विधान सभा अध्यक्ष ने साहित्यकारों को किया सम्मानित

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उत्तर प्रदेश

लखनऊ: कविता न केवल हमारा मार्गदर्शन करती है बल्कि हमारी नेतृत्व क्षमता बढ़ाती है तथा हमारे मूल्यों का संवर्धन करती है। इसी से देश की संस्कृति आगे बढ़ती है। वेदों की रिचायें रामायण, गीता जैसे धर्मग्रन्थ भी कविता में ही रचे गये है। कवियों ने जो लिखा है वह हमारा आदर्श भी बना हैं। हमारी हिन्दी कविता भारत के ही आचार्य शास्त्र के रूप में परिलक्षित हुयी है।

यह बात आज यहां हिन्दी संस्थान के यशपाल सभागार में आयोजित सम्मान समारोह-2017 के अवसर पर भारत के विभिन्न प्रान्तों से आये लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकारों को सम्मानित करते हुए विधान सभा अध्यक्ष श्री हृदय नारायण दीक्षित ने कही। श्री दीक्षित इस कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने साहित्यकारों की साहित्य के प्रति गहरे लगाव की प्रशंसा की। उन्होंने हिन्दी बोलने वालों से आग्रह किया कि वे हिन्दी भाषा का अधिक से अधिक प्रयोग करें।

उन्होंने कहा अपने शब्द प्रयोग, शब्द सृजन पर हमें गर्व होना चाहिए। यह सब हमारा अपना है। हमारे देश में कविता हमारे पूर्वजों का सृजन है। भारत दुनिया की सभी सभ्यताओं में अग्रणी रहा है। साहित्यकारों की प्रकृति के प्रति जिज्ञासा बनी रही इसी वजह से उन्होंने अपने साहित्य को अधिक से अधिक परिष्कृत किया है। इस अवसर पर श्री दीक्षित ने हिन्दी संस्थान द्वारा त्रैमासिक पत्रिका साहित्य भारती का विमोचन किया।

समारोह को सम्बोधित करते हुए हिन्दी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष डा0 सदानन्द प्रसाद गुप्त ने हिन्दी संस्थान द्वारा किये जा रहे कार्यों पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि साहित्य न केवल समाज का दर्पण होता है बल्कि सामाजिक मूल्यों और परम्पराओं को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

सम्मान समारोह-2017 में भारत भारती पुरस्कार से श्री रमेश चन्द्र शाह को 05 लाख रुपये, गंगा की प्रतिमा तथा ताम्रपत्र से सम्मानित किया गया। 04 लाख रुपये का लोहिया साहित्य सम्मान डा0 जय प्रकाश कर्दम को दिया गया। हिन्दी गौरव सम्मान डा0 रामदेव शुक्ल, महात्मा गांधी साहित्य सम्मान डा0 राम गोपाल शर्मा ‘दिनेश’, पं0दीनदयाल उपाध्याय साहित्य सम्मान डा0 धर्मपाल मैनी, अवन्तीबाई साहित्य सम्मान श्री शत्रुघ्न प्रसाद, राजर्षि पुरूषोत्तमदास टण्डन सम्मान बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय को दिया गया। इन सभी साहित्यकारों को भी 04-04 लाख रुपये देकर सम्मानित किया गया।

इसके अतिरिक्त दो लाख रुपये के साहित्य भूषण सम्मान से 20 साहित्यकारों- सर्वश्री हरिमोहन मालवीय, सत्यधर शुक्ल, मथुरेश नन्दन कुलश्रेष्ठ, चंद्रकिशोर पाण्डेय ‘निशांतकेतु’, देवीसहाय पाण्डेय ‘दीप’, अमरनाथ सिन्हा, नंदलाल मेहता ‘वागीश’, रामबोध पाण्डेय, राम नरेश सिंह ‘मंजुल’, सुन्दर लाल कथूरिया, राम सहाय मिश्र ‘कोमल शास्त्री’, चन्द्र किशोर सिंह, दयानंद पाण्डेय, डा0 रमेश चन्द्र शर्मा, डा0 चमन लाल गुप्त, डा0 मिथिलेश दीक्षित, डा0 दीप्ति गुप्ता, डा0 पशुपतिनाथ उपाध्याय, डा0 ओम प्रकाश सिंह तथा डा0 अनुज प्रताप सिंह को सम्मानित किया गया।

संस्थान ने श्री रवीन्द्र नाथ श्रीवास्तव ‘जुगानी भाई’ को लोक भूषण सम्मान, डा0 क्षेत्रपाल गंगवार को कला भूषण सम्मान, डा0 कैलाश देवी सिंह को विद्या भूषण सम्मान, डा0 गणेश शंकर पालीवाल को विज्ञान भूषण सम्मान, श्री रमेश नैयर को पत्रकारिता भूषण सम्मान, डा0 मृदुल कीर्ति को प्रवासी भारतीय हिन्दी भूषण सम्मान, डा0 अनिल प्रभा कुमार को हिन्दी विदेश प्रसार सम्मान, डा0 शकुंतला कालरा को बाल साहित्य भारती सम्मान, डा0 सुधाकर सिंह को मधुलिमये साहित्य सम्मान, डा0 गोविन्द व्यास को पं0 श्रीनारायण चतुर्वेदी साहित्य सम्मान एवं डा0 विष्णु गिरि गोस्वामी को विधि भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया। इस पुरस्कार की धनराशि भी दो लाख रुपये थी। इसी तरह दो लाख रुपये के सौहार्द सम्मान से सम्मानित किये जाने वालों में डा0 अशोक प्रभाकर कामत (मराठी), डा0 टी0वी0 कट्टीमनी (कन्नड़), डा0 बनारसी त्रिपाठी (संस्कृत), डा0 पी0 माणिक्यांबा ‘मणि’ (तेलुगु), डा0 देवकी एन.जी. (मलयालम), डा0 ए.बी. साई प्रसाद (तमिल), डा0 विनोद कुमार गुप्त ‘निर्मल विनोद’ (डोगरी), श्री विनोद बब्बर (पंजाबी), श्री मेयार सनेही ‘शब्बीर हुसैन’ (उर्दू), श्री श्रीवत्स करशर्मा (उड़िया) शामिल हैं। पं0 मदन मोहन मालवीय विश्वविद्यालयस्तरीय सम्मान (एक लाख रुपये) डा0 वागीश दिनकर एवं डा0 अशोक कुमार दुबे को दिया गया। इसके अलावा संस्थान ने इण्टरमीडिएट में हिन्दी विषय में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले दो विद्यार्थियों को 35-35 हजार रुपये एवं हाईस्कूल में हिन्दी विषय में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले दो विद्यार्थियों को 25-25 हजार रुपये की धनराशि दी।

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