कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाकर 7 सितंबर की

देश में आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने की दिशा में एक अहम प्रशासनिक कदम उठाया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने कच्ची चीनी (Raw Sugar) के शुल्क-मुक्त आयात कोटे के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि को आगे बढ़ा दिया है। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक सार्वजनिक सूचना के अनुसार, टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत शेष बची आयात मात्रा और एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के वन-टाइम कन्वर्जन के लिए पात्र आयातक, चीनी मिलें और रिफाइनरियां अब 7 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन माध्यम से अपने आवेदन जमा कर सकते हैं। इस फैसले से उन चीनी मिलों और पोर्ट-बेस्ड रिफाइनरियों को बड़ी राहत मिली है जो पहली समयसीमा के दौरान तकनीकी कारणों या वित्तीय आकलन में देरी की वजह से आवेदन नहीं कर पाई थीं।

10 लाख टन का था कुल कोटा: 2.02 लाख टन मात्रा अभी भी बची

घरेलू बाजार में चीनी की मांग और आपूर्ति के संतुलन को साधने के लिए केंद्र सरकार ने 20 अगस्त 2026 को अधिसूचना जारी कर 10 लाख मीट्रिक टन (10 Lakh MT) कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त (Duty-Free) आयात के लिए टीआरक्यू योजना को मंजूरी दी थी। शुरुआत में जब इसके लिए आवेदन मंगाए गए थे, तब देश भर के प्रमुख चीनी उत्पादकों और रिफाइनर्स की ओर से कुल 7,97,450 मीट्रिक टन के लिए ही वैध आवेदन प्राप्त हुए। 28 अगस्त को बैठी टीआरक्यू आवंटन कमेटी की समीक्षा के बाद यह बात सामने आई कि स्वीकृत मात्रा के बावजूद अभी भी 2,02,550 मीट्रिक टन का कोटा आवंटित होने से शेष रह गया है। आयात का यह कोटा खाली न रह जाए और देश के बफर स्टॉक को किसी भी आपात स्थिति के लिए मजबूत रखा जा सके, इसी उद्देश्य से डीजीएफटी ने सार्वजनिक सूचना संख्या 28/2026-27 और 29/2026-27 जारी करके शेष 2.02 लाख टन के लिए नई विंडो खोलने और डेडलाइन को 7 सितंबर तक विस्तारित करने की घोषणा की।

पहली बार लागू हुआ 'डेली बैच मैकेनिज्म': जानिए कैसे होगा आवंटन

इस बार डीजीएफटी ने बचे हुए कोटे के पारदर्शी और तेज निपटारे के लिए अपनी पुरानी प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। दूसरे चरण की इस आवेदन प्रक्रिया में दैनिक बैच प्रणाली (Daily Batch Allocation Mechanism) लागू की गई है। इस नई व्यवस्था के तहत किसी भी कार्य दिवस पर शाम 5:30 बजे तक डीजीएफटी के डिजिटल पोर्टल पर प्राप्त होने वाले सभी ऑनलाइन आवेदनों को एक अलग 'बैच' माना जाएगा। इसके बाद पात्रता शर्तों और दस्तावेजों की गहन तकनीकी जांच के उपरांत अगले ही कार्य दिवस पर उस बैच के आवंटन का फैसला कर दिया जाएगा। जो आवेदन शाम 5:30 बजे की कट-ऑफ टाइमिंग के बाद सबमिट होंगे, उन्हें स्वतः अगले दिन के बैच में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। आवंटन पूरी तरह 'पहले आओ, पहले पाओ' और कुल दैनिक मांग के आधार पर होगा। यदि किसी एक दिन प्राप्त कुल आवेदनों की मांग शेष बचे 2.02 लाख टन के कोटे से अधिक हो जाती है, तो उस दिन के सभी पात्र आवेदकों को आनुपातिक (Pro-rata) आधार पर कोटा वितरित किया जाएगा। जैसे ही पूरा 2.02 लाख टन का कोटा समाप्त हो जाएगा, पोर्टल पर आगे के आवेदनों पर विचार रोक दिया जाएगा।

एडवांस ऑथराइजेशन (SION E-52) के कन्वर्जन को भी मिली 7 सितंबर तक छूट

कच्ची चीनी आयात के संदर्भ में केवल नया टीआरक्यू कोटा ही नहीं, बल्कि निर्यात दायित्व से जुड़े नियमों में भी महत्वपूर्ण छूट दी गई है। डीजीएफटी ने स्टैंडर्ड इनपुट आउटपुट नॉर्म्स (SION E-52) के तहत जारी एडवांस ऑथराइजेशन को टीआरक्यू योजना में 'वन-टाइम कन्वर्जन' (One-Time Conversion) करने की समयसीमा को भी 3 सितंबर से बढ़ाकर 7 सितंबर 2026 तक कर दिया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि जिन निर्यात-उन्मुख रिफाइनरियों ने पहले एडवांस लाइसेंस पर कच्ची चीनी मंगवाई थी और किसी कारणवश वे निर्यात दायित्व पूरा करने में अड़चनों का सामना कर रही थीं, वे अपने लाइसेंस को घरेलू टीआरक्यू कोटे में बदलकर घरेलू बाजार में आपूर्ति करने की अनुमति ले सकती हैं। इससे मिलों पर डिफ़ॉल्ट का जोखिम कम होगा और बंदरगाहों पर रुके जहाजों से स्टॉक तेजी से प्रोसेस होकर स्थानीय बाजारों में पहुंचेगा।

