सौहार्द और भाईचारा बिगाड़ गया एक कथा का आयोजन !

-राजू दुबे

इटावा।  थाना क्षेत्र बकेवर के ग्राम दांदरपुर में 26 जून को अहीर रेजिमेंट के घेराव के बाद पूरा माहौल बदल गया l भागवत कथा प्रारम्भ होने के पूर्व ग्रामीणों में खुशी का माहौल था l लोगों में एक सप्ताह के धार्मिक आयोजन को लेकर काफी चर्चा थी l लेकिन होनी को कुछ और मंजूर था l कथा के प्रथम दो दिवस के बाद ऐसा तूफान आया जिसने गांव की ही नहीं पूरे देश की सामाजिक और राजनैतिक तस्वीर बदल के रख दी l जिस गांव की कोई खास पहचान न थी वह अब राजनेताओं के लिए राजनीति का केंद्र बन चुका है l यहाँ तक कि पूरे देश की मीडिया के खबरों का संसाधन बन गया l लेकिन गांव के निवासियों के लिए यह किसी अभिशाप से कम नहीं था l

वहीं ग्रामीणों का कहना है कि प्रकरण का प्रारम्भ कथा कहने आये कथावाचक मुकटमणि के अपनी जाति को छुपाकर ब्राह्मण बनने से हुआ l कथावाचक के एक झूठ ने पूरे देश में तूफान खड़ा कर दिया l कथावाचक के झूठ का पर्दाफाश होनें पर ग्रामीणों में गुस्सा भड़क गया l उनका कहना था कि कथा किसी भी समाज का व्यक्ति कह सकता है लेकिन समाज को धोखे में रखना गलत है l यदि आप यादव तो यादव बनकर कथा कहते कोई बुराई नहीं थी l

गुस्साए ग्रामीणों के बीच से कुछ लोगों द्वारा कथावाचक मुकटमणि और सहायक संत सिंह के साथ अभद्रता कर उनका वीडियो सोशल मीडिया पर प्रचलित कर दिया गया l जिसके बाद यादव समाज और समाजवादी पार्टी के लोगों में में आक्रोश पनप गया l सोशल मीडिया पर आरोप प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया l अहीर रेजिमेंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष गगन यादव ने 26 जून को बकेवर थाना को घेराव का आवाहन कर दिया l इस आवाहन से पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया लेकिन दांदरपुर गांव के निवासियों को अपने परिवार की सुरक्षा का भय सताने लगा l जिसका उन्हें डर था वही हुआ कि 26 जून को एक बड़ा जनसैलाब ग्राम दांदरपुर की ओर निकल पड़ा जिसे रोक पाने में पुलिस के पसीने छूट गये l

घटना के दो दिन बाद शनिवार को गांव का भ्रमण कर लोगों से बात की तो उन्होंने अपनी बदली दिन चर्या के बारे में बताया l

गांव निवासी संजीव तिवारी ने बताया कि इस घटना से गांव में दहशत का माहौल है l लोग अपने घरों से बाहर बहुत कम निकल रहे हैं साथ ही कैमरे के सामने आकर कोई बात नहीं कह रहे हैं l कुछ लोगों ने अपना परिचय न देते हुये अपनी बात को रखा कि यह घटना सामाजिक और संबैधानिक दोनों नजरिये से ठीक नहीं है यह इस गांव के भविष्य के लिए ठीक नहीं है l हमें प्रशासन पर पूरा भरोसा है कि अराजक तत्वों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जायेगी परन्तु जो दो समाज के वर्गों के बीच खाई पैदा हुई है इसे पाटने की जिम्मेदारी कौन लेगा l

पास खड़े एक युवक ने बताया कि इस विवाद के बाद बाद गांव के किसानों पर भी बड़ा प्रभाव पड़ा है l अपना कार्य छोड़कर घरों में बैठे हैं जरुरी कार्य होनें पर ही गांव से बाहर जाते हैं l बाजार से सब्जी लेने के लिए भी सोच समझकर जाना पड़ता है l बाहर नौकरी कर रहे लोग घर पर मौजूद हैं क्योंकि परिवार की सुरक्षा में कोई चूक नहीं करना चाहते हैं l

गांव के मोनू तिवारी बताया कि कथावाचकों के मामले को जाति विशेष से जोड़कर पार्टियों का राजनैतिक लाभ लेने का दांव है नहीं तो इसी गांव में 2021 में यादव जाति के कथावाचक से कथा का पाठ कराया गया था जिसमें व्यास गद्दी पर बैठे कथावाचक ने महिलाओं को पैर छूने से मना कर दिया था l

Related Articles

Back to top button