UP Rain Alert: 18 अगस्त को 23 से अधिक जिलों में बहुत भारी बारिश और वज्रपात का ऑरेंज अलर्ट, घर से निकलने से पहले जान लें मौसम विभाग की चेतावनी


उत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर अपने रौद्र रूप में आ चुका है और राज्य के अधिकांश जनपदों में मूसलाधार बारिश का सिलसिला तेज हो गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंचलिक मौसम केंद्र, लखनऊ ने 18 अगस्त के लिए प्रदेश के 23 से अधिक जिलों में गरज-चमक के साथ अत्यधिक भारी बारिश, तेज झोंकेदार हवाओं और आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने का गंभीर ऑरेंज व यलो अलर्ट जारी किया है। राजधानी लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, बरेली, मुरादाबाद और बुंदेलखंड के इलाकों में काले घने बादलों का डेरा है और पिछले 24 घंटों से हो रही अनवरत बारिश के कारण कई शहरों में सड़कें जलमग्न हो चुकी हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने आम जनता और विशेष रूप से ग्रामीण व निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने की सख्त हिदायत दी है।
मौसम विभाग का ऑरेंज और यलो अलर्ट: इन 23 से अधिक जिलों में होगी मूसलाधार बारिश
मौसम केंद्र लखनऊ द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, वायुमंडलीय परिस्थितियों के चलते प्रदेश के मध्य, तराई, रुहेलखंड और बुंदेलखंड के जिलों में बारिश की तीव्रता सबसे ज्यादा रहने वाली है। अत्यधिक भारी बारिश के लिए संवेदनशील माने गए 23 से अधिक प्रमुख जनपदों में प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
जिन जिलों में बहुत भारी बारिश (Very Heavy Rainfall) का ऑरेंज अलर्ट प्रभावी है, उनमें बांदा, चित्रकूट, कौशाम्बी, प्रयागराज, फतेहपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं शामिल हैं। इन जिलों में 24 घंटे के भीतर 100 मिमी से 150 मिमी तक भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है।
इसके साथ ही राजधानी लखनऊ, उन्नाव, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, बस्ती, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, सहारनपुर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, इटावा, औरैया और झांसी समेत करीब 30 जनपदों में मध्यम से भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है।
चक्रवाती परिसंचरण और मानसूनी ट्रफ: क्यों अचानक बदला यूपी के मौसम का मिजाज?
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में इस समय तीन अलग-अलग मौसमी प्रणालियां एक साथ सक्रिय हो चुकी हैं, जिसके चलते पूरे राज्य में मूसलाधार बारिश का एक विशाल वेदर सिस्टम बन गया है।
पहला बड़ा कारण है कि वायुमंडल के निचले क्षोभमंडल (Lower Troposphere) में पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तरी हरियाणा के ऊपर अलग-अलग चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र (Cyclonic Circulation) बना हुआ है। दूसरा महत्वपूर्ण कारक मानसूनी ट्रफ लाइन (Monsoon Trough) का अपनी सामान्य स्थिति से खिसककर उत्तर में हिमालय की तराई की ओर शिफ्ट होना है, जो फिरोजपुर, मुजफ्फरनगर, गोरखपुर से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक गुजर रही है। इसके अतिरिक्त, उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी और ओडिशा तट के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) से लगातार नम मानसूनी हवाएं मैदानी इलाकों में तेजी से प्रवेश कर रही हैं। इन सभी प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव के कारण बादलों का घनत्व बहुत बढ़ गया है, जिससे 22-23 अगस्त तक रुक-रुक कर भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।
आकाशीय बिजली (वज्रपात) का जानलेवा खतरा: 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