किन मिलों और रिफाइनरियों को मिलेगा सीधा लाभ: पात्रता की शर्तें

सरकार ने इस बात का कड़ा ध्यान रखा है कि आयात कोटे का लाभ केवल वास्तविक उत्पादकों और रिफाइनर्स तक ही पहुंचे ताकि सट्टेबाजी और कालाबाजारी पर पूरी तरह लगाम कसी जा सके। योजना के तहत केवल वही इकाइयां आवेदन करने की पात्र हैं जिनके पास अपनी सक्रिय चीनी मिल या स्टैंडअलोन रिफाइनरी मौजूद है। इसके अलावा, आवेदक कंपनी के पास वैध आयातक-निर्यातक कोड (IEC), खाद्य सुरक्षा नियामक एफएसएसएआई (FSSAI) का वैध लाइसेंस और जीएसटी रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है। डीजीएफटी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी प्रकार का ऑफलाइन या कागजी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। केवल डीजीएफटी के आधिकारिक इंपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (IMS) पर दर्ज टाइम-स्टैम्प को ही आवेदन की वरीयता का अंतिम पैमाना माना जाएगा।

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक के चीनी बेल्ट पर क्या होगा असर?

भारत के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों—उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु में इस नीतिगत फैसले का गहरा स्थानीय प्रभाव देखा जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में अनियमित मानसूनी बारिश और महाराष्ट्र तथा कर्नाटक के कुछ इलाकों में गन्ने के रकबे में आई आंशिक गिरावट को लेकर उद्योग जगत में चिंताएं जताई जा रही थीं। हालांकि, हालिया हफ्तों में खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) और भारतीय चीनी एवं जैव ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA) की सक्रियता से एक्स-मिल कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक की नरमी दर्ज की गई है। आयातित कच्ची चीनी मुख्य रूप से कांडला, मुंद्रा, जेएनपीटी और चेन्नई जैसे तटीय बंदरगाहों के निकट स्थित रिफाइनरियों में रिफाइन होकर दक्षिण और पश्चिम भारत के बाजारों में पहुंचेगी। इससे उत्तर भारत (विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार) की मिलों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा और देश के भीतर क्षेत्रीय आपूर्ति का संतुलन बना रहेगा।

त्योहारी सीजन में आम उपभोक्ताओं की जेब पर क्या पड़ेगा प्रभाव?

सितंबर से लेकर नवंबर तक भारत में गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा, दशहरा, करवा चौथ और दिवाली-छठ जैसे बड़े त्योहारों की श्रृंखला शुरू हो जाती है। इस पूरे कालखंड में हलवाईयों, मिठाई निर्माताओं, बेकरी, कोल्ड ड्रिंक्स और एफएमसीजी कंपनियों की तरफ से चीनी की वाणिज्यिक खपत 25 से 35 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। यदि बाजार में आपूर्ति का जरा भी टोटा पड़ता, तो खुदरा कीमतें 45 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम के पार जा सकती थीं। लेकिन 10 लाख टन शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी के आगमन और मिलों की नई पेराई शुरू होने की तैयारियों के चलते थोक और खुदरा दोनों बाजारों में कीमतें पूरी तरह स्थिर रहने का अनुमान है। सरकार का यह त्वरित फैसला सीधे तौर पर मध्यम वर्गीय परिवारों के घरेलू बजट को महंगाई के झटके से बचाने वाला साबित होगा।

डीजीएफटी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कैसे करें: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

पात्र चीनी मिलों और रिफाइनर्स को 7 सितंबर 2026 की शाम 5:30 बजे से पहले अपनी आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए इन चरणों का पालन करना होगा:

  1. सबसे पहले डीजीएफटी की आधिकारिक वेबसाइट dgft.gov.in पर जाएं।

  2. अपनी यूजर आईडी, पासवर्ड और डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) की मदद से पोर्टल पर लॉगिन करें।

  3. 'Services' मेनू में जाकर 'Import Management System' का चयन करें।

  4. इसके बाद सब-कैटेगरी में 'Tariff Rate Quota (TRQ)' विकल्प पर क्लिक करें और 'Apply for TRQ Raw Sugar' चुनें।

  5. निर्धारित आवेदन पत्र में अपने प्लांट की पेराई क्षमता, रिफाइनिंग क्षमता, जीएसटी विवरण, एफएसएसएआई प्रमाण पत्र और मांगी गई आयात मात्रा का ब्योरा भरें।

  6. आवश्यक सहायक दस्तावेज और स्व-घोषणा पत्र (Self-Declaration) पीडीएफ प्रारूप में अपलोड करें।

  7. डिजिटल हस्ताक्षर के साथ फॉर्म सबमिट करें और पोर्टल द्वारा जारी रसीद व टाइम-स्टैम्प को भविष्य के संदर्भ के लिए सुरक्षित रख लें।

डीजीएफटी ने सभी हितधारकों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि यानी 7 सितंबर की शाम का इंतजार किए बिना समय रहते अपने आवेदन पोर्टल पर दर्ज कर दें ताकि किसी संभावित सर्वर लोड या तकनीकी दिक्कत से बचा जा सके।

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