केन्द्रीय कृषि मंत्री ने गंगातीरी गाय के संरक्षण एवं विकास केन्द्र की आधारशिला रखी

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नई दिल्ली: केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधामोहन सिंह जी ने गंगातीरी गाय के संरक्षण एवं विकास केन्द्र की आधारशिला आज आराजी लाईन शाहंशाहपुर, वाराणसी में रखी। इस अवसर पर, श्री सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश अपनी कई देशी नस्लों के लिए जाना जाता है जैसे मेवाती, केहरीगढ़, पोंवार गाय की नस्लें, भदावरी भैंस की नस्ल। देशी नस्लों के संरक्षण एवं संवर्द्धन पर कोई केन्द्रीय कार्यक्रम के न होने के कारण देशी नस्लों की संख्या में कमी आयी है और इनका उत्पादन क्षमता के अनुरूप नहीं रह गया है। कृषि मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने देश में पहली बार राष्ट्रीय बोवाईन प्रजनन एवं डेयरी विकास कार्यक्रम के तहत देशी नस्लों के संरक्षण और संर्वधन के दृष्टिकोण से एक नई पहल ’राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ को प्रारम्भ किया हैं।

श्री सिंह ने जानकारी दी कि देशी नस्लों के विकास एंव संरक्षण के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश को 67.13 करोड़ रूपये में से 37 करोड़ रूपये का आबंटन किया गया है। राज्य योजना के अतर्गत गोकुल ग्राम की स्थापना एवं सांड-माता फार्मो का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। राज्य अभी तक 37 करोड़ में सिर्फ 10 करोड़ ही खर्च कर पाया है।

कृषि मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश दुग्ध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। वर्ष 2013-14 में 24.19 मिलियन टन दुग्ध टन उत्पादन हुआ। उत्तर प्रदेश कई राज्यों से दुग्ध उत्पादकता में पीछे है। उन्‍होंने कहा कि वे राज्य को दुग्ध उत्पादकता में प्रथम स्थान पर देखने की अपेक्षा रखते हैं।

श्री सिंह ने यह भी जानकारी दी कि गंगातीरी नस्ल को हाल ही में भा.कृ.अनु़.प.-एनबीएजीआर द्वारा एक अलग नस्ल के रूप में स्वीकार किया गया है। यह उत्तरप्रदेश की महत्वपूर्ण नस्ल है तथा इसके संरक्षण संवर्धन के लिए उत्तरप्रदेश पशुधन विकास बोर्ड के माध्यम से कार्य किये जा रहे हैं।

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