जहां सड़क, वहां फुटपाथ… पैदल यात्रियों के हक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार को याद दिलाई जिम्मेदारी

देश के शहरी इलाकों में लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और पैदल चलने वाले यात्रियों (Pedestrians) की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने देश भर में बुनियादी ढांचे को लेकर टिप्पणी करते हुए स्पष्ट कहा है कि जहां भी सड़क है, वहां पैदल यात्रियों के चलने के लिए सुरक्षित फुटपाथ होना उनका मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को उसकी जिम्मेदारी की कड़ी याद दिलाई है और शहरी नियोजन (Urban Planning) में हो रही अनदेखी पर गहरी चिंता जताई है।

पैदल यात्रियों की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर शीर्ष अदालत की दो टूक

सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि देश के अधिकांश शहरों में सड़कों का निर्माण तो तेजी से किया जा रहा है, लेकिन पैदल चलने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा और सुविधाओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि सड़कों पर सिर्फ गाड़ियों का अधिकार नहीं है, बल्कि पैदल चलने वाले बुजुर्गों, बच्चों और आम नागरिकों के लिए सुरक्षित फुटपाथ मुहैया कराना प्रशासन और सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इस तरह की व्यवस्था के अभाव में हर साल हजारों लोग सड़क हादसों का शिकार होते हैं।

केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही तय करने के निर्देश

इस गंभीर मुद्दे पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह सभी राज्यों और शहरी निकायों के साथ मिलकर एक ठोस दिशा-निर्देश तैयार करे। कोर्ट ने कहा कि मास्टर प्लान के तहत बनने वाली हर नई सड़क और हाईवे के डिजाइन में पैदल यात्रियों के लिए अलग से रास्ते (Walkways) और सेफ क्रॉसिंग की व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि अतिक्रमण के कारण फुटपाथों पर जो अवैध कब्जे हो जाते हैं, उन्हें तुरंत हटाया जाए ताकि आम जनता को सुरक्षित आवागमन मिल सके।

शहरी विकास और आम नागरिकों के अधिकारों की नई उम्मीद

सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त आदेश के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में देश के सभी महानगरों और शहरों में ट्रैफिक व सड़क योजनाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। स्थानीय निकायों और नगर निगमों पर अब यह दबाव होगा कि वे सड़कों के किनारे खाली जमीनों और फुटपाथों से अतिक्रमण हटाकर उन्हें पैदल यात्रियों के लिए सुगम बनाएं। अदालत का यह ऐतिहासिक रुख न केवल सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देगा, बल्कि देश के शहरी ढांचे को आधुनिक और नागरिक-अनुकूल बनाने में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।

 

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