4 सितंबर को लॉन्च होगा इसरो का नया बाहुबली मिशन, इस तरह चीन-पाकिस्तान बॉर्डर पर तैनात होगी भारत की ‘चील वाली आंख

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) एक बार फिर अंतरिक्ष की दुनिया में इतिहास रचने के लिए पूरी तरह से तैयार है। देश की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो का सबसे भरोसेमंद और शक्तिशाली रॉकेट जीएसएलवी-एफ17 (GSLV-F17) आगामी 4 सितंबर को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से आसमान की ओर उड़ान भरने के लिए बिल्कुल तैयार है। यह मिशन केवल एक आम सैटेलाइट लॉन्चिंग नहीं है, बल्कि यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा और अंतरिक्ष कूटनीति के लिहाज से एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने वाला है। इस मिशन के जरिए अंतरिक्ष में एक ऐसा अत्याधुनिक सर्विलांस सैटेलाइट स्थापित किया जाएगा, जिसे रक्षा गलियारों में भारत की 'चील वाली आंख' कहा जा रहा है। इस सैटेलाइट के अंतरिक्ष में स्थापित होते ही भारत की सामरिक ताकत कई गुना बढ़ जाएगी और सीमा पार से होने वाली हर एक गतिविधि पर पलक झपकते ही पैनी नजर रखी जा सकेगी। इस हाई-प्रोफाइल मिशन से जुड़ी हर एक बड़ी और अहम जानकारी को आइए विस्तार से और गहराई के साथ समझते हैं।
क्या है ISRO का GSLV-F17 मिशन और क्यों कहा जा रहा है इसे भारत की 'चील वाली आंख'
इसरो का जीएसएलवी-एफ17 मिशन देश की अंतरिक्ष तकनीक और रक्षा तैयारियों का एक बेजोड़ संगम है। इस मिशन के तहत इसरो एक बहुत ही एडवांस्ड अर्थ ऑब्जरवेशन और इमेजिनेशन सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित करेगा। इस सैटेलाइट की सबसे बड़ी खासियत इसकी हाई-रेजोल्यूशन इमेजिंग क्षमता और अत्याधुनिक सेंसर तकनीक है, जो अंतरिक्ष से ही जमीन के चप्पा-चप्पा हिस्से की एकदम साफ और स्पष्ट तस्वीरें लेने में पूरी तरह सक्षम है। रक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस सैटेलाइट के जरिए भारतीय सेनाओं को रियल-टाइम इंटेलिजेंस डेटा मिलेगा। यही कारण है कि इसे अनौपचारिक रूप से भारत की 'चील वाली आंख' का नाम दिया गया है, क्योंकि जिस तरह एक चील आसमान से बहुत ऊंचाई पर उड़कर अपनी शिकार पर पैनी नजर रखती है, ठीक उसी प्रकार यह सैटेलाइट अंतरिक्ष में रहकर देश की सीमाओं की सुरक्षा और निगरानी करेगा।
चीन और पाकिस्तान की हर नापाक हरकत पर अंतरिक्ष से होगी कड़ी निगरानी
भारत की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि उसे अपनी दोनों तरफ यानी पश्चिम में पाकिस्तान और उत्तर-पूर्व में चीन जैसी सीमाओं पर हमेशा अत्यधिक सतर्कता बरतनी पड़ती है। सीमावर्ती इलाकों में लगातार बदलती रणनीतिक परिस्थितियों और घुसपैठ या अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए सटीक और समय पर जानकारी होना सबसे बड़ा हथियार होता है। जीसएलवी-एफ17 मिशन के तहत अंतरिक्ष में तैनात होने वाला यह नया सर्विलांस सैटेलाइट चीन और पाकिस्तान की हर एक हरकत का कच्चा चिट्ठा पलभर में तैयार कर लेगा। पहाड़ी इलाकों, बर्फीली चोटियों और घने जंगलों से घिरे बॉर्डर क्षेत्रों में भी यह उपग्रह बिना मौसम की बाधा के स्पष्ट तस्वीरें और डेटा भेजने में सक्षम होगा। इसके सक्रिय होने से भारतीय सेना के रणनीतिक योजनाकारों को दुश्मन के हर गुप्त सैन्य जमावड़े, एयरबेस गतिविधियों और बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण की पुख्ता जानकारी पहले ही मिल जाएगी, जिससे देश की सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक अभेद्य हो जाएगी।
स्वदेशी क्रायोजेनिक तकनीक की ताकत और इसरो का बढ़ता वैश्विक दबदबा
इसरो का जीएसएलवी (GSLV) रॉकेट अपने स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। भारी-भरकम उपग्रहों को अंतरिक्ष की उच्च कक्षाओं में स्थापित करने की क्षमता रखने वाला यह रॉकेट भारत की आत्मनिर्भरता का एक सबसे बड़ा प्रमाण है। जब 4 सितंबर को जीएसएलवी-एफ17 निर्धारित समय पर गगनचुंबी उड़ान भरेगा, तो यह एक बार फिर साबित कर देगा कि भारत अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया के चुनिंदा महाशक्तियों की कतार में मजबूती से खड़ा है। कम खर्च में उच्च गुणवत्ता वाले और बेहद जटिल अंतरिक्ष मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा करने की इसरो की कला ने वैश्विक स्तर पर भारत का डंका बजा दिया है। इस मिशन की सफलता न केवल देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा को अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान करेगी, बल्कि भविष्य के अन्य सैन्य और वैज्ञानिक अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी रास्ते पूरी तरह से खोल देगी।



