नमो देव्यै महादेव्यै: सीआरपीएफ के साथ-साथ देश का मान बढ़ा रही हैं रूबी

खेल समाचार

अचूक निशानेबाज केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की सिपाही रूबी रानी अपने कर्तव्य पालन के साथ देश के तिरंगे का भी मान बढ़ा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटिग प्रतियोगिता में रूबी रानी ने स्वर्ण और रजत पदक जीतकर सीआरपीएफ का नाम विदेश में भी ऊंचा किया है। 10 वर्षों में आल इंडिया पुलिस मीट में हर वर्ष उन्होंने पदक जीतकर सीआरपीएफ का नाम रोशन किया है। रूबी रानी अभी तक विभिन्न प्रतियोगिताओं में 26 पदक जीत चुकी हैं। मां महागौरी का धवल स्वरूप विषम परिस्थितियों में न डगमगाने और सही दिशा में चलायमान रहने के लिए प्रेरित करने वाला है। वातावरण प्रतिकूल हो तब भी मन को शांत रख कर कर्तव्य पालन कराने वाली महिला मां महागौरी के इसी स्वरूप का दर्शन कराती है। ्ररूबी रानी ने भी विदेश की धरती पर अलग-अलग देशों से आए खिलाड़ियों के बीच अपने आपको विचलित नहीं होने वाली महिला के रूप में प्रस्तुत किया।

रूबी के मामले में सबसे खास बात यह है कि वह सीआरपीएफ में खेल कोटे के तहत नहीं बल्कि सामान्य भर्ती से आई थीं। 2009 में सिपाही के रूप में भर्ती होकर सीआरपीएफ के नीमच प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के दौरान ही बेहतरीन निशानेबाजी के करतब दिखाए। सीआरपीएफ शूटिग टीम के प्रबंधक परमिदर सिंह ने उसी दौरान रूबी की प्रतिभा को परख लिया। उनको शूटिग टीम में शामिल होने को कहा गया रूबी ने अधिकारियों की बात को सहज ही मान लिया। अक्टूबर 2010 में रूबी कादरपुर स्थित सीआरपीएफ की शूटिग रेंज में प्रशिक्षण के लिए पहुंच गईं। उसके बाद रूबी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2010 में अहमदाबाद में शूटिग की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पहली बार प्रतियोगी के रूप में शामिल हुईं। इस प्रतियोगिता में रूबी ने चौथा स्थान हासिल किया। उसके बाद आल इंडिया पुलिस मीट में रूबी ने पहला स्वर्ण पदक जीता। 300 मीटर रेंज में 2017 में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता। राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 2018 व 19 में अपनी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। 2019 में व‌र्ल्ड पुलिस प्रतियोगिता में 10 मीटर और 50 मीटर रेंज में देश के लिए दो पदक जीते। इंडो-भूटान चैंपियनशिप में 300 मीटर में रजत पदक जीतकर सीआरपीएफ के साथ-साथ देश का नाम भी रोशन किया। निशानेबाज रूबी रानी का लक्ष्य देश के लिए ओलंपिक खेलों में पदक जीतना है। वे इसके लिए लगातार प्रयासरत हैं। उनका मानना है कि लगन और मेहनत से कोई भी काम किया जाए तो उसमें सफलता जरूर मिलती है।

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