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प्राचीन भारतीय भाषाओं को प्रोत्सातहन और उनका संरक्षण समय की मांग: उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि प्राचीन भारतीय भाषाओं को प्रोत्‍साहन और अनका संरक्षण समय की मांग है क्योंकि वे हमारे प्राचीन सभ्यतागत मूल्यों, ज्ञान और विवेक को एक सीमित समय में अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने प्रत्येक मातृभाषा के प्रचार के लिए एक राष्ट्रीय आंदोलन का भी आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने आज चेन्नई में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ क्लासिकल तमिल (सीसीआईटी) और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ तमिल स्टडीज (आईआईटीएस) का दौरा करते हुए ये टिप्पणियां कीं।

श्री नायडू ने थिरुक्कुरल का सभी भारतीय भाषाओं और कुछ विदेशी भाषाओं में अनुवाद कराने में केन्‍द्र के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने मानवता के व्यापक लाभ के लिए प्राचीन और लोकप्रिय तमिल ग्रंथों का भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद करने का आह्वान किया।

उन्होंने तमिलों के पुराकाल से संबंधित अथवा उसे प्रतिबिंबित करने वाली वस्‍तुओं के प्रलेखन और उनके संरक्षण के लिए दोनों संस्थानों द्वारा किए गए अच्छे कार्यों की सराहना की।

उन्होंने सीआईसीटी और आईआईटीएस के कर्मचारियों और अधिकारियों से कहा, “आपका योगदान महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया में कहीं भी ऐसा कोई संस्थान नहीं है जो प्राचीन तमिल समाज पर शोध करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हो”।

उपराष्ट्रपति ने भारतीय भाषाओं की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकी की क्षमता को उपयोग में लाने की आवश्यकता बताई। श्री नायडू ने जोर देकर कहा, ” विभिन्न भाषाएं बोलने वाले सभी लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्थानीय भाषा में अपनी बात रखने के लिए हमारे पास अनेक तकनीकी उपकरण होने चाहिए।”

उपराष्ट्रपति ने भारतीय भाषाओं में बोलने, लिखने और संवाद करने वालों के लिए सम्मान और गर्व की भावना रखने का आहवान किया। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपनी मातृभाषा का उपयोग घर में, समुदाय में, बैठकों में और प्रशासन में करें।

भाषा के संरक्षण और विकास के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर देते हुए, श्री नायडू ने कहा, इसकी शुरूआत प्राइमरी स्‍कूल के स्तर पर हो जानी चाहिए। उन्‍होंने बच्चे की मातृभाषा में आधारभूत शिक्षा प्रदान करने का आह्वान किया।

यह कहते हुए कि भाषा संस्कृति, वैज्ञानिक ज्ञान और विश्व के विचारों को आपस में साझा करने का संवाहक है, उपराष्ट्रपति ने कहा कि मनुष्‍य के विकास के साथ-साथ भाषा भी विकसित होती जाती है और लगातार इस्‍तेमाल से समृद्ध होती है।

उपराष्ट्रपति ने प्राथमिक स्रोतों का उपयोग कर विद्वानों को अनुसंधान करने के लिए प्रोत्साहित करने और ज्ञान के नये हिस्‍से का पता लगाने के लिए उपाय करने को कहा। उन्होंने कहा, ‘हमें ज्ञान को जोड़ना चाहिए और अपने वर्तमान और भविष्य को रोशन करना चाहिए।’

सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ क्लासिकल तमिल जैसे संस्थानों की भूमिका इसमें बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संस्थान और संस्थान से जुड़े शोधकर्ता खूबसूरत तमिल भाषा को संरक्षित करके, उसकी रक्षा करके और उसे बढ़ावा देकर राष्ट्र की असाधारण सेवा कर रहे हैं।

सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ क्लासिकल तमिल (सीआईसीटी) मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत स्‍वायत्‍तशासी उच्‍च अनुसंधान संस्‍थान है। यह विशेष रूप से तमिल भाषा के पारम्‍परिक से जुड़े अनुसंधान पर अपना ध्‍यान केंद्रित कर रहा है, यानि प्रारंभिक अवधि से 600 ईडी तक।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे प्रयासों से, सभी संस्कृतियों, समाजों और भाषाओं को समझने में मदद मिलेगी और लोगों को एक-दूसरे के करीब लाया जा सकेगा।

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ तमिल स्टडीज की अपनी यात्रा के दौरान, उपराष्ट्रपति ने दशकों के अनुसंधान से खोले गए तमिलों के इतिहास को फिर उत्‍पन्‍न करने के लिए स्थायी प्रदर्शनी के साथ सांस्कृतिक केंद्र के चारों तरफ दौरा किया।

प्रदर्शनियों को पांच दीर्घाओं में लगाया गया है – इनमें कला रूपों को प्रदर्शित कर रही “थोलक्‍कपियर आरंगम”, धातु विज्ञान / कृषि, शिक्षा, चिकित्सा और हथियारों के प्रदर्शन के साथ “थिरुवल्लुवर आरंगम”, घरेलू उपकरणों / ग्राइंडर के संग्रह तथा मंदिरों और देवताओं पर प्रदर्शनी के साथ “कपिलर आरंगम”, प्राचीन राजाओं के जीवन की प्रसिद्ध घटनाओं को दर्शाने वाली “अव्‍वईयार आरंगम” और जहाज निर्माण और पाल-बुनाई पर प्रदर्शनी “इलंगो आदिगल गैलरी” शामिल है।

उपराष्ट्रपति मदुरै और श्रीरंगम शहरों के शानदार शहर-नियोजन और मंदिर निर्माण कलात्मकता से बेहद प्रभावित हुए।

श्री नायडू ने कहा, “मेरी सलाह है कि तमिलों के इतिहास को बेहतर ढंग से समझने के लिए इस अनूठे संस्थान का दौरा किया जाए। मुझे यकीन है कि प्रत्येक आगंतुक संतुष्टि और पूर्णता की भावना के साथ आएगा”।

उप राष्‍ट्रपति के साथ तमिलनाडु के मत्स्य पालन मंत्री, श्री डी. जयकुमार, तमिल राजभाषा और तमिल संस्कृति मंत्री श्री के. पांडियाराजन, ग्रामीण उद्योग मंत्री श्री पी. बेंजामिन, केन्‍द्र और तमिलनाडु सरकार के अधिकारी यात्रा पर आए थे।

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