म्यूचुअल फंड में निवेश कर सिर्फ 3 साल में 25 प्रतिशत तक का शानदार और मोटा रिटर्न देने वाले चुनिंदा 4 फंड्स, क्या आपने कर दिए मिस

म्यूचुअल फंड्स निवेश की बढ़ती दुनिया में पिछले कुछ सालों के दौरान कई ऐसी स्कीमों ने निवेशकों को मालामाल किया है जिन्होंने कम समय में बड़ा वेल्थ जनरेट करके दिया है। अगर आपने सही समय पर सही कैटेगरी के फंड का चुनाव किया होगा तो निश्चित रूप से आपके पोर्टफोलियो में शानदार इजाफा देखने को मिला होगा। वित्तीय बाजार के जानकारों का मानना है कि सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी (SIP) के जरिए लॉन्ग टर्म में निवेश करने पर कंपाउंडिंग का असली फायदा मिलता है। आज के समय में देश के टियर-1 शहरों से लेकर टियर-2 और टियर-3 शहरों तक के निवेशकों के बीच म्यूचुअल फंड निवेश को लेकर अभूतपूर्व जागरूकता आई है। लोग ट्रेडिशनल सेविंग ऑप्शन जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट से आगे बढ़कर इक्विटी म्यूचुअल फंड्स की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं। विशेषकर पिछले तीन वर्षों के दौरान कुछ चुनिंदा फंड्स ने अपने दमदार प्रदर्शन के दम पर निवेशकों को सालाना आधार पर 25 प्रतिशत तक का मजबूत रिटर्न निकालकर दिया है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर वे कौन से चार बेहतरीन फंड्स हैं जिन्होंने बाजार के उतार-चढ़ाव को मात देते हुए निवेशकों को बंपर कमाई कराई है और क्या निवेशकों से ये शानदार विकल्प अनजाने में मिस हो गए हैं।
म्यूचुअल फंड्स में निवेश का बढ़ता क्रेज और रिटर्न का गणित
भारतीय वित्तीय बाजार में पिछले कुछ समय से जिस तरह की तेजी और स्थिरता देखने को मिली है, उसने निवेशकों का भरोसा और अधिक मजबूत किया है। जब हम पिछले तीन वर्षों के परफॉर्मेंस का आकलन करते हैं, तो यह साफ नजर आता है कि चुनिंदा म्यूचुअल फंड्स ने अपने पोर्टफोलियो में बेहतरीन क्वालिटी के शेयरों को जगह देकर शानदार मुनाफा कमाया है। जानकारों का कहना है कि किसी भी फंड की सफलता के पीछे उसके फंड मैनेजर की रणनीति और बाजार की नब्ज को पहचानने की कला का बहुत बड़ा हाथ होता है। जिन निवेशकों ने धैर्य के साथ हर महीने एसआईपी जारी रखी, उन्होंने बाजार की हर गिरावट का फायदा उठाया क्योंकि कम एनएवी (NAV) पर अधिक यूनिट्स मिलने से उनकी खरीद लागत औसत हो गई। इस पूरी प्रक्रिया को रुपी कॉस्ट एवरेजिंग कहा जाता है, जो निवेशकों को शॉर्ट टर्म के बाजार के झटकों से बचाती है और लॉन्ग टर्म में मोटा रिटर्न बनाने का मार्ग प्रशस्त करती है।
क्या आपने मिस कर दिए ये 4 दमदार फंड्स?
पिछले तीन साल के आंकड़ों पर अगर सरसरी नजर डाली जाए तो कुछ ऐसे विशिष्ट फंड्स सामने आते हैं जिन्होंने लगभग 25 प्रतिशत तक का सालाना रिटर्न देकर बाजार में तहलका मचा दिया है। हालांकि, कई बार निवेशकों को इस बात का मलाल रहता है कि वे सही समय पर इन योजनाओं में एंट्री क्यों नहीं ले पाए। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेश कभी भी पछतावे का विषय नहीं होना चाहिए बल्कि यह भविष्य की प्लानिंग का एक हिस्सा है। अगर आपने इन चार प्रमुख फंड्स के पिछले प्रदर्शन को मिस भी कर दिया है, तो भी निराश होने की जरूरत नहीं है क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था का स्ट्रक्चरल ग्रोथ स्टोरी अभी लंबी है। इन फंड्स ने मुख्य रूप से लार्ज कैप, मिड कैप और फ्लेक्सी कैप सेगमेंट में बेहतरीन कंपनियों के शेयरों का चुनाव करके अपनी परिसंपत्तियों यानी एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की है। निवेशकों को हमेशा अपने वित्तीय सलाहकार की मदद से अपनी जोखिम लेने की क्षमता यानी रिस्क एपेटाइट को ध्यान में रखते हुए ही आगे के कदम उठाने चाहिए।
एसआईपी और लंपसम निवेश में क्या है बेहतर विकल्प?
म्यूचुअल फंड्स में पैसा लगाने के लिए निवेशकों के सामने मुख्य रूप से दो रास्ते होते हैं, पहला एसआईपी और दूसरा एकमुश्त यानी लंपसम निवेश। जो लोग नौकरीपेशा हैं और जिनके पास हर महीने एक निश्चित आय आती है, उनके लिए एसआईपी सबसे अचूक और सुरक्षित जरिया माना जाता है। इसमें निवेशकों को एक साथ बड़ी रकम बाजार में झोंकने की जरूरत नहीं पड़ती है, बल्कि छोटी-छोटीचिप के माध्यम से वे अपनी बचत को निवेश में बदल देते हैं। इसके विपरीत, यदि किसी निवेशक के पास अचानक कहीं से बड़ा फंड आ जाता है और बाजार के वैल्यूएशन आकर्षक स्तर पर होते हैं, तो वह लंपसम निवेश का विकल्प चुन सकता है। हालांकि, वर्तमान बाजार के ऊंचे स्तरों को देखते हुए वित्तीय विशेषज्ञ ज्यादातर यही सलाह देते हैं कि चरणों में निवेश करना या एसआईपी रूट अपनाना ही सबसे समझदारी भरा कदम है, जिससे बाजार के करेक्शन का जोखिम कम हो जाता है।
भविष्य की वित्तीय प्लानिंग और एसेट एलोकेशन का महत्व
किसी भी निवेशक के लिए केवल पिछले रिटर्न को देखकर आंख मूंदकर निवेश करना खतरनाक साबित हो सकता है। सफल निवेश के लिए यह आवश्यक है कि आपका पोर्टफोलियो डायवर्सिफाइड हो यानी आपके पैसे अलग-अलग सेक्टर्स और एसेट क्लासेस में बंटे हों। यदि आप केवल एक ही तरह के फंड में सारा पैसा लगा देंगे, तो बाजार के किसी खास सेक्टर में गिरावट आने पर आपके पूरे पोर्टफोलियो पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए इक्विटी के साथ-साथ डेट फंड्स और हाइब्रिड फंड्स का एक संतुलित मिश्रण तैयार करना चाहिए। अपने वित्तीय लक्ष्यों जैसे बच्चों की उच्च शिक्षा, रिटायरमेंट की योजना या आशियाना खरीदने के सपने को ध्यान में रखते हुए ही निवेश की अवधि तय की जानी चाहिए। यदि आप अनुशासन के साथ नियमित निवेश जारी रखते हैं, तो आने वाले वर्षों में आपके द्वारा बनाई गई पूंजी आपके वित्तीय भविष्य को पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत कर देगी।



