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स्‍वीडन के साथ मित्रता काफी महत्‍वपूर्ण, यात्रा के दौरान किए गए द्वीपक्षीय समझौते और अधिक सार्थक भागीदारी के रूप में सामने आएंगे: राष्‍ट्रपति

देश-विदेश

नई दिल्‍ली: स्‍वीडन के राजा कार्ल सोलहवें गुस्‍ताफ और रानी सिल्विया ने कल शाम (01 जून 2015) राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी के सम्‍मान में एक प्रीति भोज का आयोजन किया। प्रीति भोज के अवसर पर दिए गए अपने भाषण में राष्‍ट्रपति श्री मुखर्जी ने कहा कि भारत स्‍वीडन के साथ अपनी दीर्घकालिक मित्रता को काफी महत्‍व देता है। हालांकि दोनों देश भौगोलिक रूप से एक दूसरे से दूर हैं लेकिन लोकतांत्रिक मूल्‍यों और प्रचलनों के प्रति समान प्रतिबद्धता से जुड़े हैं।

राष्‍ट्रपति महोदय ने कहा कि भारत और स्‍वीडन के क्षेत्रीय और वैश्विक चिंताओं के कई मुद्दों पर समान विचार हैं। दोनों देश संयुक्‍त राष्‍ट्र और अन्‍य बहुपक्षीय मंचों पर एक दूसरे के साथ घनिष्‍ठतापूर्वक सहयोग करते हैं जहां भारत स्‍वीडन से प्राप्‍त सहयोग की सराहना करता है और उम्‍मीद करता है कि यह सहयोग लगातार प्राप्‍त होता रहेगा। उन्‍होंने कहा कि भारत संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में स्‍थायी सदस्‍यता के लिए उसके न्‍यायोचित दावे को स्‍वीडन से मिलने वाले अनुमोदन तथा स्‍वीडन की अध्‍यक्षता की अवधि के दौरान आर्कटिक परिषद में भारत को पर्यवेक्षक दर्जा प्राप्‍त होने में उसके सक्रिय सहयोग के लिए आभारी है।

भारत के राष्‍ट्रपति ने कहा कि उन्‍हें भरोसा है कि उनकी यात्रा के दौरान किए गए द्वीपक्षीय समझौतों से कई क्षेत्रों में और सा‍र्थक भागीदारी होगी जिनमें भारत और स्‍वीडन के परस्‍पर पूरक रिश्‍ते हैं। उन्‍होंने स्‍वीडन के लोगों को उनकी रचनाशीलता और प्रतिभा संपन्‍न नवाचारों के लिए बधाई दी और विश्‍व को कुछ सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण एवं जीवन को बदलने वाले अन्‍वेषण देने के लिए धन्‍यवाद दिया।

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