UP Weather Alert: उत्तर प्रदेश में बिगड़ने वाला है मौसम का मिजाज! 7 अगस्त तक 40 से ज्यादा जिलों में मूसलाधार बारिश


विशेष मौसम रिपोर्टर, लखनऊ: भीषण गर्मी और चिपचिपी उमस से जूझ रहे उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बड़ा और महत्वपूर्ण अलर्ट जारी किया है। प्रदेश में मानसून का नया और शक्तिशाली चक्र सक्रिय हो गया है, जिसके प्रभाव से राज्य के अधिकांश हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक बादलों की मूसलाधार घेराबंदी देखने को मिलेगी। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 7 अगस्त तक पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में कहीं हल्की तो कहीं बेहद भारी वर्षा (Heavy to Very Heavy Rainfall) दर्ज की जा सकती है। इसके साथ ही 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने का भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
मौसम केंद्र लखनऊ के पूर्वानुमान के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी से भरी हवाएं और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बनी मानसूनी ट्रफ लाइन (Monsoon Trough) की वजह से उत्तर प्रदेश का वायुमंडलीय तंत्र काफी मजबूत हो चुका है। इस बदलाव के चलते राज्य के शहरी और ग्रामीण इलाकों में दिन और रात के तापमान में अचानक 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे मौसम सुहावना तो होगा, लेकिन निचले इलाकों में जलभराव (Waterlogging) और नदियों के जलस्तर में वृद्धि का संकट भी गहरा सकता है।
पूर्वांचल से लेकर पश्चिमांचल तक: किन-किन जिलों में होगी मूसलाधार बारिश?
मौसम विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में मानसूनी बारिश का प्रभाव सबसे अधिक देखने को मिलेगा। पूर्वांचल के वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, महाराजगंज, बस्ती, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और सीतापुर में भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है।
वहीं, मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में भी मानसूनी गतिविधियां चरम पर रहेंगी। राज्य की राजधानी लखनऊ, कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव, रायबरेली, अमेठी, अयोध्या, प्रयागराज, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, बरेली, शाहजहांपुर, मुरादाबाद, रामपुर, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद, आगरा, मथुरा और बुंदेलखंड के झांसी, बांदा, हमीरपुर, महोबा तथा ललितपुर में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का अनुमान है। इन इलाकों में अगले 72 घंटों के दौरान रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई गई है।
नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी और जलभराव का संकट: अलर्ट पर प्रशासन
उत्तर प्रदेश के पहाड़ी राज्यों (उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश) से सटे होने और वहां हो रही भारी बारिश के कारण मैदानी इलाकों की प्रमुख नदियों के जलस्तर पर गहरा असर पड़ने लगा है। गंगा, यमुना, घाघरा (सरयू), राप्ती, रोहिन और गंडक नदियों के कैचमेंट एरिया में लगातार हो रही बरसात से कई स्थानों पर जलस्तर में उछाल दर्ज किया गया है।
गोरखपुर, महाराजगंज, बलरामपुर और श्रावस्ती जैसे तराई वाले जिलों में नदी तटबंधों और निचले गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमों को संवेदनशील जिलों में हाई अलर्ट पर रखा गया है। इसके अतिरिक्त, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और आगरा जैसे बड़े महानगरों में नगर निगम प्रशासन को नालों की सफाई और पंपिंग स्टेशनों को चालू रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं, ताकि शहरी जलभराव के कारण यातायात बाधित न हो।
मौसम वैज्ञानिकों की चेतावनी: वज्रपात और तेज हवाओं से कैसे बचें?
मौसम विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के इस दौर में बारिश से ज्यादा खतरा आकाशीय बिजली (Lightning) और अचानक चलने वाली आंधी-तूफान से है। ग्रामीण क्षेत्रों में खुले खेतों में काम करने वाले किसानों और पशुपालकों के लिए मौसम विभाग ने विशेष एडवाइजरी जारी की है:
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खुले स्थानों पर न रुकें: जब भी आसमान में काले बादल छाएं और बिजली कड़कने की आवाज आए, तो तुरंत किसी पक्के ढांचे या घर के अंदर शरण लें।
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पेड़ों और खंभों से दूर रहें: बारिश के दौरान किसी बड़े पेड़, लोहे के खंभे, ट्रांसफॉर्मर या मोबाइल टावर के नीचे खड़े होने से पूरी तरह बचें।
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बिजली के उपकरणों का उपयोग न करें: घर के भीतर रहने पर टीवी, फ्रिज और अन्य संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्लग निकाल दें और लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल करने से बचें।
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वाहन चालकों के लिए हिदायत: जलभराव वाली सड़कों पर वाहन चलाने से बचें और भारी बारिश के दौरान गाड़ियों की रफ्तार धीमी रखें ताकि हादसों से बचा जा सके।
किसानों के लिए राहत और आफत दोनों: फसलों पर क्या पड़ेगा असर?
उत्तर प्रदेश के कृषि क्षेत्र के लिए मानसून की यह मूसलाधार बारिश काफी हद तक वरदान साबित हो रही है। लंबे समय से सिंचाई की राह देख रहे धान (चावल), मक्का, ज्वार, बाजरा, गन्ना और तिलहनी फसलों को इस बारिश से जबरदस्त संजीवनी मिली है। विशेष रूप से धान की रोपाई कर चुके किसानों के लिए यह मानसूनी फव्वारे बेहद लाभदायक साबित होंगे, जिससे भूजल पर निर्भरता घटेगी।
हालांकि, जिन इलाकों में बारिश के साथ तेज हवाएं चलेंगी या जहां पानी का अत्यधिक भराव हो जाएगा, वहां हरी सब्जियों और दलहनी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई गई है। कृषि विज्ञान केंद्रों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी (Drainage System) का समुचित प्रबंध रखें ताकि फसलों की जड़ें न गलें।
मौसम विभाग ने साफ कर दिया है कि 7 अगस्त तक पूरे प्रदेश में मानसूनी बादल पूरी रंगत में रहेंगे। ऐसे में आम जनता को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले अपने जिले के ताजा मौसम अपडेट की जानकारी अवश्य रखें और मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करें।



