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महिलाओं की मदद के लिए बनेगी डायरेक्ट्री

लखनऊ: महिला सशक्तीकरण पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन यहां प्रेस क्लब, हजरतगंज लखनऊ में किया गया। संगोष्ठी का शुभारम्भ विधायक श्रीमती आराधना मिश्रा एवं मनकामेश्वर मंदिर की महन्त देव्या गिरि जी द्वारा दीप प्रज्जवलित कर सरस्वती वंदना के उपरान्त किया गया।

इस मौके पर विधायक श्रीमती आराधना मिश्रा ने संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा कि कई महिलाएं ऐसी होती हैं जिन्हें जरूरत पड़ने पर यह नहीं पता होता कि वह कहां जाएं, किससे मदद मांगे और उनकी मदद के लिए कौन सा प्लेटफार्म सही है। ऐसी महिलाओं के लिए जल्द ही एक डायरेक्ट्री बनायी जायेगी जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में महिला सशक्तीकरण के लिए कार्य कर रहीं एनजीओ, डाक्टर, खिलाड़ी, राजनीतिक, अधिवक्ता, कानूनी सहायता एवं पुलिस सहायता सहित तमाम महिलाओं की डिटेल होगी। मदद के लिए सम्पर्क करने के लिए उनके मोबाइल नम्बर भी होंगे ताकि पीड़ित महिलाएं सीधे और तत्काल मदद ले सकें।

कार्यक्रम संयोजक शैलेन्द्र तिवारी ने अपील की कि आप सभी अपने नम्बर दें शेष नम्बरों को एकत्रित कर बहुत जल्द इसका विमोचन कराया जायेगा।

इस मौके पर इन्दौर विश्वविद्यालय की प्रोफेसर धरा पाण्डेय ने कहा कि महिलाएं अगर स्वस्थ नहीं होंगीं तो सशक्त नहीं होंगी इसलिए स्वस्थ होना जरूरी है। इसके लिए उन्होने सभी को इन्दौर आमंत्रित किया।

महन्त देव्या गिरि ने कहा कि बेटियों और बेटों के बीच भेदभाव बचपन से ही शुरू होता है हर माता-पिता को अपने बेटे और बेटी को एक जैसे संस्कार बिना किसी भेदभाव के देना चाहिए।

इस मौके पर श्रीमती आरती बाजपेयी ने कहा कि हम महिलाओं को पुरूषों से आगे नहीं निकलना बल्कि उनके कदम से कदम मिलाकर साथ चलना है।

श्रीमती शशि पाण्डेय ने कहा कि स्वयं सुरक्षा करना आप सभी के लिए अत्यंत आवश्यक है। मैं जब घर से निकली थी तो अकेले ही निकली थी और तमाम अड़चनों के बाद भी अपनी मंजिल की ओर अग्रसर हूं। इसलिए आप सभी से निवेदन है कि आप लोग भी स्वयं सुरक्षा के लिए आगे आयें।

वरिष्ठ पत्रकार शिल्पी सेन जी ने कहा कि अब यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि यदि काम करने का समान अवसर मिले तो महिलाएं पुरूषों की अपेक्षा ज्यादा अच्छा कार्य कर सकती हैं। वरिष्ठ पत्रकार शिवानी शर्मा ने कहा कि महिलाएं सशक्त हैं उन्हें अपने अन्दर की ताकत को पहचानने की जरूरत है।

महिला कालेज के प्रोफेसर श्री अमित पुरी ने कहा कि आज महिलाओं को पुरूषों से कन्धे से कन्धा मिलाकर चलने की आवश्यकता है। उन्होने पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 अटल बिहारी बाजपेयी जी की कविता कदम मिलाकर चलना होगा, बाधाएं आती हैं आयें घिरे प्रलय की घोर घटायें, से संगोष्ठी को गति प्रदान की।

महिला कालेज की प्रिंसिपल निशा गुप्ता ने कहा कि हमें शिक्षा में बढ़ती हुई आधुनिकता को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ना है और समाज को मजबूती प्रदान करनी है।

निदेशक महिन्द्रा श्रीमती श्रद्धा पाण्डेय ने शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि महिलाओं को शिक्षित करने की जरूरत है जिससे हमारा पूरा समाज शिक्षित हो सके।

संगोष्ठी में उन सभी नारी शक्तियों को जिन्होने अपने-अपने क्षेत्रों में कुछ न कुछ प्रतिभा हासिल की है उन्हें मोमेन्टो, सर्टिफिकेट एवं शाल प्रदान कर ‘प्रियदर्शिनी लौह महिला सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मानित की जाने वाली महिलाओं में शाम्भवी तिवारी, शशि पाण्डेय, प्रीति दीक्षित, हिना कुकरेजा, भावना पाण्डेय, आराधना तिवारी, शिल्पी सेन, दीपशिखा पाण्डेय, अनामिका सिंह, शिवानी शर्मा, मनु शुक्ला, श्यामा सिंह, मोनिका तिवारी, सुप्रिया, अंजलि, अपूर्वा, अपूर्वा पाण्डेय, ऊषा विश्वकर्मा, संगीता पाण्डेय, अन्नपूर्णा, श्रद्धा सक्सेना, प्रवेश द्विवेदी, संध्या यादव, मोहिनी गौतम, निराजना दुबे, रागिनी उपाध्याय, शालिनी श्रीवास्तव, सिमरन पाण्डेय, श्रुति नेगी, स्वर्णिमा जायसवाल, पंखुड़ी गुप्ता, स्नेह प्रभा, वेदान्ती सिंह, कौशिकी चैरसिया, काजल शर्मा, श्रुति मिश्रा, नीरजा सिंह, सुश्री सीत मिश्रा, श्रीमती कुदसिया, उजमा सिद्दीकी, रूपा चैरसिया, शिवांगी सिंह, मुमताज खान, ख्याति गुप्ता, रचना सिंह, तनुश्री पाण्डेय सहित लगभग 150 महिलाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम संयोजक शैलेन्द्र तिवारी ने संगोष्ठी में आये हुए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और धन्यवाद ज्ञापित किया।

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