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भारत ने लक्ष्य तिथि से बहुत पहले ही 400 बिलियन डॉलर का वस्तु व्यापार निर्यात प्राप्त किया: पीयूष गोयल

देश-विदेश व्यापार

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा कपड़ा मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि 400 बिलियन डॉलर का निर्यात हासिल करना देश के प्रत्येक सेक्टर, प्रत्येक हितधारक के ठोस, सामूहिक प्रयास का परिणाम है।

भारत से वस्तु निर्यात चालू वित्त वर्ष के दौरान निर्धारित तिथि से 9 दिन पहले ही 400 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया है। यह वित्त वर्ष 2028-19 में अर्जित 330 बिलियन डॉलर के पिछले रिकॉर्ड से बहुत अधिक है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने निम्नलिखित ट्वीट किया :

भारत ने 400 बिलियन डॉलर का वस्तु निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया तथा सर्वप्रथम बार इस लक्ष्य को अर्जित किया है। मैं अपने किसानों, बुनकरों, एमएसएमई, विनिर्माताओं, निर्यातकों को इस सफलता के लिए बधाई देता हूं।

यह हमारी आत्मनिर्भर भारत की यात्रा में एक प्रमुख मील का पत्थर है। ‘‘

श्री गोयल आज नई दिल्ली में इस अवसर पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

श्री गोयल ने कहा कि इस आकर्षक निर्यात लक्ष्य की प्राप्ति ने विश्व को दिखा दिया कि अनगिनत चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, दृढ़ संकल्प, लगन, क्षमता और प्रतिभा के साथ भारत सभी प्रकार की बाधाओं को पार करेगा।

श्री गोयल ने सभी निर्यातकों, किसानों, बुनकरों, एमएसएमई, विनिर्माताओं, विदेश स्थित भारतीय मिशनों तथा अन्य हितधारकों, जिन्हें उन्होंने इस उपलब्धि को अर्जित करने के पीछे का वास्तविक नायक बताया, के प्रति कृतज्ञता जताई।

उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को आगे बढ़ कर लगातार अगुवाई करने तथा निर्यात पर निरंतर ध्यान केंद्रित करते रहने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा की गई स्पष्ट अपील ने ही उद्योग को निर्यात में भारी उछाल लाने के लिए प्रेरित किया।

श्री गोयल ने कहा कि निर्यात लक्ष्य की प्राप्ति के पीछे देश-वार, उत्पाद -वार तथा ईपीसी -वार विशिष्ट लक्ष्य, निगरानी तथा कार्य सुधार सहित एक विस्तृत रणनीति कार्य कर रही थी।

उन्होंने कहा कि इस उल्लेखनीय उपलब्धि को हासिल करने के लिए ‘ संपूर्ण सरकार दृष्टिकोण ‘ को ‘ संपूर्ण देश दृष्टिकोण ‘ के अगले स्तर ले जाया गया था।

उन्होंने यह भी कहा कि उपलब्धि केवल लक्ष्य को हासिल करने से संबधित नहीं थी  बल्कि आत्मविश्वास का निर्माण करने तथा नए बाजारों की खोज करने के बारे में भी थी।

मंत्री ने सकारात्मक रिपोर्टिंग, उत्साहवर्धक संपादकीयों के जरिये निरंतर व्यवसाय को प्रोत्साहित करने के लिए मीडिया की सराहना की जिसने इसे एक राष्ट्रीय मिशन बनाने के जरिये सहायता की।

निर्यात का रोजगार सृजन, विशेष रूप से श्रम केंद्रित सेक्टरों के साथ प्रत्यक्ष संपर्क को रेखांकित करते हुए श्री गोयल ने कहा कि जब मुरादाबाद के पीतल व्यापारी और वाराणसी के किसानों के उत्पादों को वैश्विक व्यापार में सराहा जाता है तो, यह इस बात का प्रमाण है कि निर्यात से रोजगार और समृद्धि बढ़ रही है।

श्री गोयल ने कोविड-19 की लगातार आने वाली लहरों से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद पूरे वर्ष निर्यात की गति बनाये रखने के लिए भी भारतीय निर्यातकों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि पर वास्तव में एक उत्सव मनाया जाना चाहिए।  उन्होंने यह भी कहा कि इसने राष्ट्र के लिए एक आश्वस्त भविष्य का संदेश दिया। श्री गोयल ने कहा कि भारत गुणवत्ता तथा विश्वसनीयता की एक नई पहचान के साथ विश्व के लिए तैयार है।