बारिश के साथ-साथ इस मानसूनी चक्र में सबसे बड़ा जानलेवा खतरा आकाशीय बिजली और मेघगर्जन का बना हुआ है। पिछले 48 घंटों में राज्य के कई हिस्सों, विशेषकर प्रयागराज और कन्नौज जनपदों में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से जनहानि की दुखद घटनाएं सामने आई हैं।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि बादलों के घर्षण के कारण खुले मैदानों, खेतों और जलस्रोतों के पास बिजली गिरने की संभावना अत्यधिक है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज गति से झोंकेदार हवाएं चलने का पूर्वानुमान है, जिससे कमजोर पुराने मकानों, होर्डिंग्स, टिन शेड और पेड़ की डालियों के टूटने का खतरा रहेगा। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और चरवाहों को खराब मौसम में ऊंचे पेड़ों के नीचे खड़े न होने या बिजली के खंभों के पास न जाने की स्पष्ट एडवाइजरी जारी की है।
निचले इलाकों में जलभराव और नदियों का जलस्तर: शहरों से गांवों तक जनजीवन प्रभावित
लगातार हो रही मानसूनी बारिश से जहां एक ओर भीषण गर्मी और उमस से आम जनता को बड़ी राहत मिली है और अधिकतम तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है, वहीं दूसरी ओर शहरी और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर इसका भारी दबाव देखने को मिल रहा है।
प्रयागराज, कानपुर, वाराणसी, लखनऊ और बरेली के निचले रिहायशी इलाकों में पानी भर जाने से यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सोनभद्र, बरेली, फतेहपुर और महोबा में नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं, जिससे कई ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है। गंगा, यमुना, घाघरा, सरयू और बेतवा नदियों के जलस्तर में भी तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। जिला प्रशासनों ने नगर निगमों और आपदा राहत टीमों को जल निकासी पंप तैयार रखने, कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे सक्रिय रखने और जलभराव वाले क्षेत्रों से तुरंत पानी निकालने के कड़े निर्देश दिए हैं।
किसानों के लिए राहत और आफत का मिलाजुला संकेत
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अगस्त के मध्य में हो रही यह झमाझम बारिश धान की रोपाई और तिलहन फसलों के लिए वरदान साबित हो रही है, विशेष रूप से उन इलाकों में जहां सूखे जैसी स्थिति बनी हुई थी। भूमिगत जल स्तर में सुधार होगा और फसलों को पर्याप्त नमी मिलेगी।
हालांकि, अत्यधिक मूसलाधार बारिश और खेतों में लंबे समय तक जलभराव होने से दलहन, तिल, सब्जी की अगेती फसलों और मक्के को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई गई है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपने खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी का समुचित प्रबंध करें और बारिश व तेज हवाओं के दौरान फसलों में किसी भी प्रकार के कीटनाशक या रासायनिक उर्वरक का छिड़काव न करें।
खराब मौसम में घर से बाहर निकलते समय क्या करें और क्या न करें? जरूरी गाइडलाइन
मौसम विभाग और राज्य प्रशासन ने नागरिकों की व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानियों की चेकलिस्ट जारी की है:
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यात्रा से पहले मौसम का हाल जांचें: यदि बहुत जरूरी न हो तो लंबी दूरी की यात्रा या भारी बारिश वाले क्षेत्रों में आवागमन टालें। निकलने से पहले जीपीएस और स्थानीय ट्रैफिक अपडेट जरूर देखें।
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आकाशीय बिजली चमकने पर सुरक्षित रहें: बारिश के दौरान कभी भी खुले मैदान में खड़े न रहें और बड़े पेड़ों, मोबाइल टावर या लोहे के खंभों के नीचे शरण न लें। कंक्रीट की पक्की इमारत के भीतर रहना सबसे सुरक्षित है।
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जलभराव वाले रास्तों पर सावधानी: पानी से भरी सड़कों पर गाड़ी न दौड़ाएं क्योंकि खुले मैनहोल, गड्ढों या डूबे हुए डिवाइडर का पता नहीं चल पाता। दोपहिया वाहन चालकों को फिसलन भरी सड़कों पर गति नियंत्रित रखनी चाहिए।
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बिजली के उपकरणों और तारों से दूरी: टूटे हुए बिजली के तारों, खंभों और ट्रांसफार्मर से कम से कम 10 मीटर की दूरी बनाए रखें। घर के भीतर भी हाई-वोल्टेज इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्लग बिजली कड़कने के दौरान निकाल दें।
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आपातकालीन नंबर साथ रखें: स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम (1077/112) और एम्बुलेंस (108) के हेल्पलाइन नंबर अपने मोबाइल में सुरक्षित रखें।



