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सूचना एवं प्रसारण सचिव ने दिल्‍ली पुस्‍तक मेले में प्रकाशन विभाग के स्‍टॉल का उद्घाटन किया

नई दिल्ली: सूचना एवं प्रसारण सचिव श्री अमित खरे ने प्रगति मैदान, नई दिल्‍ली में दिल्ली पुस्तक मेले में प्रकाशन विभाग के स्टॉल का उद्घाटन किया। श्री खरे ने प्रकाशन विभाग की पांच पुस्‍तकों का विमोचन किया। इस अवसर पर राष्‍ट्रीय गांधी संग्रहालय के निदेशक श्री ए.अन्‍नामलाई भी मौजूद थे।

श्री अमित खरे ने हिन्‍दी और अंग्रेजी के अलावा अनेक भारतीय भाषाओं में महान विभूतियों के जीवन परिचय से जुड़ी पुस्‍तकें प्रकाशित कर लोगों को उनके करीब लाने के लिए प्रकाशन विभाग के प्रयासों की सराहना की। उन्‍होंने इंटरनेट के युग में पुस्‍तकों की फलती-फूलती  संस्‍कृति की चर्चा करते हुए कहा, हालांकि इंटरनेट सूचना का खजाना है, लेकिन पुस्‍तकें ज्ञान प्रदान करती है।

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पुस्‍तक मेले में प्रकाशन विभाग की भागीदारी

गांधीवादी विचारों पर पुस्‍तकों का एक प्रमुख प्रकाशक होने के नाते, प्रकाशन विभाग ने प्रिंट और ई-संस्‍करण में महात्‍मा गांधी शीर्षक की एक श्रृंखला प्रदर्शित की है। राष्‍ट्रपति, उपराष्‍ट्रपति और प्रधानमंत्री के भाषणों और इतिहास तथा धरोहर सहि‍त अन्‍य विविध विषयों, बच्‍चों के साहित्‍य, कला और संस्‍कृति, आजादी के लिए राष्‍ट्रीय आंदोलन, राष्‍ट्रीय नेताओं की जीवनियां, वनस्‍पति और जीव-जंतु, विज्ञान और अर्थव्‍यवस्‍था, राष्‍ट्रपति भवन पर पुस्‍तकें इस मेले में प्रदर्शित की गई है। प्रकाशन विभाग का स्‍टॉल प्रगति मैदान में हॉल नंबर-7 के सामने है।

जारी की गई पुस्‍तकों का विवरण

  1. कस्तूरी परिमल (हिंदी): कस्तूरबा गांधी, मोहन से महात्मा गांधी बने एक युवक के परिवर्तन की यात्रा की प्रमुख गवाह थीं। कहानी के रूप में वर्णित, इस पुस्तक में कस्तूरबा के जीवन के प्रयत्‍नों और पीड़ा, गांधीजी के साथ उनकी बातचीत और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रमुख महिला नेता के रूप में उनके उदय को प्रस्‍तुत किया गया है। यह पुस्‍तक गांधीजी द्वारा शुरू किए गए रचनात्मक कार्यक्रमों के साथ-साथ विभिन्न आश्रमों में सामुदायिक जीवन में कस्तूरबा द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालती है। पुस्तक के लेखक डॉ. विश्वास पाटिल मराठी साहित्य जगत में एक जाना माना नाम हैं।
  2. 1921 के असहयोग आंदोलन की झांकियां : पूर्व राष्ट्रपति श्री वी.वी. गिरि द्वारा लिखित प्रस्तावना के साथ, इस पुस्तक में डॉ. ताराचंद, श्री प्रकाश, कमलादेवी चट्टोपाध्याय, काका कालेलकर, आरआर दिवाकर, हरिभाऊ उपाध्याय और डॉ. हरेकृष्ण मेहता सहित अनेक जाने-माने बुद्धिजीवियों, स्वतंत्रता सेनानियों और पत्रकारों के आलेख हैं।
  3. गांधी कथा (हिंदी और उर्दू): यह एक ग्राफिक उपन्यास है जो महात्मा गांधी के जीवन पर आधारित है। बच्चों को लक्षित पाठक मानकर, प्रकाशन विभाग विभिन्न भारतीय भाषाओं में पुस्तक का प्रकाशन सुनिश्चित करने का काम कर रहा है।
  4. सत्याग्रह (गुजराती) में महिलाएँ: राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय की पूर्व अध्‍यक्ष प्रो. अपर्णा बसु द्वारा लिखित पुस्‍तक प्रकाशन विभाग ने मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित की है।  प्रख्यात गांधीवादी प्रोफेसर वर्षा दास ने इस पुस्‍तक का गुजराती में अनुवाद किया है। इसमें अनेक प्रेरक सत्याग्रही महिलाओं की कहानियों का वर्णन है, जो दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्य के खिलाफ कठिन संघर्ष के दौरान प्रमुखता से खड़ी हुईं, लेकिन कभी भी अहिंसा के रास्ते से भटकी। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि इनमें से अनेक महिलाओं की सेवा भावना ने उन्हें स्वतंत्रता के बाद के युग में भारत के सामाजिक विकास के लिए काम करना जारी रखने के लिए प्रेरित किया।
  5. महात्मा को श्रद्धांजलि: आकाशवाणी श्रद्धांजलि (तमिल) – यह पुस्तक, मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित की गई है, और अब इसका गांधी अध्ययन केंद्र, चेन्नई की मदद से पहली बार तमिल में अनुवाद किया गया है, जिसमें 30 जनवरी, 1948 को गांधीजी की मृत्यु के बाद आकाशवाणी पर महात्‍मा गांधी को दी गई श्रद्धांजलि को शामिल किया गया है। इस पुस्तक में सरदार वल्लभभाई पटेल, जवाहरलाल नेहरू सहित प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों के साथ-साथ लॉर्ड माउंटबेटन और अन्‍य गणमान्य व्‍यक्तियों की श्रद्धांजलि को शामिल किया गया है।

दिल्ली पुस्तक मेले के बारे में :

25वां दिल्ली पुस्तक मेला 11 सितंबर से 15 सितंबर, 2019 तक प्रगति मैदान, नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स और आईटीपीओ ने किया है। यह एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां प्रकाशकों, लेखकों, पुस्‍तक विक्रेताओं और पुस्तक प्रेमियों को बातचीत करने का मौका मिलता है।

महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के अवसर पर  पुस्तक मेले की विषय-वस्‍तु उन्‍हें समर्पित की गई है।

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