शिक्षक 21वीं सदी के भारत के भविष्य को आकार देंगे: धर्मेंद्र प्रधान

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राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने कहा कि विद्यार्थियों में अंतर्निहित क्षमता के संयोजन की प्राथमिक जिम्मेदारी शिक्षकों की होती है; एक योग्य अध्यापक ही एक व्यक्तित्व-निर्माता, एक समाज-निर्माता और एक राष्ट्र-निर्माता होता है। राष्ट्रपति आज (5 सितंबर, 2021 को) शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे, इस दौरान देश भर के 44 शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान और शिक्षा राज्यमंत्री श्री सुभाष सरकार; राज्यमंत्री श्री राजकुमार रंजन सिंह तथा श्रीमती अन्नपूर्णा देवी भी इस अवसर पर उपस्थित थे। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की सचिव श्रीमती अनीता करवाल तथा उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री अमित खरे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस मौके पर मौजूद थे।

राष्ट्रपति ने पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी शिक्षकों को उनके विशिष्ट योगदान के लिए बधाई दी। श्री कोविंद ने कहा कि ऐसे अध्यापक उनके इस विश्वास को मजबूत करते हैं कि आने वाली पीढ़ी हमारे योग्य शिक्षकों के हाथों में सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि हम सभी के जीवन में शिक्षकों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान होता है। लोग अपने शिक्षकों को जीवन भर याद रखते हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि जो अध्यापक अपने छात्रों को स्नेह और लगन से शिक्षित करते हैं, उन्हें अपने विद्यार्थियों से हमेशा सम्मान मिलता है।

    राष्ट्रपति ने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे अपने छात्रों को एक सुनहरे भविष्य की कल्पना करने तथा उनके सपनों को पूरा करने में योग्यता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करें और सक्षम बनाएं। उन्होंने कहा, “अध्यापकों का यह कर्तव्य है कि वे अपने छात्रों के अंदर पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करें। संवेदनशील शिक्षक अपने व्यवहार, आचरण और शिक्षण से ही छात्रों के भविष्य को आकार दे सकते हैं।” श्री कोविंद ने कहा, शिक्षकों को इस बात पर विशेष ध्यान देना चाहिए कि प्रत्येक छात्र की क्षमताएं, प्रतिभाएं, मनोविज्ञान, सामाजिक पृष्ठभूमि और वातावरण अलग-अलग होता है। इसलिए हरेक बच्चे के सर्वांगीण विकास पर उसकी विशेष आवश्यकताओं, रुचियों और क्षमताओं के अनुसार ही ध्यान दिया जाना चाहिए।

    राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले वर्ष लागू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति के रूप में स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है और हमें विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा प्रदान करनी है, जो ज्ञान पर आधारित न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में सहायक हो। श्री कोविंद ने कहा, “हमारी शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए, जिससे छात्र संवैधानिक मूल्यों और मौलिक कर्तव्यों के लिए प्रतिबद्धता विकसित करें, वे स्वयं में देशभक्ति की भावना को मजबूत करें और बदलते वैश्विक परिदृश्य में अपनी भूमिका को समझ सकें।

    राष्ट्रपति ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने शिक्षकों को सक्षम बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मंत्रालय ने ‘निष्ठा’ नामक एकीकृत शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके माध्यम से अध्यापकों के लिए ‘ऑनलाइन क्षमता निर्माण’ के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, ‘प्रज्ञाता’ यानी डिजिटल शिक्षा पर पिछले साल जारी किये गए दिशा-निर्देश भी कोविड महामारी के संकट के दौरान शिक्षण की निरंतरता को बनाए रखने की दृष्टि से एक सराहनीय कदम है। श्री कोविंद ने कठिन परिस्थितियों में भी नए रास्ते खोजने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की पूरी टीम की प्रशंसा की।

    इस अवसर पर श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि एक शिक्षक जो भूमिका निभाता है, वह राष्ट्र के मजबूत विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अध्यापक हमारी नई पीढ़ी की सोच और बुद्धि को आकार देने में विशिष्ट भूमिका निभाते हैं। श्री प्रधान ने उन सभी शिक्षकों को धन्यवाद दिया, जो 21वीं सदी के भारत के भविष्य को आकार देने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं।

    केंद्रीय मंत्री ने 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के उन सभी 44 शिक्षकों को बधाई दी, जिन्होंने अनुकरणीय कार्य किया है और राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। श्री प्रधान ने ओडिशा के पद्मश्री स्वर्गीय श्री प्रकाश राव और उनके जैसे अनेक अन्य लोगों को भी याद किया, जिन्होंने शिक्षा के माध्यम से बच्चों को सशक्त बनाया है।

    श्री प्रधान ने कहा कि भारत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों के प्रयासों को मान्यता देने के समारोह में शामिल होने का सौभाग्य आज उन्हें प्राप्त हुआ है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि अध्यापकों ने कोविड-19 के दौरान शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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