असम में विकास के बावजूद ढांचागत समस्याओं का समयबद्ध समाधान जरूरीः वित्त आयोग

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नई दिल्लीः 15वां वित्त आयोग 25 से 27 अप्रैल, 2018 तक पूर्वोत्तर के द्वार असम की यात्रा करेगा। आयोग असम की वित्तीय स्थिति, इसकी सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का जायजा लेगा और इन समस्याओं से निपटने में राज्य सरकार के प्रयासों को समझेगा। असम काफी समय से   भौगोलिक और ऐतिहासिक चुनौतियों को पार करते हुए विकास की राह पर है। राज्य में सामाजिक-आर्थिक विकास हुआ है लेकिन राज्य की स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक परिणामों में तेजी लाने के महत्वपूर्ण अवसर मौजूद हैं। जनसांख्यिकी विविधता से अनगिनत सामाजिक-आर्थिक स्थितियां बनती है और आवश्यकता विभिन्न रूपों में विकास की चुनौतियां पेश करती है। राज्य में विकास हुआ है लेकिन स्थानीय ढांचागत समस्याओं को समयबद्ध तरीके से सुलझाने की आवश्यकता है।

अपनी तीन दिन की यात्र में आयोग के अध्यक्ष श्री एन. के. सिंह, सदस्य श्री शशिकांत दास, डॉ. अनुप सिंह, डॉ. अशोक लाहिरी और डॉ. रमेश चन्द, राज्य के मुख्यमंत्री, मंत्रियों तथा अन्य अधिकारियों से मिलेंगे। राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया जाएगा। आयोग विभिन्न राजनीतिक दलो के नेताओं, स्वाशासी परिषदों के प्रतिनिधियों, उद्योग और व्यापार क्षेत्र के प्रतिनिधियों यानी चैम्बर ऑफ कॉमर्स/फिक्की की असम शाखा, इंडियन टी एसोसिएशन की असम शाखा के प्रतिनिधियों तथा अन्य हितधारकों से भी मुलाकात करेगा और राज्य के अवसरों और राज्य की चुनौतियों को समझेगा। आयोग शहरी और स्थानीय निकायों और पंचायती राज संगठनों के साथ संवाद करेगा।

अरुणाचल प्रदेश के बाद असम दूसरा राज्य है जहां 15वां वित्त आयोग यात्रा कर रहा है। वित्त आयोग का अभिन्न कार्यक्रम विभिन्न राज्यों की यात्रा करना, उनकी विकास आवश्यकताओं तथा संसाधन उपलब्धता को समझना और फिर सिफारिशें और रिपोर्ट करना है।

पृष्ठभूमिः

2016-17 में प्रमुख सामाजिक-आर्थिक संकेतक

1.  राज्य की अर्थव्यवस्था प्राथमिक रूप से कृषि है। 2011 की जनगणना के अनुसार कुल कार्यबल का 50 प्रतिशत अभी भी कृषि पर निर्भर है। यद्यापि राज्य तेल, गैस तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों के मामले में समृद्ध है लेकिन औद्योगिकीकरण और शहरीकरण सीमित है।

2.  इसके बावजूद हाल में राज्य की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र महत्वपूर्ण हो गया है।

3.  शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) प्रति 1000 जन्म में 47 है जो अखिल भारतीय औसत (प्रति 1000 जन में 37) से अधिक है।

4.  मातृ मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है।

5.  जीवन प्रत्याशा अखिल भारतीय औसत (68.3 वर्ष) से कम 64.7 वर्ष है।

6.  अखिल भारतीय 73 प्रतिशत की तुलना में असम की साक्षरता दर 72.2 प्रतिशत है।

7.  दशकीय जनसंख्या वृद्धि देश के 17.64 प्रतिशत से कम 16.93 प्रतिशत है।

8.  प्रति व्यक्ति आय 67,620 रुपये है जो अखिल भारतीय औसत 1,03,870 रुपये से कम है।

आयोग असम की प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के उपाये तलाशेगा

आयोग असम की विशेषताओं का मानता है और वृद्धि के बावजूद असम को राष्ट्रीय औसत के बराबर आने के लिए कठिन परिश्रम करना होगा विशेषकर प्रति व्यक्ति आय के मामले में। यह चिंता की बात है कि असम की प्रति व्यक्ति आय अखिल भारतीय औसत से काफी कम है। अखिल भारतीय औसत स्वयं उभरते बाजारों से कम है। इसलिए आयोग ढांचागत प्राशसनिक तथा अन्य आवश्यक अवसरों की तलाश करेगा।

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