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सिविल सेवा में लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधित्व के साथ अखिल भारतीय चरित्र समाहित है: डॉ. जितेंद्र सिंह

देश-विदेश

नई दिल्ली: केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (डीओएनईआर) राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत,पेंशन,परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि वर्ष 2020 में सिविल सेवा ने सही मायने में अखिल भारतीय स्वरूप हासिल कर लिया है क्योंकि इसमें पिछले कुछ वर्षों के बाद इस बार लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विषम देश के लिए यह एक बड़ी संपत्ति है और भारत में सिविल सेवाओं के संस्थापक सरदार पटेल के सपने के अनुरूप है। डॉ. जितेंद्र सिंह एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी के आईएएस व्यावसायिक पाठ्यक्रम चरण- II (2018 बैच) का उद्घाटन करने के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंस से जुड़े लोगों को संबोधित कर रहे थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अधिकारियों के पास ‘न्यू इंडिया’ के वास्तुकार बनने का एक अवसर है, जिसकी नींव प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी। उन्होंने कहा कि आजादी के 73 वें वर्ष में भारत अपने पूरे प्रभाव और मजबूती के साथ खड़ा है और भविष्य की ओर बड़ी आशा और क्षमता के साथ देख रहा है। उन्होंने कहा कि भारत जैसा विविधतापूर्ण देश अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए नागरिकों को समझने, उनके साथ विकास के सामान्य लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए काम करने, और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए उन्हें प्रेरित करने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों को श्रेय देता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत ने पिछले 10 हफ्तों में दुनिया को दिखाया है कि कोरोना महामारी संकट के बावजूद भारत में सबकुछ महामारी के पहले के समय की तरह आसानी से चल रहा है। आईएएस व्यावसायिक पाठ्यक्रम के पहले ऑनलाइन उद्घाटन का उल्लेख करते हुए उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि 185 प्रतिभागियों में से लगभग 125 इंजीनियरिंग और अन्य पेशेवर पृष्ठभूमि से हैं। उन्होंने कहा कि इससे देश में आधुनिक समय में विकास की चुनौतियों का सामना करने में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि बैच में 50 महिला अधिकारियों की मौजूदगी श्री नरेंद्र मोदी सरकार के “महिला सशक्तीकरण” मंत्र का वास्तविक सबूत है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने याद करते हुए बताया कि पिछले 5 से 6 वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारत में नौकरशाही को एक नया आधार और उसे नई दिशा प्रदान करने के लिए कई नई चीजों और नवाचारों की एक श्रृंखला शुरू की। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि आईएएस अधिकरियों के करियर की शुरुआत में ही उनके लिए कुछ ही वर्ष पहले शुरू की गई सहायक सचिवों के रूप में तीन महीने काम करने की केंद्र सरकार की पहल से उनकी क्षमता निर्माण में जबरदस्त रूप से फायदा हुआ। इसी तरह, 2018 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 में संशोधन कर ईमानदार अधिकारियों को उत्पीड़न से पर्याप्त सुरक्षा दी गई क्योंकि पहली बार रिश्वत देने वाले को भी इस भ्रष्टाचार अधिनियम के दायरे में लाया गया। उन्होंने बड़े सतोष के साथ इस बात का भी उल्लेख किया कि अब तक 25 लाख से अधिक अधिकारियों ने कोविड-19 से निपटने वाले फ्रंटलाइन श्रमिकों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं के लिए डीओपीटी के आईजीओटी मंच पर पंजीकरण करा लिया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस उपाय से एक आईएएस अधिकारी को कोरोना योद्धा के रूप में प्रशिक्षण देने में मदद मिलेगी। डॉ. जितेंद्र सिंह ने 49 प्रमुख संकेतकों के आधार पर 115 आकांक्षी जिलों की अवधारणा पर विचार करते हुए कहा कि वैज्ञानिक रूप से तैयार की गई एक प्रणाली पर आधारित हर आकांक्षी जिलों में इन संकेतकों में सुधार करने पर ध्यान देना है। इसके साथ ही उन्हें इन संकेतकों में रेटिंग बढ़ाकर राज्य के सबसे अच्छे प्रदर्शन वाले जिले और फिर देश का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले जिले के रूप में आगे लाना है। उन्होंने कहा कि ये जरूरी नहीं है कि पिछड़े जिलों में युवा अधिकारियों की तैनाती से इन संकेतकों में तेजी से बदलाव आएगा।

लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) के निदेशक डॉ. संजीव चोपड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि ऑनलाइन सत्रों के संचालन के लिए ज्ञान नाम से प्रसिद्ध लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) का उपयोग एलबीएसएनएए में किया जाता है। यह प्रतिभागियों के लिए सीधे संपर्क करने का ऑनलाइन मंच है। कोई भी प्रतिभागी पाठ्यक्रम से संबंधित किसी भी चीज जैसे पॉवर पॉइंट,पठन सामग्री,वीडियो पर लाइव कक्षाएं, असाइनमेंट,क्विज़,पिछली कक्षाएं आदि के लिए इस पर लॉग इन कर सकता है।

इस साल द्वितीय चरण के लिए 185 प्रतिभागी हैं। वे तीन श्रेणियों के हैं।

  1. 2018 के आईएएस बैच के 179 अधिकारी
  2. 2017 के आईएएस बैच के 3 अधिकारी (जो पिछले वर्ष द्वितीय चरण में भाग नहीं ले सके थे)
  3. रॉयल भूटान सिविल सेवा के 3 अधिकारी।

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