श्री धर्मेंद्र प्रधान की उपस्थिति में नरेला के रानीखेड़ा में एकीकृत अपशिष्ट से ऊर्जा सुविधाओं के विकास के लिए इंडियन ऑयल और एनडीएमसी के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये

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इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (इंडियन ऑयल) और उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) ने आज नई दिल्ली के नरेला के रानीखेड़ा इलाके में स्थित एनडीएमसी की लैंडफिल साइट पर एकीकृत अपशिष्ट-से-ऊर्जा सुविधाओं के विकास के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान, दिल्ली के उपराज्यपालश्री अनिल बैजल,उत्तरी दिल्ली नगर निगम केमहापौरश्री जय प्रकाश, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिकगैस सचिव श्री तरुण कपूर,  उत्तरी दिल्ली नगर निगम के आयुक्त श्री ज्ञानेश भारती और इंडियन ऑयल के अध्यक्ष श्री एसएम वैद्य की उपस्थिति में इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये।

इस समझौता ज्ञापन के एक हिस्से के तौर पर, इंडियनऑयल नरेला के रानीखेड़ा इलाके में एकीकृत अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन का एक संयंत्र स्थापित करने के लिए एनडीएमसी को एक रियायतकर्ता की पहचान करने में सहायता प्रदान करेगा। यह संयंत्र कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) के उत्पादन के लिए एनडीएमसीके म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट (एमएसडब्ल्यू) और जैविक अपशिष्टको प्रोसेस करेगा, प्लास्टिक को रिसाइकिल करेगा, प्लास्टिक या सिनगैस और इसके डाउनस्ट्रीम प्रोडक्ट्स के उत्पादन के लिए रिफ्यूज डेरिव्ड फ्यूल (आरडीएफ) का इस्तेमाल करेगा।

इस अवसर पर बोलते हुए, श्री प्रधान ने कहा कि इस ऐतिहासिक परियोजना के शुरू होने से विभिन्न रूपों में ऊर्जा के उत्पादन और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ अन्य राष्ट्रीय उद्देश्यों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी। “पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय एक टिकाऊ भविष्य के लिए दिल्ली में ऐसे और अधिक संयंत्र स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भारत के लिए एक हरित और ऊर्जा-कुशल भविष्य का निर्माण करने और नवीन हरित उपायों को अपनाकर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप है।”

इस परियोजना की स्थापना के लिए इंडियन ऑयल और नॉर्थ डीएमसी के एक साथ आने की सराहना करते हुए, उन्होंने देशभर में ऐसी पायलट परियोजनाओं के त्वरित विस्तार और उसकी प्रतिकृति बनाने का आह्वान किया। श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राजधानी में इस तरह के सीबीजी संयंत्र न केवल राष्ट्रीय राजधानी में ठोस कचरे की समस्या को हल करेंगे, बल्कि  प्रदूषण और तेल के मामले में दूसरों पर हमारी निर्भरता को कम करने में भी मददगार साबित होंगे। उन्होंने नई दिल्ली नगरपालिका परिषद और दिल्ली छावनी सहित दिल्ली के अन्य क्षेत्रों में ठोस कचरे के निपटान के लिए ऐसे और संयंत्र लगाने का आह्वान किया। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा ऐसे संयंत्रों में उत्पादित गैस के पूर्ण उपयोग का आश्वासन दिया। श्री प्रधान ने कहा कि सरकार ऐसे संयंत्रों द्वारा उत्पादित गैस को पीएनजी, सीएनजी के पाइपलाइनों के साथ जोड़ेगी। उन्होंने कहा कि हमें समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से इस समस्या का समाधान खोजने का प्रयास करना चाहिए ताकि हर दिन इस शहर में उत्पादित 14000 से 15000 टन ठोस कचरे को सुरक्षित और स्वस्थ तरीके से निपटाया जा सके। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम जरूरत पड़ने पर हरसंभव तकनीकी मदद प्रदान करेंगे। केन्द्रीय मंत्री ने इस प्रक्रिया में तेजी लाने का आह्वान किया ताकि अगले कुछ वर्षों में इसके परिणाम देखे जा सकें। श्री प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार पहले ही हरियाणा के साथ मिलकर कृषि से जुड़े अपशिष्टों के निपटान की दिशा में काम कर रही है, जो न केवल प्रदूषण को कम करने में मदद करेगा बल्कि किसानों को उनके अवशिष्ट के लिए अतिरिक्त आय सुनिश्चित करेगा।

दिल्ली के उपराज्यपाल श्री अनिल बैजल ने राष्ट्रीय राजधानी के लोगों को इस परियोजना से मिलने वाले लाभों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस शहर के पास कचरे के केवल आधे हिस्से को ही प्रोसेस करने की क्षमता है और कचरे से ऊर्जा उत्पादन करनेवाले संयंत्रों के शुरू होने से न केवल ठोस कचरे को निपटाने का एक स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल तरीका मिलेगा बल्कि ये ऊर्जा, सीबीजी, सिटी कम्पोस्ट आदि भी पैदा करेंगे।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सचिव श्री तरुण कपूर ने अपने संबोधन में इस बात का उल्लेख किया कि वैज्ञानिक तरीके से एमएसडब्ल्यू का प्रबंधन करना और इसे ऊर्जा में बदलना बेहद जरूरी है। यह कदम भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अपशिष्ट और संबंधित लैंडफिल से होने वाले उत्सर्जन की समस्या को कम करेगा। उन्होंने कहा कि सतत योजना के तहत परिकल्पित 5000 संयंत्रों में से 15 का परिचालन शुरू हो गया है और इसकी उच्च गुणवत्ता के कारण ऐसे संयंत्रों में उत्पादित गैस की अच्छी मांग है।

अपने संबोधन में इंडियन ऑयल के अध्यक्ष श्री एस एम वैद्य ने दिल्ली में कचरे के प्रबंधन की समस्या पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित प्लांट अपशिष्ट प्रबंधन का एक स्थायी और व्यावहारिक उपाय प्रदान करेगा। म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट (एमएसडब्ल्यू) – से- ऊर्जा उत्पादन करने वाला संयंत्र स्थापित करने से कई लाभ मिलेंगे और यह स्वच्छ भारत, आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसी सरकारी पहलों के अनुरूप भी है। यह कचरे के संग्रह से लेकर ऊर्जा की बिक्री तक की मूल्य श्रृंखला में रोजगार के सृजन को भी गति प्रदान करेगा।

यह एकीकृत संयंत्र एनडीएमसी द्वारा एकत्र किए गए लगभग 2500 मिलियन टन म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट को प्रोसेस करेगा, प्लास्टिक को रिसाइकिल करेगा और संपीडित बायो-गैस (सीबीजी), इथेनॉल, सिनगैस और अन्य मूल्यवर्धित डाउनस्ट्रीम उत्पादों का उत्पादन करेगा।

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