कोविड-19 महामारी द्वारा प्रभावित आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में निर्यात की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए, वाणिज्य विभाग ने 6 अगस्त,  2021 को ‘‘ लोकल गोज वोकल – मेक इन इंडिया फॉर द वल्र्ड ‘‘ थीम पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उनके संबोधन तथा निर्यातक समुदाय, राजदूतों/एचसी/वाणिज्यिक मिशनों/लाइन मंत्रालयों/विभागों, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, ईपीसी, कमोडिटी बोर्डों/प्राधिकरणों, उद्योगों/व्यापार संघों, आदि  के साथ उनकी परस्पर बातचीत के दौरान प्रदान की गई प्रेरणा को और आगे बढ़ाया।

संबोधन के दौरान, प्रधानमंत्री ने वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान राष्ट्र द्वारा अर्जित करने के लिए 400 बिलियन डॉलर का वस्तु निर्यात का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया। उन्होंने निर्यातक समुदाय को निर्यात बास्केट में नए उत्पादों की खोज करने, नए गंतव्यों की तलाश करने तथा वर्तमान उत्पादों एवं बाजारों में गहरी पैठ सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस प्रकार, माननीय प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित लक्ष्य एवं दृष्टिकोण को अर्जित करने के लिए वाणिज्य विभाग ने क्षेत्रों तथा देशों एवं उत्पाद/मकोडिटी समूहों के हिसाब से 400 बिलियन डॉलर के लक्ष्य को अलग अलग कर दिया। सरकार ने लक्ष्य को अर्जित करने के लिए तथा एक विस्तृत निगरानी प्रणाली के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की।

अलग अलग किए गए लक्ष्यों ने देश/क्षेत्र/मिशन/निर्यात संवर्धन परिषदों द्वारा कड़ी निगरानी किए जाने को सक्षम बनाया है। वाणिज्य विभाग के कमोडिटी प्रभागों ने अपने अधिकार क्षेत्र के तहत संबंधित ईपीसी के साथ नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की हैं।

इस प्रकार, कोविड की लगातार आने वाली लहरों द्वारा उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद, भारत के वस्तु व्यापार प्रदर्शन ने प्रभावशाली बढोतरी प्रदर्शित की है तथा निर्यात अप्रैल से फरवरी के दौरान 11 लगातार महीनों ( मार्च के अंत में लगातार 12 महीनों तक संभव ) तक 30 बिलियन डॉलर से अधिक रहा है जिसमें विशेष रूप से दिसंबर 2021 के दौरान 39.3 बिलियन डॉलर का अब तक का सर्वोच्च मासिक वस्तु व्यापार रिकॉर्ड किया गया।

इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात 2021-22 के दौरान पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत बढ़ा है। उच्चतर इंजीनियरिंग निर्यात, अपैरल तथा गारमेंट निर्यात आदि से संकेत मिलता है कि भारत की प्राथमिक वस्तुओं का प्रमुख निर्यातक होने की गलत धारणा अब धीरे धीरे बदल रही है। अब हम अधिक से अधिक मूल्य वर्धित वस्तुओं तथा हाई एंड वस्तुओं का निर्यात कर रहे हैं तथा हमारे प्रौद्योगिकी संचालित उद्योगों द्वारा यह प्रयास जारी रहना चाहिए। सूती धागे/फैब्रिक्स/मेडअप्स/हथकरघा उत्पाद आदि, रत्न एवं आभूषण, अन्य अनाज तथा मानव निर्मित्त यार्न/फैब्रिक्स/मेड अप्स आदि के निर्यात ने 50 प्रतिशत से 60 प्रतिशत के बीच की वृद्धि दर दर्ज कराई है।

कृषि क्षेत्र ने भी, विशेष रूप से महामारी के दौरान उल्लेखनीय प्रगति दर्ज कराई है जिसमें भारत खाद्य/अनिवार्य कृषि उत्पादों के एक प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता देश के रूप में उभरा है। कृषि निर्यात में उछाल अन्य वस्तुओं के अतिरिक्त चावल ( बासमती तथा गैर बासमती दोनों ), समुद्री उत्पादों, गेहूं, मसालों तथा चीनी जैसी वस्तुओं से प्रेरित है जिन्होंने 2021-22 के दौरान अब तक का सर्वाधिक कृषि उत्पाद निर्यात दर्ज कराया।

