मैनपुरी के दन्नाहार क्षेत्र में हुआ बड़ा हादसा, नेपाल जा रहा एलपीजी गैस टैंकर पलटने से फैली सनसनी

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले से इस वक्त एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जहां मथुरा रिफाइनरी से भारी मात्रा में रसोई गैस यानी एलपीजी लेकर नेपाल जा रहा एक विशालकाय कैप्सूल टैंकर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खेत में पलट गया। इस भीषण हादसे के बाद टैंकर का मुख्य वाल्व बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके चलते उसमें से लगातार खतरनाक गैस का रिसाव शुरू हो गया और आसपास के इलाके में भारी अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन और दमकल विभाग की टीमें तुरंत हरकत में आईं और एहतियात के तौर पर दुर्घटना स्थल के आसपास करीब एक किलोमीटर के दायरे में सभी प्रकार के वाहनों का आवागमन पूरी तरह रुकवा दिया। गैस रिसाव की इस घटना ने एक बार फिर हाईवे पर चलने वाले खतरनाक केमिकल और ज्वलनशील पदार्थों के परिवहन के दौरान बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियों और ड्राइवरों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि जरा सी चूक किसी बड़े नरसंहार का रूप ले सकती थी।
ड्राइवर को आई झपकी बनी हादसे की वजह, शिकोहाबाद-मैनपुरी मार्ग पर हुआ भयानक वाकया
प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस विभाग से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार, यह पूरी दुर्घटना मंगलवार की सुबह तड़के प्रकाश में आई जब मथुरा रिफाइनरी से लगभग 18 टन एलपीजी गैस भरकर यह कैप्सूल टैंकर सोमवार की रात को नेपाल के लिए रवाना हुआ था। बताया जा रहा है कि जब यह टैंकर मैनपुरी जिले के दन्नाहार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले शिकोहाबाद-मैनपुरी मार्ग पर हिमायूंपुर गांव के निकट से गुजर रहा था, तब चालक को अचानक गहरी झपकी आ गई। झपकी आने के कारण ड्राइवर का भारी-भरकम वाहन से नियंत्रण पूरी तरह छूट गया और तेज रफ्तार टैंकर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे की पटरियों को चीरता हुआ खेत में जा पलटा। रातभर की लंबी ड्राइविंग और लगातार सफर करने के कारण ड्राइवरों को लगने वाली थकान अक्सर इस तरह की अनहोनी का सबब बनती है, और इस मामले में भी ड्राइवर की एक पल की सुस्ती सैकड़ों लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी। गनीमत यह रही कि टैंकर पलटने के तुरंत बाद कोई अन्य बड़ा वाहन उसकी चपेट में नहीं आया, अन्यथा परिणाम और भी अधिक भयानक हो सकते थे।
गैस रिसाव की सूचना मिलते ही प्रशासन में मचा हड़कंप, पुलिस और फायर ब्रिगेड ने संभाला मोर्चा
जैसे ही टैंकर के पलटने और उससे गैस का रिसाव होने की सूचना स्थानीय ग्रामीणों को मिली, पूरे इलाके में दहशत फैल गई और लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। तुरंत इसकी सूचना थाना पुलिस और दमकल विभाग को दी गई, जिसके बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पुलिस बल तथा फायर टेंडर मौके पर पहुंच गए। गैस अत्यधिक ज्वलनशील होने के कारण आग लगने का बहुत बड़ा खतरा मंडरा रहा था, जिसे भांपते हुए पुलिस अधिकारियों ने तुरंत सूझबूझ का परिचय देते हुए मुख्य मार्ग पर यातायात को दोनों तरफ से रोक दिया और एक किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह सील कर दिया। दमकल कर्मियों ने लगातार पानी की बौछारें करके गैस के प्रभाव को कम करने और किसी भी संभावित चिंगारी को फैलने से रोकने के लिए मोर्चा संभाल लिया। रिफाइनरी के तकनीकी विशेषज्ञों को भी तुरंत इस घटना की सूचना दे दी गई ताकि क्षतिग्रस्त वाल्व को सुरक्षित तरीके से बंद किया जा सके और टैंकर को क्रेन की मदद से बाहर निकालकर बड़े खतरे को पूरी तरह टाला जा सके।
हाईवे पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी और भविष्य के लिए गंभीर प्रशासनिक सबक
मैनपुरी की इस घटना ने एक बार फिर इस बात पर रोशनी डाली है कि खतरनाक गैस और पेट्रोलियम पदार्थों को ढोने वाले भारी वाहनों के संचालन में किस हद तक लापरवाही बरती जाती है। नियमों के अनुसार लंबी दूरी तय करने वाले ऐसे टैंकरों में दो चालकों की ड्यूटी होनी चाहिए ताकि एक के थकने पर दूसरा वाहन संभाल सके, लेकिन अक्सर ट्रांसपोर्ट कंपनियां लागत बचाने के चक्कर में एक ही ड्राइवर से लगातार कई-कई घंटे गाड़ी चलवाती हैं। जिला प्रशासन अब इस दुर्घटना के बाद कड़े कदम उठाने की तैयारी कर रहा है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि ऐसे वाहनों की गति और उनके चालकों के विश्राम पर पैनी नजर रखी जाए। गनीमत यह रही कि इस हादसे में समय रहते राहत और बचाव कार्य शुरू हो गया, जिससे किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह घटना प्रशासन, ट्रांसपोर्ट मालिकों और वाहन चालकों के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।



