गवर्नर संजय मल्होत्रा के 10 बड़े ऐलान, रेपो रेट पर मिला बड़ा अपडेट और ईएमआई पर असर


भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की द्वि-मासिक मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक के महत्वपूर्ण नतीजों का ऐलान कर दिया गया है। वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितताओं और तमाम तरह के भू-राजनीतिक तनावों के बीच आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देश की अर्थव्यवस्था को लेकर कई बड़े और अहम ऐलान किए हैं। आइए जानते हैं गवर्नर संजय मल्होत्रा की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की 10 सबसे बड़ी बातें जो सीधे तौर पर आपकी जेब और देश के वित्तीय बाजार को प्रभावित करती हैं।
रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, ईएमआई जस की तस
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की है कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने आम सहमति से रेपो रेट को 5.25% पर ही बरकरार रखने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक के इस फैसले से लोन लेने वाले उन करोड़ों आम नागरिकों को बड़ी राहत मिली है जिनकी निगाहें अपनी होम लोन और कार लोन की ईएमआई पर टिकी थीं। रेपो रेट स्थिर रहने से फिलहाल आपकी मासिक किस्त (EMI) में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।
न्यूट्रल यानी तटस्थ रुख बरकरार
आरबीआई ने अपने नीतिगत रुख को इस बार भी 'न्यूट्रल' (तटस्थ) ही बनाए रखा है। इसका मतलब यह है कि केंद्रीय बैंक देश के आर्थिक विकास को गति देने और महंगाई पर काबू पाने के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाकर चल रहा है। आने वाले समय में आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक संकेतों के आधार पर ही केंद्रीय बैंक की तरफ से कोई अगला कदम उठाया जाएगा।
घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूती और लचीलापन
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने जबरदस्त मजबूती और लचीलापन दिखाया है। देश के भीतर मांग लगातार मजबूत बनी हुई है और विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का प्रदर्शन भी शानदार रहा है। दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारत सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला देश बना हुआ है।
महंगाई और कमोडिटी कीमतों पर पैनी नजर
आरबीआई ने माना है कि हाल ही में खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, लेकिन यह व्यापक स्तर पर नहीं है। इसके साथ ही कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आ रही रुकावटों को लेकर केंद्रीय बैंक पूरी तरह सतर्क है और महंगाई के मोर्चे पर लगातार नजर बनाए हुए है।
लिक्विडिटी और बैंकिंग सिस्टम की स्थिति
बैंकिंग प्रणाली में नकदी (Liquidity) की स्थिति को लेकर गवर्नर ने स्पष्ट किया कि बाजार की जरूरतों के मुताबिक लिक्विडिटी का प्रबंधन किया जा रहा है। इससे बैंकों के पास लोन देने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहेंगे और कॉरपोरेट जगत के साथ-साथ रीटेल सेक्टर को भी सुगमता से कर्ज मिलता रहेगा।
जीडीपी ग्रोथ और आर्थिक अनुमानों पर फोकस
देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की रफ्तार को लेकर आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के अपने अनुमानों का जायजा लिया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि घरेलू खपत और निवेश में तेजी के चलते भारत का ग्रोथ आउटलुक सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है और वैश्विक बाधाओं के बाद भी देश की विकास गाथा मजबूत बनी हुई है।
एक्सटर्नल सेक्टर और विदेशी मुद्रा भंडार की ताकत
भारत का बाहरी क्षेत्र (External Sector) और विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) बेहद मजबूत स्थिति में हैं। मजबूत फॉरेक्स इनफ्लो और कैड (CAD) के नियंत्रण में रहने के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक झटकों को आसानी से झेलने में सक्षम है, जिससे रुपये की चाल को भी आवश्यक संबल मिल रहा है।
रियल एस्टेट और हाउसिंग सेक्टर को सपोर्ट
रेपो रेट के स्थिर रहने से रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी ताकत मिलेगी। डेवलपर्स के लिए फंडिंग में predictability बनी रहेगी और होमबॉयर्स लंबी अवधि के वित्तीय निर्णय बिना किसी अतिरिक्त ब्याज के दबाव के ले सकेंगे। जानकारों का मानना है कि इससे मकानों की मांग में आ रहा उछाल आगे भी निरंतर जारी रहेगा।
डेटा-डिपेंडेंट एप्रोच पर जोर
आरबीआई गवर्नर ने साफ कर दिया है कि केंद्रीय बैंक का पूरा फोकस पूरी तरह से 'डेटा-डिपेंडेंट' (आंकड़ों पर आधारित) रणनीति पर है। आगे आने वाले समय में महंगाई के आंकड़े, वैश्विक व्यापार नीतियां और मानसून की प्रगति जैसी तमाम चीजें तय करेंगी कि भविष्य में ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाया जाना है।
वित्तीय स्थिरता सर्वोपरि
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपने संदेश के अंत में दोहराया कि आरबीआई की सर्वोच्च प्राथमिकता देश में वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) को बनाए रखना है। वैश्विक उथल-पुथल के इस दौर में भारतीय बैंकिंग और वित्तीय तंत्र पूरी तरह सुरक्षित, मजबूत और किसी भी चुनौती से निपटने के लिए सक्षम है।



