काशी-सहयोग सम्मेलन में हुआ बड़ा एलान, गंगा और नर्मदा के बीच बनेगा नया क्राफ्ट कॉरिडोर
धर्म, अध्यात्म और संस्कृति की नगरी काशी अब उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच आर्थिक सेतु बनने जा रही है। वाराणसी में आयोजित ‘काशी-सहयोग सम्मेलन’ में दोनों राज्यों के बीच एक मजबूत आर्थिक ईकोसिस्टम (Economic Ecosystem) तैयार करने पर सहमति बनी है। इस ऐतिहासिक पहल के तहत ‘गंगा’ और ‘नर्मदा’ के क्षेत्रों को जोड़ते हुए एक विशाल क्राफ्ट कॉरिडोर (Craft Corridor) विकसित किया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य दोनों राज्यों के हस्तशिल्प, स्थानीय कला और व्यापारिक रिश्तों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना है।गंगा-नर्मदा क्राफ्ट कॉरिडोर: व्यापार का नया रास्तासम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों और सरकारी प्रतिनिधियों ने साझा किया कि उत्तर प्रदेश की गंगा संस्कृति और मध्य प्रदेश की नर्मदा विरासत के बीच कलात्मक समानताएं हैं। प्रस्तावित क्राफ्ट कॉरिडोर के जरिए वाराणसी के रेशम, भदोही के कालीन और मध्य प्रदेश के चंदेरी व महेश्वरी सिल्क को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा। इससे न केवल शिल्पकारों को बड़ा बाजार मिलेगा, बल्कि लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन में भी सुधार होगा, जिससे दोनों राज्यों के बीच व्यापारिक लागत में कमी आएगी।डबल इंजन की डबल ताकत से बदलेगी तस्वीरवाराणसी में हुए इस मंथन का केंद्र बिंदु निवेश और रोजगार रहा। वक्ताओं ने कहा कि यूपी और एमपी का साथ आना पूरे उत्तर-मध्य भारत के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। पर्यटन के क्षेत्र में भी ‘काशी-महाकाल’ सर्किट की तर्ज पर अन्य धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को जोड़ने की योजना है। इस आर्थिक ईकोसिस्टम के विकसित होने से लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) को सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे।सांस्कृतिक विरासत से समृद्धि का सफरसम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि आर्थिक प्रगति तभी स्थाई होती है जब वह अपनी जड़ों से जुड़ी हो। काशी-सहयोग सम्मेलन महज एक मीटिंग नहीं, बल्कि दो राज्यों की साझा विरासत को आर्थिक शक्ति में बदलने का संकल्प है। इस ईकोसिस्टम के तहत दोनों राज्यों की सरकारों के बीच डेटा साझा करने और सिंगल विंडो क्लीयरेंस जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। आने वाले समय में यह कॉरिडोर भारत की ‘आत्मनिर्भर’ अर्थव्यवस्था का एक चमकता हुआ उदाहरण बनेगा।




