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गन्ने के कालाचिकटा, पायरीला रोग का उपचार करें

लखनऊ: फरवरी माह में बोई गई फसल में (60 दिन पर) सिंचाई उपरान्त 50 किग्रा. नत्रजन/हे. (110 किग्रा. यूरिया) की टाॅपड्रेसिंग करें तथा गुड़ाई करें। शरदकालीन गन्ने में यदि यूरिया की टापड्रेसिंग अवशेष हो तो 60 किग्रा. नत्रजन/हे. (132 किग्रा. यूरिया) की टापड्रेसिंग करें।

फरवरी-मार्च में रखे गए पेड़ी गन्ना में काला चिकटा नियंत्रण हेतु संस्तुति अनुसार उपचार करें। पायरीला से ग्रसित पौधों की पत्तियों को तोड़कर जला दें तथा अधिक प्रकोप होने पर क्लोरपायरीफास का संस्तुति अनुसार उपचार किया जाए।
उ0प्र0 कृषि अनुसंधान परिषद के सभागार में आयोजित बैठक के फसल सतर्कता समूह के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दी गई सलाह के अनुसार गन्ने की पत्तियों की संख्या के आधार पर 3-5 प्रतिशत यूरिया के घोल का छिड़काव करना चाहिए। अंकुर बेधक से ग्रसित पौधों को पतली खुरपी द्वारा भूमि सतह से काटकर चारे में प्रयोग करें। पत्तियों की निचली सतह पर अण्ड समूहों को देखकर पत्ती काटकर निकाल लें तथा अण्डों को नष्ट करें।
गेहूॅ के बाद यदि गन्ना बोना हो तो तत्काल सिंचाई कर ओट आने पर खेत तैयार कर बुवाई करें। बीज गन्ना यदि संभव हो तो ऊपरी 1/3 भाग का ही प्रयोग करें। बीज गन्ना को पानी में कम से कम रात भर डाल दें। दो या तीन आॅख के टुकड़े काटकर 60 सेमी. की दूरी पर एम.ई.एम.सी. से उपचारित करें।
भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाये रखने तथा उर्वरक व्यय में बचत हेतु सिंचाई उपरान्त 5 किग्रा. एजोटोबैक्टर व 5 किग्रा. पी.एस.बी./हे. का प्रयोग जड़ के पास कर गुड़ाई करें। हल्की कम अन्तर पर सिंचाई अपेक्षाकृत उपयोगी होती है, अतः आवश्यकतानुसार सिंचाई करें। कीट के नियंत्रण हेतु 20-30 लाईट ट्रैप प्रति हे. का प्रयोग करें।

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