में ही प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ कड़े प्रावधानों वाला मूल कानून लाया गया था, और अब कमियों को दूर करते हुए इसे और अधिक सख्त बनाया जा रहा है।
गौरव गोगोई और प्रियंका गांधी के आंकड़ों पर पलटवार
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई द्वारा दिल्ली में बच्चों पर जुल्मोसितम ढाय जाने के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने सर्वोच्च संयम का परिचय देते हुए कार्रवाई की ताकि किसी की जान न जाए। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि गोगोई शायद अपने पुराने अनुभवों से बोल रहे थे, क्योंकि 1979 से 1984 के बीच असम में कांग्रेस शासन के दौरान छात्र आंदोलन पर हुई पुलिसिया कार्रवाई में 860 लोग मारे गए थे। इसके साथ ही, प्रियंका गांधी द्वारा देश में 152 बार पेपर लीक होने और 750 करोड़ बच्चों के प्रभावित होने के दावों पर हैरानी जताते हुए उन्होंने सवाल किया कि आखिर वे ऐसे बेबुनियाद और अतिशयोक्तिपूर्ण आंकड़े कहां से लेकर आती हैं।



