ट्रंप की 100% टैरिफ की धमकी दरकिनार! भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदने में बनाया नया रिकॉर्ड

विशेष ऊर्जा एवं अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टर, नई दिल्ली: वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) में इस समय भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और व्यावहारिक आर्थिक कूटनीति का दबदबा साफ देखने को मिल रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिकी डॉलर के इस्तेमाल को कम करने वाले देशों और रणनीतिक व्यापारिक स्वायत्तता अपनाने वाले मुल्कों पर 100 प्रतिशत टैरिफ (100% Tariff Threat) लगाने की बार-बार दी जा रही चेतावनियों के बावजूद, भारत ने अपने रुख में रत्ती भर भी नरमी नहीं दिखाई है। भारत ने रूस से डिस्काउंटेड दरों पर कच्चा तेल (Russian Crude Oil) खरीदने के मामले में पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। इसके साथ ही भारत ने अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को भारतीय एलपीजी (LPG) और एलएनजी (LNG) बाजार में बड़ी हिस्सेदारी का अवसर देकर वाशिंगटन के साथ अपने व्यापारिक संबंधों में गजब का कूटनीतिक संतुलन (Diplomatic Balance) भी साध लिया है।

अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी विश्लेषकों का मानना है कि भारत का यह कदम "इंडिया फर्स्ट" (India First) नीति का सबसे बड़ा और सफल उदाहरण है। एक तरफ जहां भारत अपनी 1.4 अरब की आबादी को सस्ती और निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदारों में बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ वह अमेरिका से प्राकृतिक गैस और एलपीजी का आयात बढ़ाकर अमेरिकी व्यापार घाटे को संतुलित करने की राह पर आगे बढ़ रहा है।

रूसी तेल से ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिकी LPG से संतुलन: भारत की 'मास्टरस्ट्रोक' डिप्लोमेसी

पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों (Western Sanctions) और मूल्य सीमा (Price Cap) के बाद से ही भारत के सरकारी और निजी तेल रिफाइनरों (जैसे IOCL, BPCL, Reliance Industries और Nayara Energy) ने रूसी कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ाया है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कुल कच्चे तेल में रूसी तेल की हिस्सेदारी लगभग 35 से 40 प्रतिशत के बीच बनी हुई है। ट्रंप प्रशासन की संभावित व्यापारिक पाबंदियों और सख्त बयानों के बावजूद भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) और केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत किसी भी तीसरे देश के दबाव में अपनी ऊर्जा प्राथमिकताओं से समझौता नहीं करेगा।

हालांकि, कूटनीतिक टकराव से बचने और अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी (US-India Strategic Partnership) को मजबूती देने के लिए भारत ने एक बेहद चतुर व्यावसायिक कार्ड खेला है। भारत अपनी बढ़ती घरेलू रसोई गैस (LPG) की खपत को पूरा करने के लिए अमेरिका से एलपीजी और एलएनजी के आयात में भारी बढ़ोतरी कर रहा है। अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी निर्यातकों में से एक है और भारतीय तेल विपणन कंपनियां अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र से दीर्घकालिक अनुबंध (Long-Term Energy Contracts) कर रही हैं। इससे अमेरिकी कंपनियों को एक विशाल और स्थिर भारतीय बाजार मिल रहा है, जो ट्रंप की "अमेरिका फर्स्ट" और अमेरिकी निर्यात बढ़ाने की नीति के काफी अनुकूल बैठता है।

वैश्विक बाजार में भारत की भूमिका: अगर भारत रूसी तेल न खरीदे तो मचेगा हाहाकार

वाशिंगटन और यूरोपीय संघ (EU) के रणनीतिकार भी पर्दे के पीछे इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि अगर भारत और चीन जैसे बड़े उपभोक्ता देश रूसी तेल खरीदना पूरी तरह बंद कर दें, तो वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति का एक बहुत बड़ा संकट पैदा हो जाएगा। ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) के दाम रातों-रात $120 से $150 प्रति बैरल के पार जा सकते हैं, जिससे अमेरिका और यूरोप सहित पूरी दुनिया में भयानक महंगाई (Global Inflation) फैल जाएगी।

यही कारण है कि अमेरिकी अधिकारी सार्वजनिक बयानों में भारत द्वारा रूसी तेल खरीद पर सवाल भले ही उठाते हों, लेकिन वे यह भी स्वीकार करते हैं कि भारत द्वारा वैश्विक बाजार से तेल का उठाव कम न करने के कारण ही दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नियंत्रण में बनी हुई हैं। भारत रूसी तेल को रिफाइन करके यूरोप और अन्य पश्चिमी देशों को पेट्रोलियम उत्पाद (Diesel & Jet Fuel) निर्यात भी कर रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति चक्र बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चल रहा है।

भारत का भविष्य का रोडमैप: ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण (Energy Diversification)

भारत सरकार की वर्तमान नीति यह संकेत देती है कि देश किसी भी एक देश या क्षेत्र पर अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहता। भारत एक तरफ रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर अपने मुद्रास्फीति (CPI Inflation) और चालू खाता घाटे (CAD) को नियंत्रित कर रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिका, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और इराक जैसे पारंपरिक व नए साझेदारों से एलपीजी, एलएनजी और कच्चे तेल का संतुलित आयात कर रहा है।

ट्रंप की टैरिफ चेतावनियों के बीच भारत द्वारा उठाया गया यह संतुलित कदम यह साबित करता है कि आज का भारत वैश्विक मंच पर अपने आर्थिक और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है। अमेरिका को एलपीजी बाजार में नया व्यापारिक अवसर देना और रूस से अपनी शर्तों पर तेल खरीदना भारत की परिपक्व और दूरदर्शी कूटनीति का प्रतीक बन चुका है।

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