21 मार्च 2022 तक, ऑस्टेलिया, ताईवान, कोरिया गणराज्य, बांग्ला देश, पोलैंड, ब्राजील, इंडोनेशिया, बेल्जियम, सऊदी अरब, टर्की, इटली, जापान, कनाडा, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, नीदरलैंड, नाइजीरिया, मिस्र तथा मैक्सिको वे प्रमुख देश रहे हैं जिन्होंने अपने निर्यात लक्ष्य से अधिक अर्जित किया है। थाईलैंड, इजरायल, नेपाल, वियतनाम एसओसी गणराज्य, चीन, फ्रांस तथा श्रीलंका वे प्रमुख देश रहे हैं जिन्होंने अपने कुल निर्यात लक्ष्य का 90 प्रतिशत से 100 प्रतिशत अर्जित किया है।

21 मार्च 2022 तक, जैविक तथा अजैविक रसायन, अन्य अनाज, पेट्रोलियम उत्पाद, कॉटन यार्न/फैब्रिक्स/मेड अप्स, हथकरघा उत्पाद आदि, अभ्रक, कोयला और अन्य अयस्क, प्रोसेस सहित खनिज अवयव, इंजीनियरिंग वस्तुएं तथा प्लास्टिक एवं लिनोलियम वे प्रमुख वस्तुएं हैं जिन्होंने अपने निर्यात लक्ष्य से अधिक अर्जित किया है।

चावल, समुद्री उत्पाद, फ्लोर कवरिंग सहित जूट विनिर्माण, दरी, अनाज तैयारी एवं विविध प्रसंस्कृत मदें, इलेक्ट्रोनिक वस्तुएं, कॉफी, रत्न एवं आभूषण तथा हस्त निर्मित्त को छोड़कर हथकरघा उन प्रमुख वस्तुओं में शामिल हैं जिन्होंने अपने कुल निर्यात लक्ष्य का 90 प्रतिशत से 100 प्रतिशत अर्जित किया है।

सरकार हमारे उद्योग तथा निर्यातकों को उनके निर्यात निष्पादन को बढ़ाने के लिए एक अनुकूल वातावरण तथा बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने के लिए 24 घंटे काम कर रही है। लक्ष्य के अनुरूप नीतियों तथा योजनाओं को उनके लाभ के लिए लागू तथा कार्यान्वित किया जा रहा है।

महामारी के बीच भी, रोडटेप तथा आरओएससीटीएल को सुगमता से लागू कर दिया जाना निर्यातकों के कल्याण के प्रति सरकार के दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित करता है। ब्याज समकरण स्कीम को निर्यातकों तक विस्तारित कर दिया गया है और इससे बड़ी संख्या में एमएसएमई निर्यातकों को लाभ मिलने की संभावना है।

 उन क्षेत्रों की पहचान करने के लिए जहां भारत तुलनात्मक रूप से लाभ की स्थिति में हैं, उद्योग के साथ घनिष्ठ साझीदारी में काम करने के द्वारा वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण को गहरा करने के लिए घरेलू क्षमता संवर्धन के लिए पुरजोर प्रयास किए जा रहे हैं। इसलिए हम मेक इन इंडिया की तर्ज पर अपनी क्षमताओं को मजबूत करने तथा विश्व के लिए निर्माण करने पर कार्य करेंगे। विनिर्माण के 13 प्रमुख क्षेत्रों के लिए वित्त वर्ष 2021-22 से आरंभ होने वाली पीएलआई स्कीमों की घोषणा कर दी गई है।

निर्यात हब के रूप में जिले ( डीईएच ) पहल में परिकल्पित दृष्टिकोण में एक नीति बदलाव स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने तथा स्थानीय उत्पादो/सेवाओं की निर्यात वृद्धि को प्रेरित करने में जिलों को सक्रिय हितधारक बनाने के लिए अपनाया गया है। उचित वित्त पोषण, बीमा, ऋण प्रावधान उपलब्ध कराने के माध्यम से निर्यात को बढ़ावा देने वाले बुनियादी ढांचों के निर्माण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

इस प्रकार, विविध हितधारकों की सहायता से, जिला स्तर से लेकर विदेशी बाजारों तक एक मजबूत बैकवर्ड फारवर्ड लिंकेज की स्थापना करने के लिए प्रयास किया गया है। इस बीच, सभी हितधारकों अर्थात जिला इकाई, राज्य एवं केंद्रीय सरकार, लाइन मंत्रालयों, ईपीसी, एमएसएमई निर्यातक समुदायों तथा विदेश स्थित हमारे मिशनों के बीच प्रभावी तथा कुशल समन्वय पर जोर दिया गया है जिससे कि निर्यात लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक सुसंगत तथा समन्वित कार्रवाई अर्जित करने के लिए संबंधित विभागों के बीच सूचनाओं का निर्बाधित प्रवाह सुनिश्चित किया जा सके।

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