10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों को जीवनदान, IIT दिल्ली की इस चमत्कारिक मशीन से 90% घटेगा प्रदूषण, कीमत भी बेहद कम

देशभर के महानगरों और विशेष तौर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पुरानी डीजल गाड़ियों (Diesel Vehicles) के संचालन पर लगी पाबंदियों और कड़े नियमों के बीच वाहन चालकों और आम जनता के लिए एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (IIT Delhi) द्वारा विकसित की गई एक विशेष और चमत्कारी मशीन को आधिकारिक तौर पर हरी झंडी दिखा दी है, जो पुरानी डीजल गाड़ियों से निकलने वाले खतरनाक धुएं और प्रदूषण को सीधे तौर पर 90 प्रतिशत तक कम करने की ताकत रखती है। इस अभूतपूर्व तकनीकी खोज के सामने आने के बाद अब यह उम्मीद जग गई है कि वाहन मालिकों को अपनी पुरानी डीजल गाड़ियों को जबरन कबाड़ (Scrap) में नहीं देना पड़ेगा और वे तय समयसीमा के बाद भी वैध तरीके से अपनी गाड़ियों का सड़कों पर इस्तेमाल कर सकेंगे, जिससे मध्यम वर्ग और ट्रांसपोर्टरों की जेब पर पड़ने वाला भारी-भरकम आर्थिक बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा।
क्या है IIT दिल्ली की रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस (RECD) और इसके फायदे
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (IIT Delhi) के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लंबे अनुसंधान के बाद तैयार की गई इस खास तकनीक का आधिकारिक नाम रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस (Retrofit Emission Control Device – RECD) रखा गया है, जो किसी भी पुरानी डीजल इंजन वाली गाड़ी में आसानी से फिट की जा सकती है। यह उन्नत डिवाइस गाड़ी के साइलेंसर से निकलने वाले धुएं के साथ उड़ने वाले जहरीले पार्टिकुलेट मैटर (PM) को लगभग 90 फीसदी तक मजबूती से नियंत्रित कर लेती है, इसके साथ ही यह हवा में घुलने वाली खतरनाक नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) गैस की मात्रा को भी करीब 60 फीसदी तक घटा देती है। हाल ही में सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने खुद इस क्रांतिकारी तकनीक की सफलता की जानकारी साझा करते हुए बताया कि यदि किसी पुरानी बीएस-III (BS-III) या बीएस-IV (BS-IV) मानक वाली डीजल गाड़ी में इस डिवाइस को सफलतापूर्वक इंस्टॉल कर दिया जाए, तो वह गाड़ी आधुनिक बीएस-VI (BS-VI) मानकों के स्तर पर प्रदूषण मुक्त होकर काम करने लगेगी।
कमर्शियल गाड़ी मालिकों को मिलेगी राहत, कबाड़ में भेजने से मुक्ति
देश के वाहन चालकों, विशेष रूप से कमर्शियल वाहन (Commercial Vehicles) मालिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह रही है कि 10 या 15 साल की अवधि पूरी होने के बाद उन्हें अपनी जीवनभर की कमाई से खरीदी गई गाड़ियों को मजबूरी में स्क्रैप करना पड़ता था, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति बुरी तरह प्रभावित होती थी। इस गंभीर समस्या का जिक्र करते हुए नितिन गडकरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब पुरानी गाड़ियों के संचालन को लेकर जनता को बहुत बड़ी राहत दी जा सकेगी और हर गाड़ी को बिना सोचे-समझे कबाड़ में तब्दील करने की कोई आवश्यकता नहीं रह जाएगी क्योंकि नई कमर्शियल गाड़ी खरीदकर सड़क पर उतारना हर गरीब या मध्यम वर्गीय व्यक्ति के बस की बात नहीं होती है। इस डिवाइस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह तकनीकी रूप से बेहद उन्नत होने के बावजूद आम जनता की पहुंच में होगी और इसकी अनुमानित कीमत बाजार में केवल 4,000 से 5,000 रुपये के आसपास ही रहने की उम्मीद जताई जा रही है, जो नई गाड़ी खरीदने के मुकाबले ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड के तहत जल्द जारी होगा ड्राफ्ट नोटिफिकेशन
इस अभिनव तकनीक के व्यावसायिक इस्तेमाल और आम जनता तक इसकी सुलभ पहुंच को सुनिश्चित करने के लिए सरकार बहुत जल्द ही ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (Automotive Industry Standard 228) के तहत एक आधिकारिक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी करने जा रही है, जिसके बाद वाहन मालिक आसानी से अपने वाहनों में इसे लगवा सकेंगे। सूत्रों के अनुसार इस अत्याधुनिक डिवाइस का उपयोग केवल चार पहिया या भारी डीजल वाहनों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका इस्तेमाल डीजल से चलने वाले विभिन्न प्रकार के जनरेटर सेट (Diesel Generators) में भी प्रदूषण को रोकने के लिए प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। यदि यह तकनीकी पहल प्रायोगिक और व्यावहारिक धरातल पर भी पूरी तरह सफल साबित होती है, तो यह देश के पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वाहन मालिकों के लिए एक ऐतिहासिक और राहत भरी सौगात साबित होगी, जिससे प्रदूषण के स्तर में भारी कमी आएगी और मोबिलिटी भी बाधित नहीं होगी।
वाहन निर्माता कंपनियों के लिए स्क्रैपिंग और प्रोत्साहन नीति पर जोर
पुरानी गाड़ियों के प्रबंधन और वाहन उद्योग की未来 की रणनीतियों पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इससे पहले वाहन निर्माता कंपनियों से अपील की थी कि वे ग्राहकों को अपनी पुरानी गाड़ियां स्क्रैप करने के लिए प्रोत्साहित करने वास्ते प्रोत्साहन राशि (Incentive Amount) में बढ़ोतरी करें, क्योंकि इससे अंततः ऑटोमोबाइल सेक्टर की बिक्री में जबरदस्त उछाल आएगा और उत्पादन लागत में भी कमी दर्ज की जाएगी। सियाम (SIAM) के 66वें वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने वाहन कंपनियों को यह समझाया था कि सरकार की स्क्रैपिंग पॉलिसी किसी के लिए नुकसान का सौदा नहीं है बल्कि इससे कंपनियों की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और बाजार में नए वाहनों की मांग में भी बड़ा इजाफा होगा। इन तमाम दूरदर्शी नीतियों और आईआईटी दिल्ली जैसी संस्थाओं के नवाचारों के मेल से अब देश का परिवहन और ऑटोमोबाइल सेक्टर एक नए और हरित युग की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है, जिससे आम आदमी और पर्यावरण दोनों को ही सीधा लाभ मिलने की पूरी उम्मीद है।



