ईरान युद्ध के साये में LPG सिलेंडर के नए नियम बिना DAC कोड के नहीं मिलेगी डिलीवरी, जानें क्या है यह नई व्यवस्था और क्यों है जरूरी

News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इजरायल तनाव और युद्ध की आहट के बीच भारत सरकार ने रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति और वितरण प्रणाली को लेकर सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंकाओं के बीच घरेलू बाजार में कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकने के लिए ‘DAC’ (Delivery Authentication Code) सिस्टम को अनिवार्य कर दिया गया है। अब बिना इस डिजिटल कोड के आपके घर सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो पाएगी।क्या है DAC नंबर और यह कैसे काम करता है?DAC का मतलब है ‘डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड’। यह एक तरह का वन-टाइम पासवर्ड (OTP) है जो सिलेंडर की बुकिंग करने पर आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या उस डिवाइस पर भेजा जाता है जिससे आपने बुकिंग की है। 2026 के नए नियमों के तहत, यह कोड अब सिर्फ SMS तक सीमित नहीं है; यदि आपने व्हाट्सऐप या मोबाइल ऐप से बुकिंग की है, तो कोड भी उसी प्लेटफॉर्म पर प्राप्त होगा। जब डिलीवरी बॉय आपके घर सिलेंडर लेकर आएगा, तो आपको उसे यह DAC नंबर बताना होगा। मशीन में कोड मैच होने के बाद ही डिलीवरी को ‘सफल’ माना जाएगा।युद्ध के हालात और नए सख्त नियमईरान युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव बढ़ने से गैस की कीमतों और उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है। इसे देखते हुए सरकार ने कुछ कड़े कदम उठाए हैं:बुकिंग अंतराल: अब शहरी क्षेत्रों में आप 25 दिन से पहले और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन से पहले दूसरा सिलेंडर बुक नहीं कर पाएंगे।कालाबाजारी पर लगाम: DAC सिस्टम लागू होने से अब कोई भी डिस्ट्रीब्यूटर आपकी जानकारी के बिना आपके नाम पर सिलेंडर ब्लैक में नहीं बेच पाएगा।e-KYC अनिवार्य: बिना बायोमेट्रिक या आधार लिंक ई-केवाईसी के सब्सिडी और बुकिंग की सुविधा रोकने के निर्देश दिए गए हैं।क्यों महत्वपूर्ण है यह नई व्यवस्था?इस प्रणाली का सबसे बड़ा फायदा पारदर्शिता है। पहले कई बार शिकायतें आती थीं कि ग्राहक को पता भी नहीं चलता था और उनके नाम पर सिलेंडर डिलीवर दिखाकर उसे बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता था। अब चूंकि कोड सीधे ग्राहक के पास आता है, इसलिए बिना आपकी अनुमति के सिलेंडर का ‘कागज’ पर ट्रांजैक्शन संभव नहीं है। वर्तमान वैश्विक संकट के समय में गैस की एक-एक बूंद की बचत और सही वितरण सुनिश्चित करने के लिए यह ‘डिजिटल किला’ बेहद अहम साबित हो रहा है।

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